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- भिलाई : ईद की पहली नमाज हुई थी सेक्टर – 1 में : डायरी में दर्ज है 64 साल की तारीख : बीएसपी के सेवानिवृत्त कर्मी एमआर अंसारी की डायरी में भिलाई की ईद की तमाम नमाजों की अनूठी जानकारी
भिलाई : ईद की पहली नमाज हुई थी सेक्टर – 1 में : डायरी में दर्ज है 64 साल की तारीख : बीएसपी के सेवानिवृत्त कर्मी एमआर अंसारी की डायरी में भिलाई की ईद की तमाम नमाजों की अनूठी जानकारी

•एमआर अंसारी
भिलाई [छत्तीसगढ़ आसपास] : बीते 64 साल से अबतक ईदुल फित्र और ईदुल अजहा की नमाज का पूरा लेखा-जोखा हुडको निवासी एमआर अंसारी के पास मौजूद थे। दिलचस्प बात यह है कि शुरूआती दौर में दोनों ईद की नमाजें सेक्टर-1 में होती थी, वहीं रोजाना की पांचों वक्त की नमाज बोरिया (आज प्लांट के अंदर का हिस्सा) बस्ती की अस्थाई मस्जिद में पढ़ी जाती थी। बाद के दौर में सेक्टर-6 में आलीशान मस्जिद बनीं और फिर कुछ साल बाद ईदगाह मैदान तैयार हुआ। तब से यहां नमाजें हो रही हैं।
भिलाई स्टील प्लांट के वित्त विभाग से 1995 में रिटायर और भिलाई नगर मस्जिद ट्रस्ट के सदर रहे एमआर अंसारी बताते हैं कि उन्हें डायरी लिखने की शुरू से ही आदत रही है, इसलिए वह रोजमर्रा की बातें नोट कर लिया करते हैं और आज भी वह इसे जारी रखे हुए हैं। अंसारी बताते हैं नवंबर 1959 में वह भिलाई स्टील प्लांट की सेवा से संबद्ध हुए तब बोरिया बस्ती में बड़े भाई के साथ उनका रहना होता था। यह बोरिया बस्ती बाद के दौर में बीएसपी के 40 लाख टन विस्तारीकरण में हटा दी गई और यहां प्लेट मिल और बोरिया स्टोर्स सहित दूसरे निर्माण हुए। वहीं यहां के रहने वालों को अलग-अलग सेक्टर में आवास दिए गए।
अंसारी अपनी डायरी दिखाते हुए बताते हैं वह 1959 में आए, इसलिए 1960 से उन्होंने ईदुल फित्र और ईदुल अजहा का रिकार्ड रखना शुरू किया। जिसमें दिन-तारीख, जगह और नमाज पढ़ाने वाले ईमाम का नाम दर्ज कर लेते हैं। पुरानी डायरी के पन्ने जर्जर हो गए थे, इसलिए अब उसे नए सिरे से दूसरी डायरी में उतार लिए हैं।
उन्होंने बताया कि जब वह भिलाई में बीएसपी की नौकरी में लग गए तब 29 फरवरी 1960 को पहला रोजा पड़ा और इसके बाद ईदुल फित्र की नमाज 29 मार्च 1960 को सेक्टर-1 के मैदान में हुई। इसके बाद 6 जून 1960 को ईदुल अजहा की नमाज भी यहां हुई।
अंसारी बताते हैं सेक्टर-1 क्लब और नेहरू हाउस के बीच आज जहां क्रिकेट मैदान है, वहां 1956 से दोनों ईद की नमाज शुरू हो गई थी। तब बीएसपी के टेलीफोन विभाग में सेवारत और सेक्टर-1 में ही रहने वाले कारी अब्दुल खालिक हाशमी यहां हर साल ईद की नमाज पढ़ाया करते थे।
उन्होंने बताया कि शुरूआती दौर में बोरिया बस्ती में सभी धर्म के लोगों ने अस्थाई तौर अपने-अपने आराधना स्थल बनाए थे। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी बोरिया बस्ती में एक अस्थाई मस्जिद बनाई थी, जहां पांचों वक्त और जुमे की नमाज होती थी। आज जहां बीएसपी का बोरिया स्टोर्स है, वहीं यह मस्जिद थी।
अंसारी ने बताया कि बाद में सेक्टर-6 में बीएसपी की ओर से मस्जिद के लिए जमीन मिली तो फिर 1962 से सेक्टर-6 मस्जिद की जगह पर दोनों ईद की नमाज होने लगी। यहां कारी हाशमी के अलावा बीएसपी के ही कर्मी हाफिज खलील व अन्य लोग साल-दर-साल ईद की नमाजें पढ़ाते रहे।
फिर साल 1969 से हाफिज अजमलुद्दीन हैदर यहां नमाज पढ़ाते रहे, जो सिलसिला साल 2013 तक चला और उनके बाद से हाफिज इकबाल अंजुम हैदर नमाज पढ़ा रहे हैं। मूलत: गाजीपुर (यूपी) के रहने वाले एमआर अंसारी ने बताया कि डायरी लेखन वह शौकिया तौर पर करते रहे हैं और इसलिए यह सारी जानकारी महफूज रह पाई।
अंसारी के डायरी लेखन से प्रभावित शहर के मशहूर आर्किटेक्ट हाजी एमएच सिद्दीकी का कहना है कि यह सारी जानकारी एक धरोहर की तरह है। सिद्दीकी बताते हैं-अंसारी साहब ने न सिर्फ ईद का ब्यौरा अपनी डायरी में लिखा है बल्कि 1960 से अब तक का बहुत सा घटनाक्रम भी अपनी डायरी में दर्ज किया है। यह अपने आप में एक अनुकरणीय कार्य है, जो समाज में बहुत से लोगों को प्रेरणा देता है।

•हाजी एमएच सिद्दीकी और एमआर अंसारी
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