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भिलाई इस्पात संयंत्र : आवास लीज मामला : 4500 लीजधारकों को गुमराह किया जा रहा है? : मालिकाना हक या लीज डीड का पंजीयन? कई सवाल?

आवास लीज मामले में लीजधारकों को किया जा रहा है गुमराह ❓ हकीकत क्या है ❓
भाजपा पार्षद पीयूष मिश्रा ने कहा – 4500 लीजधारकों को रजिस्ट्री के नाम पर गुमराह किया जा रहा है. उन्होंने सवाल उठाते हुए भिलाई इस्पात संयंत्र, कलेक्टर दुर्ग, विधायक भिलाई नगर और नगर निगम भिलाई के महापौर से सवाल किया है? क्या लीजडीड के पंजीयन से लीजधारकों को मालिकाना हक मिल जाएगा ?
क्या लीजधारक अपने आवास और काबिज जमीन का मालिकाना हक मिल जाएगा?
क्या लीजधारक अपने आवास और काबिज जमीन को बीएसपी से एनओसी लिए बिना बैंक में मॉडगेज रख सकेंगे?
लीज आवासों में जरूरत के हिसाब से किए गए अतिरिक्त निर्माण को अपनी राज्य सरकार से नियमितीकरण करवाएंगे?
क्या टाउनशीप में भवन निर्माण की अनुज्ञा देने व अनाधिकृत रूप से लीजधारकों के द्वारा किए जा रहे निर्माण पर बीएसपी अब पेनल्टी एवं अर्थदंड नहीं वसूल कर सकेगा?
क्या अब लीजधारक को मकान/जमीन खरीदने/बेचने के लिए बीएसपी प्रबंधन के पास नहीं जाना पड़ेगा, सीधे रजिस्टार ऑफिस से खरीदी/बिक्री हो जाएगी?
वर्तमान में लीजधारकों के डीड को पंजीकृत किया जा रहा है, क्या वह आगामी 30 वर्षों के लिए की जा रही है या पुराने ही एग्रीमेंट को रजिस्टर्ड किया जा रहा है?
भाजपा नेता ने पत्रकारवार्ता में कई सवाल उठाते हुए बोले –
विधायक देवेंद्र यादव और महापौर नीरज पाल 4500 लीजधारकों और उनके आश्रितों को आबंटित लीज आवासों की लीज डीड पंजीयन का ऐसा डिंडोरा पीट रहे हैं, मानो लीजधारकों को आवास का स्वामित्व मिल गया है?
रजिस्ट्री एवं लीज डीड पंजीयन के बीच के अंतर को समझना जरूरी है. किसी भी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री वर्तमान कलेक्टर दर से की गई शुल्क पर ही की जाती है, तभी उस प्रॉपर्टी का मालिकाना हक मिलता है.
भाजपा नेता ने कहा –
लीज डीड की रजिस्ट्री मात्र एक रेट एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन है, मालिकाना हक नहीं.

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