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भिलाई : ‘ साहित्य सृजन परिषद ‘ : पावस ऋतु पर काव्य संध्या : इंदिरा गाँधी हायर सेकेंडरी स्कूल रामनगर सुपेला भिलाई में : नवांगुत रचनाकारों का सम्मान

•अतिथि –
•आचार्य डॉ. महेश चंद्र शर्मा
[मुख्यअतिथि]
•एनएल मौर्य ‘ प्रीतम ‘
[अध्यक्षता]
•प्रीति सरु
[विशिष्ठ अतिथि]
•काशीनाथ वर्मा
[संस्थापक व पूर्व प्राचार्य]
•संचालन –
•नीता कम्बोज ‘ शीरी ‘
•स्वागत भाषण –
•रामबरन कोरी ‘ कशिश ‘
•आभार व्यक्त –
•नीलम जायसवाल

डॉ.महेश चंद्र शर्मा उद्बोधन देते हुए…
भिलाई [छत्तीसगढ़ आसपास न्यूज़] : श्रावण मास और इसके महादेव शिवशंकर का साहित्य और कलाओं से गहरा संबंध है. उनके एक रूप नटराज तो नृत्य संगीत आदि का आदर्श और आराध्य भी माना गया है. रामायण साहित्य के तो वे प्रथम प्रस्तुतकर्ता भी माने गए हैं. साहित्य सृजन परिषद ने इसी पृष्ठभूमि पर काव्य गोष्ठी का आयोजन विगत दिनों ‘ इंदिरा गाँधी हायर सेकेंडरी स्कूल ‘ रामनगर सुपेला भिलाई में किया.
प्रारंभ में माँ वागीश्वरी के तैल चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित किया गया. माँ सरस्वती वंदना श्रीमती आशा झा ने सस्वर प्रस्तुत किया.
‘ इंदिरा गाँधी हायर सेकेंडरी स्कूल ‘ के संस्थापक एवं पूर्व प्राचार्य काशीनाथ वर्मा ने मुख्यअतिथि डॉ. महेश चंद्र शर्मा का शॉल श्रीफल से सम्मान किया. उन्होंने कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजनों में सदा सहयोग करते रहेंगे.
मुख्यअतिथि डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने कहा –
ऋषि प्रधान और कृषि प्रधान भारतीय संस्कृति में वर्षा ऋतु का विशेष महत्व है. वैदिक और पौराणिक भारतीय शिक्षा सत्र का शुभारंभ श्रावण मास से माना गया है. पठन – पाठन और काव्य रचना के लिए भी ये मौसम अच्छा माना गया. विश्व कवि गोस्वामी तुलसीदास ने भी रामचरित मानस में वर्षा ऋतु का शिक्षापद वर्णन किया है. वे कहते हैं कि बादल बरसात में वैसे ही धरती के पास आकर झुककर बरसाते हैं, जैसे ज्ञान पाकर विद्वान विनम्र हो जाते हैं.
साहित्य सृजन परिषद के अध्यक्ष और काव्य संध्या गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए एनएल मौर्य ‘ प्रीतम ‘ ने कहा –
पावस ऋतु के अवसर पर रचनाकारों ने इंद्रधनुष की छटा बिखेरकर अपने – अपने रंग रस से सबको सरोबार कर दिया. पावस ऋतु पर आयोजित यह कार्यक्रम सार्थक, उत्साहवर्धक एवं नव रचनाकारों के लिए प्रेरणास्रोत रहा. एनएल मौर्य ‘ प्रीतम ‘ ने आगे अपनी रचना का पाठ किया – फहराती हुई गेसुएं काली घटा बन गगन पे छा गई हैं, पपीहा पीय – पीय पुकार रही मयूर नृत्य में मग्न है…
प्रीति सरु ‘ गुनगुन ‘ ने अपनी बात बरसात को लेकर कुछ यूं कही – उमड़ घुमड़ कर छाई घटा फिर छाई घटा घनघोर… के आया सावन, सावन सावन चहूं ओर…


{ •कविता पाठ करते हुए रचनाकार }

प्रदीप भट्टाचार्य पावस ऋतु पर अपनी बात रखते हुए…
▪️ इस पावस संध्या काव्यगोष्ठी में इन रचनाकारों ने भी अपनी – अपनी प्रतिनिधि कविताओं का पाठ किया –
शायर मुमताज/शमशीर शिवानी ‘ घायल ‘/सोनिया सोनी/डॉ.बीना सिंह ‘ रागी ‘/प्रकाश चंद्र मण्डल/डॉ.नीलकंठ देवांगन/आलोक नारंग/संध्या जैन/गजेंद्र द्विवेदी ‘ गिरीश ‘/नवेद रज़ा दुर्गवी/इस्माइल आजाद/हाजी रियाज खान गौहर/चंद्र कुमार वर्मा/हेमंत कुमार निषाद/दीपक निषाद/विजय कुमार/रामबरन कोरी ‘ कशिश ‘/त्रिलोकी नाथ कुशवाहा ‘ अंजन ‘/नीलम जायसवाल/सीमा साहू/आशा झा/डॉ.नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘ सब्र ‘/नीता कम्बोज ‘ शीरी ‘/राम मनोहन कश्यप/डॉ.एके सिंह/वीर सिंह/राजेंद्र कुमार/मुकुल कुमार झा/अनुराधा बख्शी/जितेंद्र कुमार/जीपी मौर्य और ‘ छत्तीसगढ़ आसपास ‘ ग्रुप के ग्रुप एडिटर प्रदीप भट्टाचार्य.


{ •नव रचनाकारों का ‘ साहित्य सृजन परिषद ‘ ने सम्मान किया }

ग्रुप फोटो रचनाकार और अतिथि
[ •रिपोर्ट : डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘ सब्र ‘]
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