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गीत : नवा सबेरा आही – डॉ. दीक्षा चौबे { दुर्ग छत्तीसगढ़ }
3 years ago
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सोच-फिकिर ल काबर करथव , दुख के साँझ पहाही ।
नवा सुरुज उगही जिनगी मा, नवा सबेरा आही ।।
दिया नानकुन बरथे तब्भो , भाग जाथे मुंधियारी ।
शिक्षा के उजियार बगरही , खोलव अपन दुआरी ।
सुनता के पंखा चलही ता, भूसा हर फेंकाही ।।
नवा सुरुज उगही जिनगी मा, नवा सबेरा आही ।।
खून पछीना छींच-छींच के, अन्न किसान उगाथे ।
साल भर ओ मेहनत करके, खाये के पूर्ती पाथे ।
मान करव तुम करमइता के , खुसहाली उहि लाही ।।
नवा सुरुज उगही जिनगी मा, नवा सबेरा आही ।।
आघू बढ़बो मिहनत करके, जुरमिल जम्मो रहिबो ।
जाति पाति के भेद भुला के, सुख दुख संग म सहिबो ।
हमर लगन अउ मिहनत सरलग,चिखला म कँवल उगाही ।।
नवा सुरुज उगही जिनगी मा, नवा सबेरा आही ।।
•संपर्क –
•94241 32359
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chhattisgarhaaspaas
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