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- दुर्ग : संस्कृत सप्ताह समारोह : संस्कृत के ज्ञान – विज्ञान ने बनाया भारत को विश्व का सिरमौर – डॉ. महेशचंद्र शर्मा : संस्कृत कैरियर के लिए भी उपयोगी – डॉ. एसएन झा
दुर्ग : संस्कृत सप्ताह समारोह : संस्कृत के ज्ञान – विज्ञान ने बनाया भारत को विश्व का सिरमौर – डॉ. महेशचंद्र शर्मा : संस्कृत कैरियर के लिए भी उपयोगी – डॉ. एसएन झा

दुर्ग [छत्तीसगढ़ आसपास न्यूज़] : दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा ज्ञान -विज्ञान की भाषा संस्कृत के कारण है। वेदों, रामायण, गीता, कालिदास और तुलसीदास के बिना भारत को भारत भी समझने में मुश्किल होती है। विश्वकवि कालिदास और तुलसीदास शब्द और अर्थ को शिव-शक्ति और श्रद्धा – विश्वास के रूप में प्रस्तुत करते हैं। विज्ञान और संस्कृति के इसी समन्वय के प्रभाव से चन्द्रयान स्थल को वर्तमान में शिव-शक्ति स्थल की संज्ञा दी गई है। राम चरित मानस में वाल्मीकि और पवनसुत को विशुद्ध वैज्ञानिक माना गया। उधर गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ज्ञान के साथ विज्ञान भी समझाने का आश्वासन पूरा किया।

वेद तो ज्ञान -विज्ञान और धर्म के मूल हैं हीं। गायत्री मन्त्र द्वारा सूर्य उपासना अनादिकाल से जारी है।इधर इसरो ने आदित्य एल-1 सूर्य की ओर छोड़ दिया है। भारत इसी पृष्ठभूमि पर आज भी विश्वगुरु है। भारत वंशी यू.के. और सिंगापोर में शासन कर ही रहे हैं, अमेरिका में भी प्रत्याशा है। ” ये विचार हैं आचार्य डॉ महेशचन्द्र शर्मा के। संस्कृति मर्मज्ञ और शिक्षाविद् डॉ. शर्मा छत्तीसगढ़ के उत्कृष्ट महाविद्यालय शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्वाशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुर्ग में मुख्य अतिथि की रूप में विशेष रूप से आमन्त्रित थे। अवसर था विश्व संस्कृत सप्ताह समारोह का समापन। विद्यार्थियों हेतु पाठ्य पुस्तक भेंट समारोह के तहत आचार्य डॉ. शर्मा ने 30-40 विद्यार्थियों को स्वलिखित पुस्तकें सटीक शुकनाशोपदेश भी नि: शुल्क भेंट कीं। त्वरित प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में रामायण में देशभक्ति को बताने वाले विद्यार्थियों को नक़द पुरस्कार भी दिये। अपने कीर्ति शेष दादा जी पं.मदन शर्मा की स्मृति में नक़द पुरस्कार की भी घोषणा की,जो संस्कृत में सर्वोच्च अंक प्राप्त विद्यार्थी को देय होगा। देवी सरस्वती जी की पूजा – अर्चना से शुभारम्भ हुए इस समारोह में कालेज की ओर से डा. शर्मा का सम्मान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ.एस.एन. झा ने संस्कृत की महत्ता बताते हुए इसे कैरियर के लिये भी बहुत उपयोगी बताया।

भूगोल के प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार मिश्र ने बताया कि कैसे जर्मन विद्वान् गेटे संस्कृत नाटक शाकुन्तल को पढ़कर नाचते रहे? संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो.जनेन्द्र कुमार दीवान ने संस्कृत में सफल संचालन करते हुए विद्यार्थियों से कहा कि वे विद्वानों के मार्गदर्शन का लाभ उठायें। प्रो.दीवान ने आचार्य डॉ.शर्मा का परिचय देते हुवे देश-विदेश में उनके द्वारा की गई संस्कृत सेवा की सराहना की। ज्ञातव्य है कि आचार्य डॉ महेशचन्द्र शर्मा 25 वर्ष से अधिक अवधि तक इसी कालेज में सफल प्रोफ़ेसर एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष रहे। कार्यक्रम में अन्य विषयों के शिक्षक – विद्यार्थी गण भी बड़ी संख्या में उपस्थित होकर देर तक लाभान्वित हुए।

आभार व्यक्त हिंदी साहित्य के डॉ. रजनीश उमरे ने दिया.
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