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छत्तीसगढ़ी के पहिली ताँका संग्रह – ‘हरियर मड़वा’ । छत्तीसगढ़ी भाषा म समीक्षा:-
छत्तीसगढ़ भाषा म सबले पहिली विस्तृत समीक्षा लिखय के नवाचार डाँ. बलदेव करिन। उकर मयारु माटी म छपे समीक्षा अनुपम व ऐतिहासिक आय।
समीक्षा किताब ‘:छत्तीसगढ़ी काव्य के कुछ महत्वपूर्ण कवि’ भाग एक (2013)देखें जा सकता हे। समीक्षा के क्षेत्र म विनय कुमार पाठक के नाव भी ससम्मान लिये जाथे उनकर पहिली समीक्षा किताब हे ” छत्तीसगढ़ी साहित्य अउ साहित्यकार”। डाँ उर्मिला शुक्ला के ‘छत्तीसगढ़ी साहित्य के विकास’ (2018) म महिला लेखन म समीक्षा के पहिली किताब आय।
कविता म नवाचार:-
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“रेवाराम बाबू द्वारिका प्रसाद बिप्र कोदूराम दलित, कुंज बिहारी चौबे, रामबिलास साहू, लाला जगदलपुरी, बच्चू जांजगिरी, नारायनलाल परमार, हरिठाकुर, श्यामलाल चतुर्वेदी, ध्रुवराम बर्मा, हनुमंत नायडू, राजदीप, उधोराम झखमार अउ विमल कुमार पाठक के संगेसंग प्यारेलाल गुप्त के कविता म सिल्प अउ कथ्य के द्रिस्टी ले नवापन हावय ।” डाँ. बलदेव
“पुराने खेवे के पं० शुक्रताल प्रसाद पांडेय, गिरवरदास वैष्णव, स्व० लोचन प्रसाद पांडेय एवं धानुलाल श्रीवास्तव की कविताओं में नयी कविता के पहले की स्थिति का अवशेष रूप दिखायी पड़ता है।’ श्याम परमार 1जून 1961 आकाशवाणी भोपाल
पं. द्वारिका प्रसाद तिवारी ‘विप्र’ ‘कुछू काहीं'(1934) एहर लोकगीत के धून म नव आयाम के संदेश देथें, सुराज गीत (1958),पंचवर्षीय योजना गीत(1961),’फागुन गीत’ , डबकत गीत (1968), 80 के दशक म नंदकिशोर तिवारी हर विप्र जी के गीत मन के संकलन “धमनी हाट” प्रकाशित करीन हे।, प्यारे लाल गुप्त ‘हमर कतका सुंदर गांव’, कवि कुंजबिहारी चौबे “बियासी के नांगर”(1937),कपिलनाथ कश्यप “रामकथा’,’कृष्णकथा’,’नवा बिहान’,’डहर के फूल’,’गजरा’, गिरवर दास वैष्णव ‘छत्तीसगढ़ सुराज’ (1930), हरि ठाकुर ‘शहीद वीर नारायण सिंह’ खंडकाव्य’ (1995)जय छत्तीसगढ़ (1977)’,सुरता के चंदन(1979), धान के कटोरा(1997) ‘, ‘बानी हे अनमोल’ (2001),। हेमनाथ यदु ‘सोन चिरइय्या’, छत्तीसगढ़ी रामायण (सुदंर कांड किसकिंधा अउ उत्तरकांड), नवा सूरज के अगवानी,।भगवती लाल सेन ‘नदिया मरे पियास,देख रे आँखी सुन रे कान’,आदि प्रमुख हे।
नवा कविता के शिल्प, भाषा अउ विचार तीनों स्तर म नवाचार के दर्शन हमला रलखनलाल गुप्ता , नारायण लाल परमार ,भगत सिंह सोनी , प्रभंजन शास्त्री,डाँ. बलदेव अउ डाँ. देवधर महंत के काव्य म देखें बर मिल जाथे। ए पंक्ति म लखनलाल गुप्त के संझौती के बेरा, भगत सिंह सोनी के ‘रहंचुली’ , प्रभंजन शास्त्री के बिना भांडी के अंगना . …..डाँ. बलदेव: धरती सबके महतारी (2002) ,डाँ. देवधर महंत के लम्मा कविता अरपा नदियां (1983 आदि के नांव लिए जा सकत हे। लोकाक्षर के संपादक नंदकिशोर तिवारी के अनुसार ” डाँ. बलदेव के कविता पारंपारिक लोक छन्द के तर्ज ल लेके आगू बढ़थे अउ छत्तीसगढ़ी कविता म प्रकृत काव्य के आस्वाद पैदा करथे। एक नवा अउ कहे जाय त अनचिन्हार काव्य शिल्प के रद्दा ल अख्तियार करके छत्तीसगढ़ी कविता बर नवा अध्याय रचथे। (लोकाक्षर सितम्बर 2004)
पं. दानेश्वर शर्मा ‘तपत कुरू'(1999),मेहत्तर राम साहू ‘रतना बपुरी'(2003),’कैकेयी’ लघु प्रबंध काव्य), गया प्रसाद बसेढ़िया ‘महादेव के बिहाव’ खंड काव्य , लाल फूलचंद ‘चौरा के तुलसी’ (2005), प्रकृत कवि बद्री विशाल परमानंद के ‘पिंवरी लिखे तोर भाग’,मन्नीलाल कटकवार ‘लीलागर’,’नगेसर कइना’, उंकर छत्तीसगढ़ी के स्त्रेस्ठ खंड काव्य हे।राजेन्द्र तिवारी ‘भुईयां के पाकिस चुंदी’, समरथ गँवइया ‘मरबो फेर रोवन नइ दन’ , श्यामलाल चतुर्वेदी के ‘पर्रा भर लाई’, ‘राम बनवास’, प्रभंजन शास्त्री ‘बिन बंदी के अंगना’, ‘छत्तीसगढ़ी रामायण महाकाव्य’, नारायण लाल परमार ‘काँवर भर धूप’ (1972)काव्य संग्रह आय। बृजलाल प्रसाद शुक्ल ‘चंदा उगे अकास’ (1967), चेतन भारती ‘अंचरा के पीरा’, लक्ष्मण मस्तुरिया के 77 छत्तीसगढ़ी कविता मन के संग्रह ‘मोर संग चलव’ (2003),’सोनाखान के आगी‘(1983) खण्ड काव्य’, ‘धुनही बंसुरिया’,। विद्याभूषण मिश्र ‘छत्तीसगढ़ी गीतमाला’, फूल भरे अंचरा’,हरिहर वैष्णव ‘धनकुल’ बस्तर के महाकाव्य, रामेश्वर शर्मा ‘सवनाही’, 2016, ईश्वर शरण पांंडेय ‘पान मुखारी’ (2010), ‘लक्ष्मी पुराण: (उड़िया से छत्तीसगढ़ी में काव्यानुवाद 2008), बेटी परे के धरना धरे होथे धन (कालिदास कृत अभिज्ञान शाकुंतलम के चतुर्थ अंक का छत्तीसगढ़ी अनुवाद 2010), छत्तीसगढ़ी गजल लिखइया रामेश्वर वैष्णव, मुकुंद कौशल ‘भिनसार’ आदि प्रमुख हे। डाँ.जीवन यदु ‘अइसनेच रात पहाही’ कविता नाटक बहुत लोकप्रिय हे। कृष्णा रंजन ‘सुजी अउ संगवारी’ छत्तीसगढ़ी के पहिली हाइकु संग्रह ,प्रदीप कुमार दाश “दीपक” (“मइनसे के पीरा”-2000) प्रमुख हे। रमेश कुमार सोनी, छत्तीसगढ़ी बाल कविता संग्रह ‘हम खेलबो घर घूंदिया’ मुरारी लाल साव प्रकासन सन 2001, रामेश्वर शर्मा मास्टरिन 2023 (अनुवाद हिन्दी से छत्तीसगढ़ी) हाँसी करे के फल – 2023 बाल कविता संग्रह (अनुवाद हिन्दी से छत्तीसगढ़ी) जेहर छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य म नवाचार के उदाहरन हे ।
महिला कवियत्री म डाँ. निरुपमा शर्मा के ‘पतरेंगी'(1968), ‘दाई खेलन दे’, ‘रितु बरनन’ (काव्य संग्रह), डाँ. सत्याभामा आडिल ‘गोठ’ ,’रतिहा पहागे’ (काव्य संग्रह), गीता शर्मा के ‘शिवपुराण’ संस्कृति ले छत्तीसगढ़ी म गद्यानुवाद। उर्मिला शुक्ल के ‘महाभारत म दुरपति’ (खंडकाव्य) (2012) कोन्हो महिला द्वारा लिखय गय पहिली खण्ड काव्य हे।अउ ‘छत्तीसगढ़ के अउरत ‘ काव्य संग्रह (2013) आदि के कविता म शिल्प अउ बिम्ब म नवा प्रयोग देखें जा सकत हे।
छत्तीसगढ़ी भाषा म छन्द
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छत्तीसगढ़ राज बने के बाद दलित जी के बेटा डाँ. अरुण कुमार निगम जी के छत्तीसगढ़ी भाषा म 50 किसम के छन्द के संग्रह “छन्द के छ’ (2015) प्रकासित होय हे , आजकल उंकर ‘छंद के छ’ नाम के आँनलाइन गुरुकुल मा छत्तीसगढ़ के 250 ले जादा नवा कवि अपन माईभाखा मा किसम किसम के छन्द युक्त कविता लिखत हावय। उंकर ‘छन्द के छ’ ब्लॉग म 2500 हजार छंद रचना के प्रकासन हो गय हे। छन्द के छ ऑनलाइन गुरुकुल मा छन्द सीखके छन्द साधक मन अभी तक लगभग 25 किताब प्रकाशित कर चुके हें।
1 अरुण कुमार निगम – छन्द के छ
2 रमेश कुमार चौहान –आँखी रहिके अंधरा
3 रमेश कुमार चौहान दोहा के रंग
4 रमेश कुमार चौहान – छन्द चालीसा
5 रमेश कुमार चौहान- छन्द के रंग
6 चोवाराम “बादल” – छन्द बिरवा
7 मनीराम साहू “मितान” हीरा सोनाखान के
8 मनीराम साहू “मितान” महा प्रसाद
9 शकुन्तला शर्मा – छन्द के छटा
10 जगदीश हीरा साहू- सम्पूर्ण रामायण (सार छन्द मा मनका)
11 जगदीश हीरा साहू – छन्द संदेश
12 रामकुमार चंद्रवंशी – छन्द झरोखा
13 रामकुमार चंद्रवंशी – छन्द बगिच्चा
14 बोधनराम निषादराज- अमृतध्वनि छन्द
15 आशा देशमुख – छन्द चंदैनी
16 कन्हैया साहू ‘अमित’ – छत्तीसगढ़ी जनउला
17 कन्हैया साहू ‘अमित’ – फुरफन्दी
18 धनेश्वरी सोनी ‘गुल’ – सवैया छन्द संग्रह
19 धनेश्वरी सोनी ‘गुल’ – बरवै कोठी
20 सुखदेव सिंह अहिलेश्वर – छन्द सरगम
21 चोवाराम “बादल” – श्री सीताराम कथा (महाकाव्य)
22 बोधनराम निषादराज – हरिगीतिका छन्द संग्रह
23 विजेन्द्र कुमार वर्मा- मनहरण घनाक्षरी छन्द संग्रह
24 शुचि भवि – छन्द फुलवारी
25 द्वारिकाप्रसाद लहरे – छन्द गीत संग्रह
26 बोधनराम निषादराज- आल्हा छन्द जीवनी
(2015 से सितम्बर 2023 तक)
छत्तीसगढ़ी उपन्यास:-
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छत्तीसगढ़ उपन्यास गद्य साहित्य म नवाचार करइया साहित्यकार मन के नाव ऐ तरा हे
दियना के अंजोर 1964 रविशंकर शुक्ल, मोंगरा 1964 शिवशंकर शुक्ल, चंदा अमरित बरसाइस 1965 लखन लाल गुप्त, फुटहा करम 1971 ठाकुर हृदय सिंह चौहान, कुल के मरजाद 1980 केयूर भूषण, छेरछेरा 1983 पं. कृष्ण कुमार शर्मा, उढरिया 1999 डॉ. जे.आर. सोनी, कहाँ बिलागे मोर धान के कटोरा 2000 केयूर भूषण, दिन बहुरिस 2001 अशोक सिंह ठाकुर, आवा 2002 डॉ. परदेशी राम वर्मा, लोक लाज 2002 केयूर भूषण, कका के घर 2003 रामनाथ साहू, चन्द्रकला 2005 डॉ. जे.आर.सोन, भाग जबर करनी मा दिखाये 2005 संतोष कुमार चौबे, माटी के मितान 2006 सरला शर्मा, बनके चंदैनी 2007 सुधा वर्मा, भुइयॉं 2009 रामनाथ साहू,
समे के बलिहारी 2009 से 2012 केयूर भूषण, मोर गाँव 2010 जनार्दन पाण्डेय, रजनीगंधा 2010 डॉ. बलदाऊ प्रसाद पाण्डेय पावन, विक्रम कोट के तिलिस्म 2010 डॉ. बलदाऊ प्रसाद पाण्डेय पावन, तुंहर जाए ले गियाँ 2012 कामेश्वर पाण्डेय, जुराव 2014 कामेश्वर पाण्डेय, करौंदा 2015 परमानंद वर्मा राम , पुरखा के भुइयॉं 2014 डॉ.मणी महेश्वर ‘ध्येय’, डिंगई 2015 लोक बाबू, केरवंछ 2013 मुकुन्द कौशल, सुरसुतिया विमल मित्र।
ये सबेच कथाकार मन के गद्य साहित्य म सामाजिक,राजनीतिक,धार्मिक विचार मन म नवाचार अउ नव विचार भरे पड़े हें।
छत्तीसगढ़ी नाटक:-
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सबले पहिली ‘ कलिकाल'(1905) छत्तीसगढ़ी नाटक’ लोचन प्रसाद पाण्डेय हर लिखे रहिस। डाँ. खूबचंद बघेल ‘करम छड़हा’, ‘लेडगा सुजान,’ ‘ऊँच नीच’ ‘बेटवा बिहाव’, नाटक, नरेंद्र देव वर्मा के ‘मोला गुरू बनाई लेते’ प्रहसन। कपिलनाथ कश्यप के ‘गुरांवट बिहाव’, ‘डहर के फूल’,’अंधियारी रात’,सीता केयूर भूषण ‘फुटहा करम’, नन्दकिशोर तिवारी जी के ‘रानी दई डभरा के”,”मोर कुँवा गंवागे”, डॉ. परदेशी राम वर्मा के ‘मंय बईला नोहंव, रामनाथ साहू के ‘जागे जागे सुतिहा गो!,” चंद्रशेखर चकोर ‘टेखा राजा’, डॉ. सुरेंद्र दुबे के ‘पीरा’, दुर्गा प्रसाद पार्कर के ‘ सुराजी गांव ‘आदि म विषय -विचार, संवाद म नवाचार के दर्शन होथे। नारायण लाल परमार ‘सोन के माली'(1956) अंग्रेज़ी के छत्तीसगढ़ी भावानुवाद, ‘सुरुज नई मरे’, ‘मतवार’ एकांकी, नंदकिशोर तिवारी ‘परेमा’ एकांकी।
छत्तीसगढ़ी कहानी:-
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छत्तीसगढ़ी कहानी लिखइया डॉ.परदेशी राम वर्मा, लखनलाल गुप्त,केयूर भूषण, डाँ.पालेश्वर प्रसाद शर्मा
‘सुसक झन’, सुशील भोले, सुधा वर्मा, डॉ. पीसी लाल यादव, कुबेर,चन्द्रहास साहू, पोखन लाल जायसवाल, गयाप्रसाद साहू, महेंद्र बघेल, डुमन लाल ध्रुव, डॉ. विनोद वर्मा, चोवाराम वर्मा बादल, डॉ. सी. एल.साहू, रामनाथ साहू प्रमुख हे जेकर कहानी के शिल्प ,भाषा अउ कथावस्तु म भी नवाचार के उदिम दिखथे। हेमचंद्र पाण्डेय जी ‘छत्तीसगढ़ी कहिनी पाठ’ बर आकाशवाणी अंबिकापुर जात रहिन। उंकर अलग से कहानी संग्रह अभी नइ आय हे। लेकिन छत्तीसगढ़ लोकाक्षर म उंकर कहानी ,समीक्षा छपत रहिस।
डॉ॰ राजेन्द्र सोनी के रचित (खोरबहरा तोला गांधी बनाबो),छत्तीसगढ़ी में प्रथम लघुकथा संग्रह हे।
महिला लघुकथा कार म डाँ. शैल चन्द्रा ‘गुड़ी अब सुन्ना होगे’, शकुंतला शर्मा ‘करगा’ लघुकथा संग्रह), सुधा वर्मा के ‘चुरकी भुरकी’,(लोककथा)
छत्तीसगढ़ी व्यंग:-
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व्यंग : मेदनी प्रसाद पांडेय ‘कछेरी’ व्यंग रचना, श्री जयप्रकाश मानस के ‘कलादास के कलाकारी’ (छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रथम व्यंग संग्रह 1995) हे। लक्ष्मण मस्तुरिया (गुनान गोठ, वैभव प्रकाशन द्वारा 2015 म प्रकाशित, जेमा 34 व्यंग्य लेख हे, गाय न गरु सुख होय हरु, ये व्यंग हर एम. ए. हिन्दी साहित्य म शामिल रीहीस ), डाँ. राजेंद्र सोनी के ‘ खोरबाहरा तोला गाँधी बनाबो, वीरेंद्र सरल, महेंद्र बघेल,राजकुमार चौधरी, सुशील भोले के ‘भोले के गोले’ (व्यंग संग्रह 2015) जइसन कतेक झन नवाचारी व्यंग लेखन करत हवय।
निबंध,जीवनी, वृत्तांत म भी कलमकार होईन हे। फेर विस्तार भय के कारन बस पाछु)
अंत म मोर हार्दिक इच्छा हे
छत्तीसगढ़ी भाषा ह लोगन मन के बीच चारो कोती बगरे, समृद्ध होय अइसन मोर कामना हावे।
बसंत राघव
रायगढ़ छत्तीसगढ़
संपर्क – 83199 39396
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chhattisgarhaaspaas
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