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संस्मरण : ‘ यादगार वोटिंग ‘ सुधा वर्मा [रायपुर छत्तीसगढ़]
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यादगार वोटिंग
मेरी चाचा जी माना हाई स्कूल में प्राचार्य थे। हार्टअटैक से उनका निधन हो गया। उसी समय पाँचवें दिन वोटिंग थी।
मेरी माँ कट्टर काँग्रेसी परिवार की थी और पिताजी भी।
पिताजी बी एड कालेज में प्रोफेसर थे। हमारे यहाँ नारी शिक्षा और स्वतंत्रता पर हमेंशा जोर देते रहे थे। हर काम में महिलाओं का विचार जरुर लेते थे।
अचानक माँ जनसंघ में जाने लगी बाद में बी जे पी में। ईदगाहभाठा में कम पढ़े लिखे ज्यादा थे और सिंधी बहुत थे। माँ सबको जगाने का काम करती थी। माँ जिसको बोलती उसी को वोट देते थे।
मेरे मामा जी और छंगा मामा आये तो माँ प्रचार के लिये निकल रही थी।मामा लोग बोले दीदी बी जे पी में कैसे ? हमारा पूरा परिवार दूद दूर तक काँग्रेसी है। तो माँ ने कहा की ” बदलाव जरुरी है, इस इमरजेंसी से मेरी बेटी बहुत परेशान रही अब मैं काँग्रेस के लिये न काम करुंगी न वोट दूँगी।”
दोनों मामा चुप थे।
दीदी का बच्चे छोटे थे। साढ़े पाँच बचे साइंस कालेज से छूटने के बाद शंकर नगर जाने में एक घंटा लगता था। सुबह नौ चालीस को क्लास शुरु हो जाती थी। दो बच्चे को माँ के पास ईदगाहभाठा छोड़कर जाती थी। एक बच्चा अकेले रहता था। कितने लोग जेल में बंद थे।माँ को यह दर्द देखा नहीं गया।
मेरे बड़े पिताजी सुने तो उनको भी आश्चर्य हुआ।सब लोग दशगात्र के लिये पाटन के पास पंदर गाँव में थे। वोट डालना था। शाम को सब आँगन में बैठे थे तब माँ ने कहा कि कल सुबह आठ बजे की बस से रायपुर वोट डालने जाना है और बारह बजे की बस से वापस आ जाऊंगी। जहाँ बस लाखेनगर में रूकती थी वहीं पर बूथ था।
काका ने कहा नहीं यहाँ देखना जरुरी है। बड़े पिताजी बोले मंझली को एक घंटे के लिये भी घर नहीं छोड़ना है। खाने का सब माँ ही देखती थी।
माँ ने कहा वोट तो मुझे देना ही है। मेरा एक वोट खराब चला जायेगा। काका ने कहा मैं तुम्हारे बदले वोट डालने जाता हूँ।
माँ ने कहा कि ” मेरे.बदले वोट डालोगे तो बी जे पी को डालना पड़ेगा।”
काका ने ” हाँ ” कहा
माँ ने कहा ” मैं कैसे विश्वास करूँ कि कोई काँग्रेस वाला मेरा वोट डालेगा।”
काका ने कहा ” जितने लोग यहाँ बैठे हैं.सबके सामने यह वायदा करता हूँ कि मैं अपना वोट बी जे पी को तुम्हारे बदले डालुँगा।”
माँ ने कहा कि ठीक है मुझे विश्वास है।
किसी ने सवाल किया कि ऐसा क्यों?”
काका ने कहा कि ” वोट डालने की स्वतंत्रता सबको है। हमारे परिवार में नारी स्वतंत्र है। वह जिसे चाहे उसे वोट डाल सकती है। इस बार का मेरा वोट मैं अपनी पत्नी को देता हूँ।” सब लोग तारीफ किये । दूसरे दिन सुबह आठ बजे की बस से जाकर काका रायपुर से वोट डाल कर आ गये।
हमारे गाँव में हलवाई लगा था दशगात्र में पहले बहुत खिलाते थे तो सब कलेवा पहले से बनवा कर रखना पड़ता था।
उसके बाद हमारे घर में दो अलग अरग वोट जाता था। माँ सिंधियों के बीच बहुत प्रचार करती थी। माँ जाती थी तो काजू और बादाम लाकर रखते थे।
यह यादगार वोटिंग थी।
•संपर्क –
•94063 51566
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