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बांग्ला काव्य संग्रह ‘ आमाके उन्मुक्त करो ‘ : कवि – प्रकाश चंद्र मण्डल

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बांग्ला काव्य संग्रह
‘आमाके उन्मुक्त करो ‘
[ प्रकाशित 64 कविता सूचीबद्ध शीर्षक ]
सागर के पास खड़े/एक घर से दूसरे घर/आमाके उन्मुक्त करो/महायुद्ध का आभाष/दाग़/स्वप्न भी सत्य होता है/आबार फिरे पेलाम/जीबोनेर किछु कथा आमाय पिछु डाके/आबार फिरते होबे/स्मृति के द्वार/से तुमी नई/माँ चामुंडेश्वरी/स्मृति/रामधनु/
भाबेछिलाम/तोमार आमार बसोन्तो/डाक एशेछे/नींड़ हारा पाखी/पथ अबरूद्ध/प्रेम
बीथिका/मकड़ी/पलाश/पुण्य स्मृति/जीबोने बन्धुर प्रयोजीन यता/शरोतेर डाक एशेछे/सोबाई उड़ते चाय/काण्डारी/मृगतृष्णा/संध्या एसेछे नेमे/अप्रतिम प्रकृति/हिंसा/समर्पण/आशा का अंत नहीं/कलम आर चोलेना/एकट्टा बंधुर परिभाषा/आसाड़ा/दुनियार रीत/के जेनो आबीर छोड़ीये दिलो/छन्दों विहीन/समुद्र सोईकते[जुहू]/जल छोबि/होना चाहता हूँ सबका प्रिय/अभिशाप/गुलाब फूल/खूब गर्मी/अग्नि परीक्षा/मन क्यों इतना बात करता है/निरोब्धि/अग्निर बिभीषिका/कोड़ाईकनाल और
कबिता बिमुख होए आछे.

👉 {बाएँ से}
गोविंद पाल, ओमप्रकाश शर्मा, प्रकाश चंद्र मण्डल, तापस दासगुप्ता, नरेंद्र सिक्केवाल, श्रीमती बाणी चक्रवर्ती और प्रदीप भट्टाचार्य

👉 {बाएँ से}
गोविंद पाल, बलराम सिंह, सुरेंद्र शर्मा, ओमप्रकाश शर्मा, नरेंद्र सिक्केवाल, प्रकाश चंद्र मण्डल, नरेंद्र कुमार बन्छोर, हृदय नारायण मिश्र, लखनलाल शर्मा, रजनीकांत श्रीवास्तव और जयश्री जोशी.
विगत दिनों हुए विमोचन और लोकार्पण की कुछ तस्वीर.
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chhattisgarhaaspaas
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