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- विशेष : एकादेशी म जेठउनी हे खास : चार महीना के सोये श्री विष्णु जागथे अउ मंगल करथे – डॉ. नीलकंठ देवांगन
विशेष : एकादेशी म जेठउनी हे खास : चार महीना के सोये श्री विष्णु जागथे अउ मंगल करथे – डॉ. नीलकंठ देवांगन
कातिक महीना के अंजोरी पाख के एकादशी ल देव उठनी, देवोत्थनी, देव प्रबोधनी, देव उठान,देवोत्थान एकादशी के नाम ले जाने जाथे | छत्तीसगढ़ी मं येला ‘ जेठउनी ‘ कहिथें | ये एकादशी के बड़ महत्व हे | मानता हे के ये दिन ले शादी बिहाव, गृह प्रवेश, अउ सब प्रकार के शुभ मांगलिक कार्य शुरू हो जथे | वइसे तो हमर देश के परंपरा मं हर एकादशी के अपन महत्व हे चाहे अंधियारी पाख के एकादशी होय या अंजोरी पाख के,फेर देव उठनी एकादशी के खास महत्व बताय गेहे | ये दिन ल तुलसी विवाह के रूप मं घलो मनाय जाथे |
चार महीना भगवान विष्णु क्षीर सागर मं शयन करथे – केहे जाथे के असाढ़ महीना के अंजोरी पाख के एकादशी के भगवान विष्णु ह शंखासुर नांव के पराक्रमी राक्षस ल मार के अपन थकावट ल दूर करे खातिर क्षीर सागर मं शेष नाग के शैय्या मं सोगे | अतका थके रिहिसे के चार महीना तक सुते रिहिस | ये दौरान मांगलिक कार्य नइ होवय | जब कातिक महीना के अंजोरी पाख एकादशी के दिन जागिस उठिस , त उही ह देव उठनी एकादशी कहलाइस | तब ले हर साल भगवान विष्णु साल के चार महीना सोथे अउ कातिक मं जेठउनी के जागथे |
भगवान काबर सुतथे चार महीना – येखर बड़ रोचक कथा हे – लक्ष्मी ह एक बार भगवान नारायण ल किथे – ‘तुमन दिन रात जागत रहिथव, देवता मन अउ मैं तोर सेवा मं लगे रहिथन अउ सोथव त सालों सुते रहिथव | येखर ले संसार के बेवस्था गड़बड़ा जथे | सोय के समय तय करके नियम से सो जाय करव | महू ल विश्राम करे के समय मिलतिस |’ श्री नारायण हंस के किहिस – ‘ठीक हे, मोर जागे ले तुंहला तकलीफ होथे, त मैं ह बरसात मं चार महीना सो जाय करि हंव | तू मन ल सेवा से अवकाश मिल जही |’
ये विश्राम काल के लाभ बतावत लक्ष्मी से कहिन – ‘ मोर ये नींद अल्पकाल निद्रा कहलाही | ये समय जउन भी भक्त सोय के भावना करत आनंद पूर्वक मोर सेवा भक्ति करहीं, उंखर घर मैं तोर सहित निवास करहूं | मोर ये विश्राम काल भक्त मन बर बड़ मंगल करइया अउ पुन्य बढ़इया होही | ‘
तब ले असाढ़ शुक्ल एकादशी ले सोय श्री नारायण कातिक शुक्ल एकादशी के दिन जागथे | ये दिन ल उत्सव जइसे मनाय जाथे |
व्रत उपवास – ये दिन श्री विष्णु के लक्ष्मी सहित विधि विधान ले पूजा किये जाथे | ये दिन उपास रेहे के खास महत्व हे | माने जाथे के ये एकादशी के व्रत करे ले सबो एकादशी के व्रत के फल मिल जथे अउ सुख, समरिद्धि, वैभव पा लेथे, पाप घलो कट जथे |
तुलसी बिहाव — ये एकादशी ल तुलसी विवाह के रूप मं भी मनाय जाथे | ये दिन घर, मंदिर मं तुलसी अउ शालिग्राम के बिहाव रचाय जाथे अउ कामना किये जाथे के भविष्य मं होने वाला सब मंगल कार्य निर्विघन संपन्न होवय |
तुलसी के पौधा पर्यावरन अउ प्रकृति के अंग ये, हिस्सा ये, औषधीय गुन ले भरपूर होथे | एखर ले ये संदेश जाथे के तुलसी जइसे सब मं हरियाली अउ स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के प्रसार होवय | ये दिन तुलसी पौधा के दान भी किये जाथे |
श्री कृष्ण ल तुलसी बहुत प्रिय हे | अपन मस्तक मं धारन करथे | येखर पीछू श्री कृष्ण ,सत्यभामा, रुकमणी, नारद के कथा प्रसंग जुड़े हे |
ये दिन पूजा स्थान ल स्वच्छ कर भगवान के योग निद्रा ले जागे के स्वागत मं सजावट अउ पूजा के तैयारी करैं | विधि पूर्वक भोग पूजा आरती करैं | विश्राम काल के बाद श्री हरि सृष्टि के संचालन कार्य करहीं अउ सबके मंगल करहीं, इही खुशी मं रहंय, अपन मन मं शुभ विचार अउ देवत्व भाव जगावंय |
गन्ना के महत्व – तुलसी बिवाह बर गन्ना के सुंदर मंडवा सजावंय | ऋतु फल सहित भोग प्रसाद पूजा बिहाव के सबो सामान रखैं | तुलसी के बिरवा संग शालिग्राम के बिहाव करावैं | संतानहीन दंपत्ति ल जीवन मं एक बार जरूर ये कार्य करना चाही | एखर पुन्न फल ओमन ल जरूर मिलही | इही एकादशी के दिन ले मौसम मं परिवर्तन आय लगथे | लोगन मन गुड़ के सेवन करना शुरू कर देथें | गुड़ कुसियार (गन्ना) ले बनथे | एखरे सेती गन्ना के पूजा किये जाथे | तुलसी से भगवान विष्णु के बिहाव गन्ना के मंडप मं किये जाथे | इही दिन ले गन्ना के नवा फसल के कटाई करे जाथे |
इही दिन चौमासा समाप्त होथे | योग निद्रा ले श्री हरि विष्णु जागथे | सब शुभ कार्य शुरू शुरू हो जथे |

• लेखक संपर्क-
• 84355 52828
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