- Home
- Chhattisgarh
- ‘ बंगीय साहित्य संस्था ‘ के द्वारा आयोजित कॉफी विथ साहित्यिक विचार – विमर्श आड्डा : आज शामिल हुए – श्रीमती स्मृति दत्ता, प्रकाशचंद्र मण्डल, वासुदेव भट्टाचार्य, आलोक कुमार चंदा और प्रदीप भट्टाचार्य
‘ बंगीय साहित्य संस्था ‘ के द्वारा आयोजित कॉफी विथ साहित्यिक विचार – विमर्श आड्डा : आज शामिल हुए – श्रीमती स्मृति दत्ता, प्रकाशचंद्र मण्डल, वासुदेव भट्टाचार्य, आलोक कुमार चंदा और प्रदीप भट्टाचार्य

[ ‘ बंगीय साहित्य संस्था ‘ के सदस्य, बाएँ से – आलोक कुमार चंदा, प्रदीप भट्टाचार्य, प्रकाशचंद्र मण्डल, श्रीमती स्मृति दत्ता और पं. वासुदेव भट्टाचार्य ]
भिलाई निवास कॉफी हाउस [रपट, आलोक कुमार चंदा] :
बांग्ला साहित्य और संस्कृति को इस्पात नगरी भिलाई में विद्यमान रखने के लिए आज से 60 वर्ष पूर्व ‘ बंगीय साहित्य संस्था ‘ की स्थापना की गई थी.
संस्था के सक्रिय सदस्य प्रति शनिवार को कॉफी विथ साहित्यिक विचार – विमर्श आड्डा में एकत्रित होकर देश – विदेश में हो रहे सम- सामयिकी घटनाक्रम में अपनी बातों को साझा तो करते ही हैं, साथ में सभी सदस्य बांग्ला और हिंदी में कवितापाठ करते हैं.
▪️ आज जो शामिल हुए –
• श्रीमती स्मृति दत्ता
[उप सभापति ‘ बंगीय साहित्य संस्था ‘ एवं बांग्ला की चर्चित लेखिका]
• प्रकाशचंद्र मण्डल
[उपसचिव ‘ बंगीय साहित्य संस्था ‘ एवं बांग्ला – हिंदी के लोकप्रिय कवि व नाट्यकार]
• पं.वासुदेव भट्टाचार्य
[संस्था के सक्रिय सदस्य, कवि और ‘ हिंदू मिलन मंदिर ‘ के पुरोहित]
• आलोक कुमार चंदा
[संस्था के सक्रिय सदस्य, सामाजिक चिंतन व विचारक]
• प्रदीप भट्टाचार्य
[संपादक ‘ छत्तीसगढ़ आसपास ‘ एवं कवि व लेखक]

[ विचार – विमर्श और काव्य पाठ करते हुए ‘ बंगीय साहित्य संस्था ‘ के सक्रिय सदस्य ]
▪️ काव्यपाठ
इस सत्र के कार्यक्रम की अध्यक्षता स्मृति दत्ता ने की और संचालन प्रकाशचंद्र मण्डल ने किया.
• स्मृति दत्ता ने बांग्ला में एक लघु कथा ‘ 1942 ‘ और एक छोटी गंभीर कविता ‘ एंटी पोयम ‘ का पाठ किया.
• आलोक कुमार चंदा ने कवि विवेकानंद बोस रचित दो छोटी – छोटी बांग्ला कविता का पाठ किया. पहली कविता का शीर्षक था ‘ चाँद की बात ‘ और दूसरी ‘ स्वप्न ‘
• पं. वासुदेव भट्टाचार्य ने बांग्ला में लिखित दो छोटी लघुकथा को पढ़ा. शीर्षक था – ‘ भालोबासा ‘ और ‘ बिल्ली की आत्मा ‘
• प्रकाशचंद्र मण्डल बांग्ला में अति सुंदर रचना को पढ़ा. कविता का शीर्षक था – अपनी पत्नी को समर्पित कविता ‘ ओगो माधुरी ‘ और दूसरी प्रेम को रेखांकित कविता ‘ प्रेम अमरोंतो ‘
• प्रदीप भट्टाचार्य ने हमेशा की तरह, जिसके लिए जाने जाते हैं. छोटी किंतु सारगर्भित कविता को पढ़कर सुनाया. मुक्तक था –
‘ पगडंडियां ‘ और ‘ आरोप – प्र त्यारोपों ‘

आभार व्यक्त पं. वासुदेव भट्टाचार्य ने किया.
▪️▪️▪️▪️▪️▪️▪️▪️▪️▪️▪️▪️
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)