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‘बंगीय साहित्य संस्था’ द्वारा आयोजित साहित्यिक विचार – विमर्श आड्डा : काव्य पाठ : अंशुमन राय ‘ राजा ‘ के कृति ‘ दुस्साहस ‘ और दुलाल समाद्दार संपादित बांग्ला पत्रिका ‘ मध्य बलय ‘ भेंट

👉 [बाएँ से] अमियो चक्रवर्ती, आलोक कुमार चंदा, प्रदीप भट्टाचार्य, स्मृति दत्ता और दुलाल समाद्दार
भिलाई [छत्तीसगढ़ आसपास न्यूज़ : भिलाई निवास कॉफी हाउस : 16 दिसम्बर] : ‘ बंगीय साहित्य संस्था ‘ द्वारा प्रति शनिवार को आयोजित आज ‘ साहित्यिक विचार – विमर्श आड्डा ‘ में कोलकाता से भिलाई प्रवास में आये, बांग्ला सामाजिक चिंतक अमीयो चक्रवर्ती के सभापतित्व में ‘ बंगीय साहित्य संस्था ‘ की उप सभापति व बांग्ला की लेखिका श्रीमती स्मृति दत्ता, ‘ मध्यबलय ‘ के संपादक व बांग्ला कवि दुलाल समाद्दार, ‘ बंगीय साहित्य संस्था ‘ के उपसचिव व बांग्ला – हिंदी के कवि नाट्यकार प्रकाशचंद्र मण्डल, सामाजिक चिंतक रविंद्रनाथ देबनाथ, ‘ छत्तीसगढ़ आसपास ‘ के सलाहकार संपादक आलोक कुमार चंदा और ‘ छत्तीसगढ़ आसपास ‘ ग्रुप के ग्रुप एडिटर व कवि प्रदीप भट्टाचार्य उपस्थित हुए.

👉 अंशुमन राय लिखित ‘ दुस्साहस ‘ संग्रह प्रकाशचंद्र मण्डल को भेंट करते हुए प्रदीप भट्टाचार्य

👉 अमियो चक्रवर्ती को ‘ मध्य बलय’ बांग्ला लिटिल पत्रिका के संपादक दुलाल समाद्दार, प्रति भेंट करते हुए
▪️ काव्यपाठ –
स्मृति दत्ता ने रविंद्रनाथ लिखित ‘ शेषेर कविता ‘…
दुलाल समाद्दार ने बांग्ला में ‘ स्मार्ट फोन ‘/ऊर्जापोन/आमार जंत्रोणा लिपि और जादी साड़ा डाओ भालोबासा…
प्रकाशचंद्र मण्डल गज़ल ‘ अंधा प्यार करने वालों फालतू का हक जताया न करो.. ‘/गुमनाम ‘ वह कौन है, धर्म के नाम जेहाद करता है…’ और एक बांग्ला कविता ‘ विमुख होए आछे ‘…
प्रदीप भट्टाचार्य ने इतिहास पर छोटी – छोटी मुक्तक…
रविंद्रनाथ देबनाथ ने गुलजार की रचना ‘ ढुंढ ही लेते उनको हम शहर में…

👉 [बाएँ से] अमियो चक्रवर्ती, रविंद्रनाथ देबनाथ, आलोक कुमार चंदा, दुलाल समाद्दार, प्रदीप भट्टाचार्य, प्रकाशचंद्र मण्डल और स्मृति दत्ता
आज के बैठक का संचालन प्रकाशचंद्र मण्डल और आभार व्यक्त स्मृति दत्ता ने किया.
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