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विशेष : भगवान सूर्य के उत्तरायण होय म मनाय जाथे महा परब ‘ मकर संक्रांति ‘ – डॉ. नीलकंठ देवांगन

मकर संक्रांति के दिन ले अंधकार भरे रात कम अउ प्रकाश भरे दिन बढ़त जाथे | सूर्य के एक राशि ले दूसर राशि मं प्रवेश करना संक्रांति कहलाथे | ये शब्द संक्रमण से बने हे | एखर सीधा संबंध ग्रह मन के राजा सूर्य के संक्रमण से हे | येहा साल भर मं बारह राशि मं भ्रमन करथे | जब सूर्य धनु राशि ले मकर राशि मं प्रवेश करथे, तब मकर संक्रांति होथे | सबो संक्रांति के अपन ज्योतिषीय अउ धार्मिक महत्व हे फेर सबले महत्वपूर्ण मकर संक्रांति हे काबर के इही दिन ले उत्तरायन शुरू होथे |
मकर संक्रांति ले शुरू होथे देवता मन के दिन- उत्तरायन काल ल देवता मन के दिन माने जाथे अउ दक्षिणायन ल देवता मन के रात |मकर संक्रांति ल देवता मन के दिन के प्रभात काल माने गेहे | एखर सेती ये दिन सबेरे नहा के देवता मन ल फूल, अर्घ्य, धूप दिये जाथे | पौरानिक मान्यता हे के ये दिन के दिये गये दान पुन्न सौ गुना फलदायी होथे |
उत्तरायन -दक्षिणायन – अयन के अर्थ होथे-घर | सूर्य आकाश मं या तो उत्तर तरफ झुके रहिथे या दक्षिण तरफ | सूर्य के उत्तर तरफ झुके होना उत्तरायन कहलाथे अउ दक्षिण तरफ झुके होना दक्षिणायन | मकर से मिथुन तक छः राशि मं सूर्य उत्तरायन अउ कर्क से धनु तक छः राशि मं दक्षिणायन रहिथे |
उत्तरायन यानी देवता मन के दिन- येला आदान काल भी केहे जाथे काबर के ये समय सूर्य प्रकृति ले जल सोंखथे, लेथे | उत्तरायन काल मं छः राशि मं परिभ्रमन करत सूर्य के कांति बढ़त जथे |अच्छा काम करे के शुभ दिन प्रारंभ होथे | जनवरी से जून तक कांति चरम मं पहुंच जथे |
दक्षिणायन यानी देवता मन के रात- येला निसर्ग काल भी कहि थें काबर के सूर्य प्रकृति से लिये जल लौटा देथे | दक्षिणायन के छः महीना सूर्य के कांति घटत जथे | इही कारन चौमासा मं मंगल कार्य नइ होवय | हां, धरम के बढ़ोत्तरी बर जप, तप, व्रत, नियम, कथा पूजा विशेष माने जाथे | जाने अनजाने दोष के प्रायश्चित बर पुन्य के संचय किये जाथे |
मकर संक्रांति के बाद मृत्यु के कामना- उत्तरायन मं मृत्यु के आकांक्षा जानकार मन करथें | अग्नि, ज्योति अउ प्रकाश से भरे गति होथे , शुक्ल गति होथे | भीष्म पितामह अपन मृत्यु ल उत्तरायन आरंभ होय तक रोक ले रिहिसे | ओला इच्छामरनी के वरदान रिहिसे | उत्तरायन मं मृत्यु यानी तेजस्वी प्रकाशमय मृत्यु |
दक्षिणायन मं मृत्यु यानी कुहरा अउ अंधकार से भरे गति, कृष्ण गति | कुहरा जइसे काला अउ अंधकार जइसे डरावना जीवन आदमी ल निकृष्ट मृत्यु तक खींच के ले जथे |
ये दिन हमू मन ल संक्रमण करे के शुभ संकल्प लेना चाही | जिनगी मं भरे अज्ञान, संदेह, अंधश्रद्धा, जड़ता, कुसंस्कार अंधकार के सूचक हे | येला सही संपूरन ग्यान,श्रद्धा, चेतना,सोच, सुसंस्कार से दूर करे के, हटाय के प्रयास करना चाही | इही सच्ची संक्रांति होही |
वइसे मकर संक्रांति 14 जनवरी के मनाय जाय , फेर कभू कभू अधिक मास या मल मास होय ले संक्रांति के समय 24 से 36 घंटा बढ़ जथे तब मकर संक्रांति के तिहार 15 जनवरी के मनाय जाथे |
संक्रांति मतलब सम्यक क्रांति- प्रकाश के अंधकार पर विजय | क्रांति मं केवल परिस्थिति परिवर्तन के आकांक्षा होथे , हिंसा के भाव जागथे | संक्रांति मं समझदारी प्रधान होथे,अहिंसा के भाव होथे | दिमाग मं भरे विचार ल बदलना हे |
पुन्य कमाय के अउ स्वास्थ्य लाभ ले के दिन – केहे गेहे के जवुन संक्रांति के दिन नइ नहावै, वोहा सात जनम तक निर्धन अउ रोगी रहिथे अउ जवुन ह संक्रांति नहा लेथे, वोहा तेजस्वी अउ पुण्यात्मा बन जथे | ये दिन उबटन लगावंय जेमा करिया तिली के उपयोग होय | सूर्य के धूप में खाद्य पदार्थ जइसे घी, तेल आदि दू चार घंटा रखे रेहे होंय, अधिक सुपाच्य होथें | धूप मं रखे पानी ले कभू कभू नहा ले करंय, एखर ले सूखा रोग नइ होवय , रोग नाशिनी शक्ति बरकरार रहिथे |
सूर्य को भी करिया तिली मिले जल से अर्घ्य देवंय | काला तिल के दान करंय, पाप नाश होथे | तिल के हवन से पुन्य होथे, तिल के भोजन आरोग्य देथे | तिल डाल के पानी पियंय, स्वास्थ्य लाभ होथे |
ये दिन सूर्योदय से पहिली नहाना चाही , दान पुन्य करना चाही | | ये दिन के पुन्य कर्म अक्षय पुन्य फलदाई होथे | तिल अउ गुड़ के व्यंजन, चांवल अउ चना दाल के खिचड़ी ऋतु परिवर्तन के समय होवइया रोग ले बचाथे |
ये दिन ले पतंग उड़ाय जाथे | हमन अपन जिनगी रूपी पतंग ल स्नेह के डोरी ले ढिल्ला छोड़ के अतका ऊंचाई मं पहुंचा देवन के परमात्मा के छोड़ कोनो दूसर छू झन सकय |

▪️ डॉ.नीलकंठ देवांगन
▪️ संपर्क- 84355 52828
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