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गणतंत्र दिवस विशेष : गीता जुन्जानी
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आओ मनाएं जश्न-ए गणतंत्र दिवस

हर साल आता है 26 जनवरी का दिन
और मनाते हैं हम सब गणतंत्र दिवस
पीकर आज़ादी का अमृत रस
हमने रचा अपना संविधान
जो लागू हुआ इस दिन
बना भारत माता की मुस्कान
तो आओ मनाएँ जश्न-ए ‘गणतंत्र दिवस’।
शुरू हुई नई संघर्ष की बेला
जब कुछ लोगों ने अधिकारों को समझा
कर्त्तव्यों से ऊँचा!
कब हुई है बिना कर्त्तव्यों के पालन के
अधिकारों का वरण!
कर लें इस बार कुछ आत्मसात
तो आओ मनाएँ जश्न-ए ‘गणतंत्र दिवस’।
करें संविधान का सम्मान
आदर करें इसके प्रावधान
पाया है हमने खिताब
विश्व के सबसे बड़े संविधान का
मिलकर करें पालन, अक्षराक्षर इसके प्रावधान का।
तो आओ मनाएँ जश्न-ए ‘गणतंत्र दिवस’ ।
इससे पहले करें बुराई
फैलते हुए भ्रष्टाचार और गंदगी का
मिलकर बीड़ा उठाएँ
हम हरियाली और सफाई का
क्योंकि अधिकारों और कर्त्तव्यों में,
कर्तव्य पालन है सबसे ऊँचा
तो आओ मनाएँ जश्न-ए ‘गणतंत्र दिवस’ ।
गुलामी की बेड़ियों को काटकर
हजारों के खून बहाकर।
सैकड़ों के कारावास का दुख
करोड़ों की भूख और प्यास का दर्द
सहकर पायी हमने अपनी स्वतंत्रता।
न कर अवज्ञा संविधान का
न हो जाएँ फिर परतंत्र तो आओ मनाएँ जश्न-ए गणतंत्र दिवस।
[ कवियत्री गीता जुन्जानी दिल्ली पब्लिक स्कूल भिलाई में जूनियर विंग की प्रधानाध्यापिका हैं. ]
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