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‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में 14 फरवरी को सरस्वती जयंती एवं बसंत पंचमी पर्व का आयोजन सम्पन्न : प्रथम सत्र में ‘गागर में सागर’ पुस्तक पर समीक्षा संगोष्ठी और दूसरे सत्र में ऋतुराज बसंत पर काव्य गोष्ठी…

👉 [बाएँ से] एन एल मौर्य ‘ प्रीतम’, शुचि ‘भवि’, डॉ. नलिनी श्रीवास्तव, डॉ. महेशचंद्र शर्मा, डॉ. परदेशीराम वर्मा, डॉ. प्रदीप वर्मा, प्रदीप भट्टाचार्य और प्रकाशचंद्र मण्डल.
भिलाई [छत्तीसगढ़ आसपास न्यूज़ : रपट, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’] :
‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में 14 फरवरी को ‘ इंदिरा गाँधी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय’ रामनगर सुपेला के सभागार में सरस्वती जयंती और बसंत पंचमी पर्व का आयोजन दो सत्रों में किया.

👉 अतिथियों का सम्मान और अभिनंदन करते हुए एन एल मौर्य ‘प्रीतम’
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प्रथम सत्र-
प्रथम सत्र में संस्कृति मर्मज्ञ एवं नाट्यकला विशेषज्ञ आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा की आठवीं पुस्तक गागर में सागर पर समीक्षा संगोष्ठी थी.
इस सत्र के मुख्यअतिथि कथाकार डॉ. परदेशीराम वर्मा और अध्यक्षता ‘वीणापाणी साहित्य समिति’ के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप वर्मा थे. विशेष अतिथि बांग्ला व हिंदी के कवि,नाट्यकार प्रकाशचंद्र मण्डल थे. आलेख पाठ कथाकार डॉ. नलिनी श्रीवास्तव और डॉ. राजेंद्र पाटकर ‘स्नेहिल’ थे.
प्रारंभ में ‘साहित्य सृजन परिषद्’ के अध्यक्ष एन. एल. मौर्य ‘प्रीतम’ ने स्वागत भाषण देते हुए समस्त अतिथियों और उपस्थित गणमान्य लोगों का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया और कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए संस्था द्वारा निरंतर किये जा रहे साहित्यिक आयोजन के बारे बताया.
बसंत पंचमी एवं सरस्वती जयंती पर्व के पुनीत दिवस पर आयोजित समारोह में देवी सरस्वती की पूजा अर्चना और सरस्वती वंदना सस्वर मो. हुसैन मजाहीर ने किया.
• ‘जनवादी लेखक संघ’ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. परदेशीराम वर्मा ने कहा-

👉 डॉ. परदेशीराम वर्मा उद्बोधन देते हुए…
‘पुस्तकों पर कम चर्चाओं के इस दौर में डॉ. महेशचंद्र शर्मा की आठवीं पुस्तक ‘गागर में सागर’ पर समीक्षा संगोष्ठी विशेष प्रसंग है. वास्तव में इसके पीछे लेखक का कृतित्व और व्यक्तित्व है. डॉ. शर्मा संस्कृत और संस्कृति के महत्वपूर्ण चिंतक हैं. उनका पूरा जीवन साहित्य, संस्कृति, शिक्षा और लेखन को समर्पित है.
उनके अनुभव का निचोड़ उनके लेखन में सहज ही उपलब्ध है. लेखन जैसे बड़े काम के लिए बड़े से बड़ा और छोटे से छोटा होना पड़ता है. आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा में भी ये गुण है.
• डॉ. प्रदीप वर्मा ने कहा-
‘गागर में सागर’ पुस्तक नीतिपरक और मार्गदर्शी ललित निबंधों से सम्पन्न है. पुराने गहन चिंतक परक सूत्रों में वर्तमान त्रासदियों को सुलझाने की क्षमता है. पुस्तक में कोरे उपदेश नहीं, अपितु सात्विक जीवन जीने की कला है. गहन चिंतक परक आलेखों में प्रामाणिक और वैज्ञानिक तथ्यों का सम्प्रेषण है.
• डॉ. नलिनी श्रीवास्तव ने अपने समीक्षात्मक आलेख में बताया कि-
‘शब्द शास्त्री डॉ. महेशचंद्र शर्मा की यह अनमोल कृति है. आचार्य डॉ. शर्मा मुर्धन्य विद्वान और बौद्धिक जगत् के सशक्त हस्ताक्षर हैं. अपनी इस अनुपम कृति में उन्होंने 108 निबंधों में युवाओं का सन्मार्गदर्शन किया है. उनके लिए ये ज्योतिर्मय स्तम्भ है. महाकवि बिहारी से प्रेरणा लेकर कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक अर्थ व्यक्त करने में सफल हुए हैं डॉ. महेशचंद्र शर्मा’.
बेरला के वरिष्ठ कवि व शिक्षाविद् डॉ. राजेंद्र पाटकर ‘स्नेहिल’ के आलेख का वाचन सुशिक्षका एवं सुकवयित्री शुचि ‘भवि’ ने किया. ‘ आलेख में बताया गया कि मनीषी रचनाकार डॉ. महेशचंद्र शर्मा की इस पुस्तक ‘गागर में सागर’ पाठकों के लिए मार्गदर्शी होगा. यह आनंद, उत्साह और आशा का अक्षय स्रोत भी है.
कवि प्रकाशचंद्र मण्डल और कवि त्रिलोकीनाथ कुशवाहा ‘ अंजन’ ने कहा कि- ‘गागर में सागर किताब वास्तव में एक गोताखोर द्वारा प्राप्त 108 मोतियों की मणिमाला है.’

लेखकीय संबोधन में डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने पुस्तक लेखन में गुरुजनों के शुभाशीष, परिवार के सहयोग और पाठकों की प्रेरणा आदि मुख्य कारणों का उल्लेख किया.
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द्वितीय सत्र-
इस सत्र में काव्य गोष्ठी थी. मुख्य अतिथि थे ‘इस्पात हिंदी साहित्य समिति’ के अध्यक्ष, कवि व अधिवक्ता तुंगभद्र सिंह राठौड़ और अध्यक्षता की ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक, कवि एवं मीडियाविद् प्रदीप भट्टाचार्य.
शुचि ‘भवि’ के कुशल संचालन में इन रचनाकारों ने कविता पाठ किया-
प्रकाशचंद्र मण्डल, डॉ. संजय दानी, डॉ. बीना सिंह ‘रागी’, ओमवीर करन, हाजी रियाज खान गोहर, शायर मुमताज, सुरेश कुमार बंछोर, बैकुंड महानंद, यशवंत सूर्यवंशी ‘यश’, विजय कुमार, डॉ. नीलकंठ देवांगन, राज कुमार चौधरी, मो. हुसैन मजाहीर, प्रदीप पाण्डेय, त्रिलोकीनाथ कुशवाहा ‘अंजन’, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, एन एल मौर्य ‘प्रीतम’, शुचि ‘भवि’ और कुमारी शरन्या गुप्ता.

👉 कविता पाठ करती हुई कु. शारन्या गुप्ता…
•प्रदीप भट्टाचार्य ने अध्यक्षता करते हुए अपनी बात कुछ यूँ रखी-
‘बहुत अधिक कविता लिखने की आवश्यकता नहीं, कम लिखें पर अच्छा लिखें. आपकी कविता को आम पाठक समझ सके, वैसी ही कविता लिखनी चाहिए. उन्होंने कविता को तीन भागों में विभाजित कर बताया कि मंचीय कविता, गोष्ठी कविता और संग्रह कविता का स्वरूप कैसा होता है.’

👉 अध्यक्षता करते हुए प्रदीप भट्टाचार्य…
इस अवसर पर डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने अपनी कृति ‘गागर में सागर’ और प्रकाशचंद्र मण्डल ने ‘शब्दों की खोज में’ हिंदी काव्य संग्रह की प्रति अतिथियों को भेंट की.

👉 डॉ.महेशचंद्र शर्मा अपनी कृति शुचि ‘भवि’ को भेंट स्वरूप प्रदान करते हुए…

👉 प्रकाशचंद्र मण्डल अपनी कृति डॉ. महेशचंद्र शर्मा को भेंट करते हुए…

👉 प्रकाशचंद्र मण्डल अपनी कृति एन एल मौर्य ‘प्रीतम’ को भेंट करते हुए…
दोनों सत्रों का कुशल संचालन शुचि ‘भवि’ और आभार व्यक्त एन एल मौर्य ‘प्रीतम’ ने किया.

👉 उपस्थित रचनाकार
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