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परमपूज्य देव लोकगामी आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज को समर्पित विनम्र श्रद्धांजलि गीत 🕉
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गीत
– डॉ. शिवसेन जैन

हूँ निशव्द मैं किन शव्दों में, श्रद्धा
सुमन चढा़ऊँ ।
छंद बद्ध कर किन गीतों में,तेरे गुण
को गाऊँ ।।
तेरा शव्द शव्द जिनवाणी
की गाथा दोहराता ।
तेरे रत्नात्रय पालन से
जीवन खुशबू पाता ।
दिखा गये जो पथ अविनाशी, उस को
भूल न जाऊँ ।
हूँ निशव्द मैं किन शव्दों में ,श्रद्धा
सुमन चढ़ाऊँ ।।
गागर में सागर जैसा था
. गुरु व्यक्तित्व तुम्हारा ।
विस्मृत होती जिन संस्कृति को
तुम से मिला सहारा ।
तेरे ज्ञानामृत को पी कर,मन के दीप
जलाऊँ ।
हूँ निशव्द मैं किन शव्दों में ,श्रद्धा
सुमन चढ़ाऊँ ।।
जब तक जग में चंदा सूरज
नील गगन में तारे ।
सारी धरती याद रखेगी
वो जो गीत तुम्हारे ।
तेरे पथ चिन्हों पर चल कर,नव इतिहास बनाऊँ ।
हूँ निशव्द मै किन शव्दों में ,श्रद्धा
सुमन चढ़ाऊँ ।।
तेरी स्मृतियां जन जन को
नया उजाला देंगी ।
आशाओं का सम्बल देकर
बाधायें हर लेंगी ।
तेरे जीवन की गाथायें , प्रतिपल मैं
दोहराऊँ ।
हूँ निशव्द मैं किन शव्दों में.श्रद्धा
सुमन चढ़ाऊँ ।।
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[ •डॉ. शिवसेन जैन सेवानिवृत आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी हैं. •कवि व लेखक हैं. •निवास- गुड शेफर्ड कान्वेंट स्कूल के पास, पांडव नगर, शहडोल, मध्यप्रदेश. •संपर्क- 94258 11835 ]
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