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आज अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा के अवसर पर ‘बंगीय साहित्य संस्था’ ने आयोजित किया बांग्ला भाषा पर संगोष्ठी और काव्यपाठ…

👉 [ बाएँ से ] सुमीता प्रकाशचंद्र मण्डल, स्मृति दत्ता, गोविंद पाल, बृजेश कुमार मल्लिक, प्रदीप भट्टाचार्य, प्रकाशचंद्र मण्डल, रविंद्रनाथ देबनाथ और दुलाल समाद्दार.
भिलाई [छत्तीसगढ़ आसपास न्यूज़] : आज 21 फरवरी ‘ अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा’ दिवस है. इस अवसर पर ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में बांग्ला भाषा पर विचार विमर्श और काव्य पाठ का आयोजन ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सह सचिव प्रकाशचंद्र मण्डल के निवास सेक्टर- 4 में रखी गई थी.
मुख्यअतिथि कवि बृजेश कुमार मल्लिक थे और अध्यक्षता बांग्ला के राष्ट्रीय कवि गोविंद पाल थे. विशिष्ट अतिथि ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति व बांग्ला की लेखिका स्मृति दत्ता थीं.

👉 मुख्यअतिथि बृजेश कुमार मल्लिक का स्वागत करते हुए दुलाल समाद्दार.
साथ में उपस्थित थे-
बांग्ला लिटिल पत्रिका ‘मध्य बलय’ के संपादक, कवि दुलाल समाद्दार, सामाजिक चिंतक रविंद्र रविंद्रनाथ देबनाथ, गोविंद बर्मन, समाजसेवी सुबीर राय, ‘ छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक प्रदीप भट्टाचार्य और श्रीमती सुमीता मण्डल.
प्रारंभ में बांग्ला भाषा आंदोलन में शहीद हुए शहीदों को दो मिनट मौन रखकर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई.
21 फरवरी 1952 को बांग्ला भाषा की शुरूआत हुई. इस संदर्भ में वयोवृद्ध कवयित्री स्मृति दत्ता ने विस्तार से अपनी बात को रखी…

👉 अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा पर उद्बोधन देते हुए श्रीमती स्मृति दत्ता…
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काव्य पाठ –
• दुलाल समाद्दार – 21,फरवरी के संदर्भ में कुछ कविता/माटीर मानुष/बाबा र ओ मेये…
• स्मृति दत्ता- आमा देर बांग्ला भाषा…
• गोविंद पाल- बांग्ला आमा देर बांग्ला/21,फरवरी आमी कि भूलते पारी… /ढाका तिके हुए फ रमान… /भाग्य विधाता/माँ शीर्षक पर कविता, रिश्तों का पर्याय है माँ/एक हास्य कविता, कलयुगी रावण…
👉 कविता पाठ करते हुए दुलाल समाद्दार
• प्रकाशचंद्र मण्डल- भाषा र गर्व…/तुमी दारा ओ.. पथिक तुमी/माँ को समर्पित एक मातृत्व कविता/श्रद्धा सुमन…
• प्रदीप भट्टाचार्य- हिंदी में लिखित ‘दम्भ’ कविता का बांग्ला अनुवाद गोविंद पाल ने किया. यह कविता बांग्ला की राष्ट्रीय पत्रिका ‘ मध्यबलय’ के अंक-55 में प्रकाशित हुई है. इसका पाठ प्रकाशचंद्र मण्डल ने किया.
अंत में-
बृजेश कुमार मल्लिक- ने मुख्य आथिथ्य उद्बोधन और कविता का पाठ किया. बांग्ला और हिंदी में कुछ कविता पढ़ने के बाद उन्होंने आयोजन की सार्थकता पर प्रकाश डाला और कहा, ऐसे साहित्यिक गोष्ठी प्रति माह होना चाहिए.
👉 कविता पाठ करते हुए बृजेश कुमार मल्लिक
आज के दोनों सत्रों का कुशल संचालन प्रकाशचंद्र मण्डल और आभार व्यक्त प्रकाश जी की सरल सौम्य धर्मपत्नी सुमीता मण्डल ने किया.
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