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- ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार- विमर्श आड्डा’ में इस सप्ताह शामिल हुए : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्य – श्रीमती स्मृति दत्ता, दुलाल समाद्दार, प्रकाशचंद्र मण्डल, रविंद्रनाथ देबनाथ, आलोक कुमार चंदा और प्रदीप भट्टाचार्य…
‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार- विमर्श आड्डा’ में इस सप्ताह शामिल हुए : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्य – श्रीमती स्मृति दत्ता, दुलाल समाद्दार, प्रकाशचंद्र मण्डल, रविंद्रनाथ देबनाथ, आलोक कुमार चंदा और प्रदीप भट्टाचार्य…

👉 [बाएँ से] स्मृति दत्ता, प्रदीप भट्टाचार्य,प्रकाशचंद्र मण्डल, आलोक कुमार चंदा, दुलाल समाद्दार और रविंद्रनाथ देबनाथ
भिलाई [ ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ इंडियन कॉफी हाउस भिलाई निवास से… ] :
बांग्ला की 62 वर्ष पुरानी संस्था ‘ बंगीय साहित्य संस्था’ साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था है. वर्ष भर इस संस्था के माध्यम से कई साहित्यिक आयोजन किए जाते हैं, जिसमें कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा भी है. जिसमें प्रति सप्ताह ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सक्रिय सदस्य देशकाल में हो रहे घटनाक्रम पर चर्चा के साथ अपनी-अपनी एक प्रतिनिधि रचना का पाठ करते हैं.

👉 [बाएँ से] रविंद्रनाथ देबनाथ,प्रकाशचंद्र मण्डल, दुलाल समाद्दार, प्रदीप भट्टाचार्य, स्मृति दत्ता और आलोक कुमार चंदा
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आज के आड्डा की अध्यक्षता ‘ बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति एवं देश की चर्चित वयोवृद्ध लेखिका श्रीमती स्मृति दत्ता ने की और संचालन ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सह सचिव एवं बांग्ला-हिंदी के कवि, नाट्यकार प्रकाशचंद्र मण्डल ने किया.
प्रारंभ में ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में 7 अप्रैल को होने जा रहे अनुष्ठान पर चर्चा करते हुए स्मृति दत्ता ने कहा-
इस आयोजन में कोलकाता से पधार रहे हैं ‘आज केर जोधव’ के संपादक वासुदेव मंडल और चित्रशिल्पी बिजन बिश्वास.
इस साहित्यिक आयोजन में स्मृति दत्ता के संग्रह त्रिहारा का विमोचन और गीत-संगीत एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे.
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दूसरे सत्र में बांग्ला कविता पाठ हुआ…
• प्रकाशचंद्र मण्डल ने ‘अनंत जीवन’ और ‘सुंदर समाज’ शीर्षक से कविता का पाठ किया.
👉 कवि प्रकाशचंद्र मण्डल कविता पाठ करते हुए…
• स्मृति दत्ता ने ‘देश’ पत्रिका में प्रकाशित तुषार भट्टाचार्य और शांतुनु पात्रों की कविता क्रमश: तनुजा तुमी वैष्णवी… और एक तारा विषयक… कविता को पढ़ कर सुनाया.
• दुलाल समाद्दार ने बंधु रे… और से चोले गेलो… कविता को पढ़ा.
• आलोक कुमार चंदा ने ‘डाक दिए छो…’ कविता का पाठ किया.

अंत में आभार व्यक्त बांग्ला चिंतक रविंद्रनाथ देबनाथ ने किया.
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