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आबकारी विभाग में फिर से वही खेला…

1 year ago
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रायपुर। राज्य को सबसे अधिक राजस्व देने वाले महकमे आबकारी में यदि सिंडीकेट बनाकर खेल न हो तो शायद ही कोई फाइनेंसियल ईयर गुजरे। इस विभाग की कारगुजारी पिछली सरकार में जिस प्रकार से चर्चित हुई थी और उसमें कुछ चंद लोगों के हाथों में ही पूरा कामकाज संचालित होता रहा। लेकिन सरकार बदलने के बाद माना जा रहा था कि अब उनका बोरिया बिस्तर बंध जायेगा और काम में भी पारदर्शिता आयेगी, लेकिन नहीं चोलाधारी लोग फिर से घुस गए हैं और अपना काम निकाल जा रहे हैं। इसके लिए बताया जा रहा है कि सत्ताधारी दल के कुछ लोग भी अपने फायदे के लिए जुड़ गए हैं। ताजा तरीन मामले मे 10 एफ एन लाइसेंस जारी हुए है जिसके तरह रजिस्टर्ड कंपनियों के ब्रांड साल भर बेंचने की छूट रहेगी। यहां भी चोलाधारी लोगों ने लाइसेंस हथिया लिए हैं। पूरे खेल में कहीं न कहीं विभागीय अधिकारी भी मिले हुए है। बात निकल कर बाहर आ गई और ऊपर तक पहुंची तो काफी नाराजगी सामने आई है। इसलिए कि सरकार आने के समय ही स्पष्ट कर दिया गया था कि आबकारी विभाग के पूरे काम में पारदर्शिता व नियमों का पालन होना चाहिए यदि नहीं हुआ और संलिप्तता पाई गई ,चाहे जिसकी भी हो कड़ी कार्रवाई होगी। पार्टी ने रीति नीति पूरी से स्पष्ट है। बताया जा रहा है कि सत्ता व संगठन से जुड़े बड़े नेताओं को जब जानकारी मिली तो काफी नाराज हुए,संभवत: मुख्यमंत्री तक भी बात पहुंचायी जा रही है, तब संलिप्त लोगों पर गाज गिरना तय है। हालांकि अभी नए साल के लिए शराब नीति बनी नहीं है।

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