- Home
- Chhattisgarh
- भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा आयोजित बहुभाषी नाट्य स्पर्धा में 14 मार्च को ‘सत्य नाट्य संस्था’ की प्रस्तुति नाटक ‘बहुरूपिया’ : आप सादर आमंत्रित हैं…
भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा आयोजित बहुभाषी नाट्य स्पर्धा में 14 मार्च को ‘सत्य नाट्य संस्था’ की प्रस्तुति नाटक ‘बहुरूपिया’ : आप सादर आमंत्रित हैं…

भिलाई [छत्तीसगढ़ आसपास न्यूज़] : सत्य नाट्य संस्था की प्रस्तुति बहुरूपिया नाटक आज के सामाजिक संरचना पर एक कटाक्ष है. इस नाटक में एक गरीब परिवार के जीवन यापन में आने वाली परेशानियों को प्रदर्शित किया गया है. इस नाटक का मुख्य पात्र रामधनी बहरूपिया नामक एक कला जो कि पूर्वी राजस्थान एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विभिन्न उत्सवों और त्योहारों के मौके पर की जाने वाली एक पुरानी पारंपरिक कला है उसके द्वारा अपना जीवन यापन करता है. इस कहानी का कथानक एक परिवार के इर्द-गिर्द घूमता है
यह परिवार एक गरीब ब्राह्मण परिवार है जिसके मुखिया दशरथ पांडे गांव में पूजा पाठ का काम करते हैं रामधनी जो उनका बेटा है वह बहरूपिया का कार्य करता है और उनकी मां कौशल्या वह एक ग्रहणी है. शुरुआत में रामधनी के विवाह के विषय में दिखाया गया है रामधनी का विवाह जानकी नाम की एक लड़की से होता है जो बच्चे को जन्म देते समय में मृत्यु को प्राप्त होती है इसके पश्चात उसके दादा-दादी एवं रामधनी मिलकर उस बच्ची को बड़ा करते हैं लेकिन गांव वाले लोग इस बच्ची को एक श्रापित कन्या मानते हैं और उसे भगवान की बलि चढ़ाने के लिए परिवार वालों को मजबूर करते हैं. लेकिन रामधनी का परिवार उस लड़की का पालन पोषण करता है उसे अच्छे से पढ़ाते लिखते हैं और बाद में कुछ समय के बाद वह पढ़ाई में काफी अच्छी हो जाती है साथ ही साथ वह बैडमिंटन की राज्य स्तरीय की खिलाड़ी भी बन जाती है. इसी बीच एक ऐसी घटना घटती है जिसमें अकादमी में उस लड़की के साथ अनाचार होता है और उसके पश्चात उस लड़की और उसके परिवार यानी रामधनी के परिवार के द्वारा विभिन्न प्रकार की यातनाएं जो वह झेल रहे हैं और समाज के अंदर कैसी परिकथा बनती है एक बलात्कार होने वाली लड़की के परिवार के साथ इस चीज को पूर्णता बहुत मार्मिक रूप में विषयांत्रित दिखाया गया है गांव का सरपंच और गांव का ही एक और नेता लखनलाल किस तरह से अपने मतलब की रोटी सेकने के लिए इस परिवार का उपयोग करने का प्रयास करते हैं और किस तरह से वह लड़की अपने ऊपर हुए अनाचार से परेशान होकर अपनी जीवन दान दे देती है और उसके पश्चात उसे परिवार के साथ क्या होता है किन-किन परेशानियों से परिवार गुजरता है इन सारी चीजों का ताना-बाना बनता नाटक है बहरूपिया. बहरूपिया में रामधनी के मुख्य पात्र के रूप में श्रीकांत तिवारी ने अपनी कला के द्वारा रामधनी के जीवन को प्रस्तुत किया है. पिता दशरथ के रूप में देवेंद्र घोष एवं माता कौशल्या के रूप में नेहा दिवाले ने अपनी कला का परिचय दिया है. सरपंच के रूप में और लखन लाल के रूप में संदीप मल्लिक और अनुराग माहुलकर ने एक भयानक दिल दहलाने वाली प्रस्तुति दी है. राजकुमारी के रूप में अद्विका तिवारी और हेयांश ने एक मासूम सी प्रस्तुति दी है.
🟥🟥🟥🟥🟥🟥
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)