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कवि और कविता : पल्लव चटर्जी [ भिलाई : छत्तीसगढ़ ]

▪️ पल्लव चटर्जी
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संघर्ष

संघर्ष से आँख मिलाकर कहता हूं –
हांँ, मैं तैयार हूं, तुम से मुका़बला करने के लिए-
आगे बढ़ना है जो मुझे
बिना घबराये और
बगैर किसी फरेबी चाल को अपनाये….
अगर हार गया तो और भी
जिम्मेदारी व दक्षता के साथ
कोशिश करूंगा जीतने की।
दर्शक दीर्घा में बैठकर सुस्ताने-ताली बजाने के बदले
खुलकर जीना चाहता हूं मैं।
जीवन की पटकथा में असफलता
का उल्लेख भी जरूरी है
क्योंकि सफलता की कुँजी भी
वहीं कहीं रखी होती है।
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शिक्षा का मुल्यांकन

नया शैक्षणिक सत्र
शुरू होने जा रहा है
मगर गतिविधियों में
कोई बदलाव नहीं।
पाठ्यक्रम व पुस्तकें पुराने सत्र जैसा ही रहेगा
शिक्षा का मूल्याँकन जल्दबाजी में करना – उचित नहीं
और शिक्षा नीति में बदलाव करना भी सम्प्रति संभव नहीं।
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बहस

हाईकोर्ट में बहस चल रहा था
बहस का मुद्दा उठाया विरोधी पक्ष ने
“प्रदूषित हो रहा है देश
आबादी दूषित सांस लें रही “-
फिर भी ,
सत्ता पक्ष चुनावी हवन का आयोजन
किये जा रहे हैं।
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• संपर्क-
• 81093 03936
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chhattisgarhaaspaas
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