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विमोचन : बाल साहित्यकार बलदाऊ राम साहू के सद्य प्रकाशित बाल काव्य संग्रह ‘सूरज कहाँ लुका गेस’ का विमोचन

छत्तीसगढ़ आसपास न्यूज़ : वरिष्ठ बाल साहित्यकार बलदाऊ राम साहू के सद्य प्रकाशित छत्तीसगढ़ी बाल काव्य संग्रह ‘सूरुज कहाँ लुका गेस’ का विमोचन बाल पाठक अथर्व, आराध्य और यश के द्वारा किया गया। इस पुस्तक में कुल 73 रचनाएँ सम्मलित हैं। पुस्तक दिव्यम् प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित हुई है। कार्यक्रम में जेष्ठ्य नागरिक संघ दुर्ग के पूर्व अध्यक्ष व पूर्व प्राध्यापक ललित साव, पूर्व प्राध्यापक जी आर साहू, ईं.आर एन साहू , ई- एस आर श्रवण , एम आर सोनकलिहारी, ईश्वर लाल साहू, श्याम लाल साहू, के के साव , सोहन लाल साहू,ईं- एल आर साहू सहित वरिष्ठ जन उपस्थित थे। इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए प्रोफेसर ललित साव ने कहा कि बाल साहित्य लेखन साहित्य की सबसे कठिन विधा है।बाल साहित्य लेखन अर्थात बाल मन में उतरना है। जब तक रचनाकार बाल मन को नहीं समझेगा, बाल साहित्य लेखन संभव नहीं है। ‘सूरुज कहाँ लुका गेस’ शीर्षक अपने आप में गहन भाव बोध उत्पन्न करता है। इसमें संकलित रचनाएं सहज, सरल और बाल मन को गुदगुदाने वालीं हैं। इस संकलन में समता, सद्भाव, देश प्रेम, प्रकृति प्रेम, भाईचारा, मानवीय मूल्य जैसे अनेक विषय हैं जो बच्चों के
चरित्र निर्माण में सहायक हैं।
प्रोफेसर जी आर साहू ने कहा कि बलदाऊ राम साहू साहित्य जगत में एक चर्चित नाम है। उनकी रचनाओं में भावों की प्रधानता, गेयता है जो रस उत्पति में सहायक होने के साथ-साथ प्रकृति को समझने व जानने का अवसर भी है। वे जब कहते हैं –
जात-पात ल छोड़के हमला, राष्ट्र धरम अपनाना परही।
जन-गण-मन, राष्ट्र वंदना जुरमिल हमला गाना परही। तब वे राष्ट्र प्रेम का बोध कराते हैं और जब वे कहते हैं-
आओ भइया पेड़ लगाबो
ये धरती के मान बढ़ाबो। तब वे पर्यावरण संरक्षण के लिए चिंतन करते हुए दिखते हैं।
यह पुस्तक इसी तरह की अनेक नवीन संकल्पनाओं पर आधारित है। मैं इसके प्रकाशन के लिए बलदाऊ जी को बधाई देता हूँ।

▪️ बलदाऊ राम साहू
आभार व्यक्त डॉ. आशीष साहू ने किया.
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