- Home
- Chhattisgarh
- ‘संकेत साहित्य समिति’ : वासंती काव्य गोष्ठी सम्पन्न
‘संकेत साहित्य समिति’ : वासंती काव्य गोष्ठी सम्पन्न

👉 मंचासीन अतिथि
छत्तीसगढ़ आसपास न्यूज़ : संकेत साहित्य समिति द्वारा वृंदावन हॉल रायपुर में दिनांक 6 अप्रैल को भाषाविद् ,संगीतज्ञ एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ चितरंजन कर के मुख्य आतिथ्य, वरिष्ठ व्यंग्यकार गिरिश पंकज की अध्यक्षता एवं रामेश्वर शर्मा ,सुरेंद्र रावल ,लतिका भावे तथा संजीव ठाकुर के विशिष्ट अतिथ्य में वासंती काव्य गोष्ठी का वृहद आयोजन कवयित्री पूर्वा श्रीवास्तव के संयोजन और कुशल संचालन में संपन्न हुआ। माँ सरस्वती की पूजा – वंदना के पश्चात अतिथियों का सम्मान मोतियों की माला , पुस्तक एवं गुलाब के पौधे लगे गमले भेंट करके किया गया।समिति की उपसचिव पल्लवी झा ने स्वागत उद्बोधन में संकेत साहित्य समिति की स्थापना एवं गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए संस्थापक एवं प्रांतीय अध्यक्ष डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ के अभिनव प्रयास को ख़ूबसूरती से रेखांकित किया।
▪️ साहित्य मनोरंजन नहीं संस्कार होता है- डॉ. चितरंजन कर

👉 डॉ. चितरंजन कर
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि की आसंदी बोलते हुए डॉ.चितरंजन ने कहा कि साहित्य मनोरंजन नहीं संस्कार होता है , सदैव सामंजस्य स्थापित करता है। समाज को जोड़ता है ,तोड़ता नहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रख्यात व्यंग्यकार गिरिश पंकज ने मौजूदा साहित्यिक परिवेश को रेखांकित करते हुए कहा कि संकेत शब्द कई अर्थों में साहित्य को परिभाषित करता है। संकेत के माध्यम से प्रतीक और बिंब के द्वारा कविता में भावनाओं को अभिव्यक्त किया जाता है । सपाट बयानबाज़ी को कविता नहीं कहते।
▪️ काव्य गोष्ठी-
राजधानी रायपुर एवं प्रदेश के विभिन्न स्थानों से आए 40 से अधिक रचनाकारों ने काव्य पाठ किया…

डॉ चितरंजन कर, गिरिश पंकज ,डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’, रामेश्वर शर्मा , सुरेंद्र रावल ,लतिका भावे , संजीव ठाकुर, डॉ.दीनदयाल साहू , डॉ.जे.के.डागर , नीलिमा मिश्रा , राजेन्द्र ओझा, पल्लवी झा रूमा, पूर्वा श्रीवास्तव, माधुरी कर, सुषमा पटेल, राजेश जैन ‘राही’, अनिल श्रीवास्तव ‘जाहिद’, वीर अजित शर्मा, श्रवण चोरनेले, बीबीपी मोदी, छविलाल सोनी, इन्द्रदेव यदु, गणेव दत्त झा, जितेन्द्र श्रीवास्तव, नर्मदा प्रसाद विश्वकर्मा, मन्नू लाल यदु, भारतेन्दु झा, अनिता झा, यशवंत यदु ‘यश’,अपराजिता शर्मा, छबिलाल सोनी, हरीश कोटक, सीमा पांडे, डॉ.मृणालिनी ओझा, अनिता सुल्तानिया, सुमन शर्मा वाजपेयी, एन.के. सोहनी, रीना अधिकारी, गोपा शर्मा, फ़रीदा शाहीन, रेवाशीष अधिकारी एवं अमिताभ दीवान.
▪️ काव्य गोष्ठी में पढ़ी गई कुछ प्रमुख अंश बानगी…








•डॉ. जे के * डागर – मत सोचो कोई अपना कब है , जिसका ना कोई उसका रब है।
* अनिल श्रीवास्तव – पत्थर से भी प्यार जताना पड़ता है,
ऐसा भी किरदार निभाना पड़ता है ।
* संजीव ठाकुर- हाल का मेरे मुझको तो कुछ पता भी नहीं
मेरे कमरे में आज तो आईना भी नहीं ।
* पूर्वा श्रीवास्तव – शख्स हर शक से भरे सहमे हुए हैं ,
ज़िंदगी में हादसे बसने लगे हैं , खेल देखो क्या दिखाती ज़िंदगी , कफन के कपड़े बनाती जिंदगी।
•पल्लवी झा ‘रूमा’ – मोहल्ले के पीछे घर से, अक्सर आती थीं कुछ विचित्र आवाजें। कभी लड़ने -झगड़ने कभी चिखने- चिल्लाने, और कभी तो हाथापाई की ।
* बीबीपी मोदी – पढ़ ले बेटी पढ़ ले रे ,नाम करेगी कल को रे”
* श्रवण चोरनाले – भावों की पिचकारी से मन देख देख मुस्काया है , अपने तो अपने होते हैं आज समझ ये आया है।
* छबिलाल सोनी – देखा है इन आंखों ने होली के हुड़दंग ,
लाल, हरा ,नीला पीला ,तरह-तरह के रंग!
* सीमा पांडे – खामोशियां बोलती हैं ,हां खामोशियां बोलती हैं, अक्सर तन्हाइयों में , सरगोशियां यादों की ,जुबां खोलती हैं।
* नीलिमा मिश्रा- सूनी उदास आंखें , शिथिल हुई पाखें
उन पंखों को तुम परवाज़ दे जाओ बसंत।
* डॉ. मृणालिका ओझा -जो बह रहा था वह पानी था
पानी थोड़ा सा अभिमानी था ।
* राजेश जैन राही -साथ कलम का पाया हरदम , मैं बेहद आभारी हूं ,राम कथा इतनी मेरी, मैं गीतों का व्यापारी हूं।
•फरीदा शाहीन -ख्वाब आंखों में चंद रखती हूं ,हौसले भी बुलंद रखती हूं।
* वीर अजीत शर्मा- जिसके गले में माला है ,उसके मुंह में ताला है।
* सुरेंद्र रावल – प्रेम को जिसने जाना नहीं , सोच लो वह दूत है शैतान का ।
•.माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’- इन पुराने खंडरों में क्या धरा है , वो नहीं बिकता यहाँ पर जो खरा है।
•डॉ. चितरंजन कर – एक बार बस मुझे पुकारो जैसे कोयल सदा पुकारे ,सौ वसंत न्योछावर कर दूं ,आज इसी पर नाम तुम्हारे।
* गिरीश पंकज -मिलने को मिलते हैं चेहरे ,लेकिन उन में प्यार नहीं ,जैसे किसी सधे नाटक में’ मंजा हुआ किरदार नहीं.

‘संकेत साहित्य समिति’ के संस्थापक एवं प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. माणिक विश्वकर्मा ने आभार व्यक्त किया.
[ • रपट, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ ]
🟥🟥🟥🟥🟥🟥
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)