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यात्रा संस्मरण : गोवा में गंतव्य विवाह- राजशेखर चौबे
जिसने भी विवाह जैसी संस्था का ईजाद किया होगा उसने व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से पढ़ाई नहीं ही की होगी । विवाह जैसी संस्था के बावजूद नारी शक्ति के विरुद्ध इतने अपराध हो रहे हैं अन्यथा क्या होता है यह कल्पनातीत है । शादी या विवाह न होने पर कितनी अराजकता होती यह सोचकर भी सिहरन होती है, हालांकि अभी भी अराजकता कम नहीं है । प्लेटो ने भी स्त्रियों के साम्यवाद की बात कही है लेकिन शादी, विवाह या निकाह समाज के लिए एक आवश्यक अच्छाई है । मुस्लिम धर्म में इसे अनुबंध माना गया है । हिंदू धर्म में सात जन्मों का साथ माना गया है । सात जन्म इसलिए होगा क्योंकि उसके बाद पति-पत्नी अलग-अलग योनि में जन्म ले सकते हैं । चींटी और हाथी की शादी कैसे हो सकती है ? हिंदू धर्म में आठ प्रकार के विवाह का वर्णन है – , ब्रह्म ,दैव, आर्ष ,प्राजापत्य, असुर ,गंधर्व ,राक्षस और पैशाच । इसमें ब्रह्म विवाह को श्रेष्ठ माना गया है । असुर राक्षस और पैशाच विवाह में अंतर कोई पंडित ही बता बता सकता है । हमारे पूर्वज परम ज्ञानी थे परंतु एक विवाह के बारे में वे भी नहीं जानते थे और वह विवाह है – “डेस्टिनेशन वेडिंग “। इसका हिंदी गंतव्य या दूरस्थ विवाह हो सकता है । उस जमाने में ऐसा होता तो देवगण की भी पहली च्वाइस गोवा में डेस्टिनेशन वेडिग ही होती । हेमंत भाई और किरण बेन की च्वाइस भी गोवा ही थी । अपनी तीसरी पुत्री पलोमी और कमलेश भाई व बीना बेन के सुपुत्र वत्सल की गंतव्य शादी होनी थी । हेमंत भाई रायपुर निवासी हैं और कमलेश भाई राजकोट निवासी, दोनों में समानता यह है कि दोनों ही गुज्जू भाई हैं । यह भी एक सुखद संयोग है की पलोमी और वत्सल के मम्मी पापा की शादी भी इसी दिन और एक ही वर्ष में संपन्न हुई थी । शादी कारवेला बीच रिसोर्ट वारका गोवा में होना था । हेमंत जी हमारे विभागीय साथी हैं और उनका स्नेहिल आमंत्रण हम लोग टाल नहीं सके । अंबानी की शादी में तीन खान भाईजान पहुंचे थे तो इस शादी में तीन विप्र बंधु पहुंचे । मेरे अलावा विभागीय मित्र सुबोध जी व राजेश जी भी गंतव्य विवाह का लुत्फ़ उठाने को तत्पर थे। हम ” त्रण ” कृपण नहीं थे इसलिए गोवा जा सके। हम तीनों ” शौकीन ” के बुड्ढे तो नहीं हैं पर शौकीन बुड्ढे जरूर हैं । लिहाज़ा हम तीनों रायपुर से सीधे फ्लाइट द्वारा डैबोलीन एयरपोर्ट गोवा पहुंचे । सुबह 10:30 बजे होटल पहुंचने पर हम सबका परंपरागत गोवानी संगीत से स्वागत किया गया । बीच रिसोर्ट एक शानदार होटल है जो वरका नॉर्थ गोवा में स्थित है । इससे लगा हुआ एक समुद्री बीच है । होटल के मध्य में एक स्विमिंग पूल है जिसका नज़ारा आप रिसोर्ट के अधिकांश कमरों से देख सकते हैं । यहां विदेशी पर्यटक भी काफी संख्या में दिखे । सबसे पहले होटल के ही एक हाल में गणेश पूजा व मंडप पूजा का कार्यक्रम रखा गया था।

हम लोग लनाई व कैसकडा कैफ़े में लंच के लिए बिफोर टाइम पहुंच गए थे । बुफे लंच रखा गया था । भोजन में क्या था यह मैं नहीं बताऊंगा क्योंकि उसमें सामिष भोजन को छोड़कर सब कुछ था । यहां तक कि बिना लहसुन प्याज का जैन भोजन भी उपलब्ध था ।

हम सभी रात के संगीत व डिनर को लेकर उत्साहित थे । यह आयोजन सी बीच लान में होना था । बच्चों और महिलाओं का उत्साह चरम पर था । लॉन में डांस के लिए शानदार स्टेज सजा हुआ था । जैसा कि हमेशा होता है । वर तथा वधू पक्ष दोनों पक्षों का मुकाबला यहां भी हुआ । पलोमी की दो बड़ी बहनें निधि और पूर्वी और दोनों जीजा जी का डांस शानदार था । वत्सल और पलोमी के भाई-बहनों व मित्रों ने एक से बढ़कर एक डांस किए। वत्सल के मम्मी पापा भी कहां पीछे रहने वाले थे । इस कार्यक्रम में वत्सल और पलोमी का डांस और दलेर मेंहदी के सुपुत्र गुरदीप मेंहंदी विशेष आकर्षण के केंद्र रहे। कौन सा पक्ष विजयी रहा यह तय करना कठिन था। आर्केस्ट्रा , एंकर ,मेकअप वुमन और कोरियोग्राफर मुंबई से आए थे । गुजराती पंडित जी अपने दो साथियों के साथ दुर्ग से आए थे । देर रात तक हम सभी ने संगीत का लुत्फ लिया ।
नाश्ते के बाद हल्दी रस्म होना था । पूरे विवाह के दौरान एंकर कोरियोग्राफर की महती भूमिका थी । हल्दी रस्म कोकोनट ग्रो एरिया में होना था । समुद्री बीच में इस रस्म का अलग ही आनंद था । वर वधु पक्ष के लोग जमा हैं परंतु वर वधु पहुंचे नहीं थे जबकि उनके स्वागत के लिए विदेशी डांसर भी मौजूद थे । अचानक कुछ हलचल हुई । हम सबने देखा कि वर वधू
“धूमनुमा ” बाइक में धीरे-धीरे आ रहे हैं । हम सभी ने वत्सल और पलोमी का तालियों से स्वागत किया । यहाँ भी दोनों पक्षों के लोगों ने चित्ताकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया । अंत में हल्दी रस्म संपन्न हुआ ।

4:00 बजे साफा बंदी थी । हम सबने साफा बंधवा लिया । वर पक्ष के लोगों ने पीला व हम लोगों ने गुलाबी साफा बांधा । शाम 5:30 बजे हाई टी का आयोजन बीच साइड में हुआ । शाम 6:00 बजे मैंने समुद्री बीच पर कुछ हलचल देखा । वहाँ जाकर देखा कि एक बड़ा सा मंडप सजा हुआ है । दरअसल यह विवाह मंडप ही था । इसी स्थान पर बारात स्वागत और हस्त मिलाप यानी की विवाह होना था । हम सभी मंडप के आसपास बैठ गए थे । मंडप के बगल में आर्केस्ट्रा चल रहा था । मुंबई से आई गायिका ने हिंदी और गुजराती गानों से समां बांध दिया था । हम अभी कुछ और सरप्राइज की उम्मीद में थे और उन्होंने हमें निराश नहीं किया । अचानक सब लोग ऊपर देखने लगे तभी हेमंत भाई का सुबोध जी को फोन आया कि ऊपर देखो हम सब ने देखा एक गुब्बारा मंडप के ठीक ऊपर था और धीरे-धीरे नीचे आ रहा था । बताया गया कि वत्सल जी गुब्बारे से विवाह मंडप में पधार रहे हैं । वत्सल धीरे-धीरे नीचे आए और मंडप के बगल में लैण्ड किया । हम सबने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया । दुल्हन यानी पलोमी अभी तक आई नहीं थी । अचानक पता चला कि वह समुद्र के रास्ते बोट से विवाह मंडप में पधार रही है । उसका भी तालियों से भरपूर स्वागत किया गया । दोनों ही दुल्हन के वेश में बहुत प्यारे और सुंदर लग रहे थे । विवाह की रस्मों के बीच समुद्री बीच पर शानदार आतिशबाजी का मुजाहिरा हो रहा था । दुर्ग के पंडित जी गुजराती व हिन्दी में मंत्रोच्चार करते हुए रस्मों की रस्म अदायगी कर रहे थे । विवाह धूमधाम से संपन्न हुआ । वर वधु पक्ष की प्रसन्नता देखने लायक थी क्योंकि विवाह उनके मन मुताबिक संपन्न हुआ था । वत्सल और पलोमी भी अत्यंत सुंदर दिख रहे थे और उनकी जोड़ी भी लाजवाब है । दोनों ही खुश नजर आ रहे थे और क्यों न हों ? दोनों ही विवाह के पवित्र बंधन में बन चुके थे और सात जन्मों के साथी भी बन चुके थे । अंत में समुद्री बीच पर ही डिनर का भी इंतजाम था । दुल्हन पलोमी बिटिया की विदाई के साथ ही हम लोगों ने भी विदा ली।

हम तीनों मित्र फ्लाई कर दो घंटे में रायपुर पहुंच गए। हम सभी के लिए गंतव्य विवाह एक यादगार विवाह समारोह बन गया । इसकी सुखद यादें बरसों तक हमारे जेहन में रहेगी । वत्सल और पलोमी को हम सब की ओर से हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।

▪️ राजशेखर चौबे
•देश के प्रतिष्ठित व्यंग्यकार राजशेखर चौबे भारतीय राजस्व सेवा IRS सेंट्रल टैक्स एवं जीएसटी विभाग से सहायक आयुक्त से सेवानिवृत हुए. •राजशेखर चौबे के तीन व्यंग्य संग्रह आजादी का जश्न, स्ट्राइक 2.0 और निठल्लों का औजार-सोशल मीडिया के बाद चौथी व्यंग्य संग्रह संतरा गणतंत्र जल्द आ रही है. •चौबे जी को अब तक शांति गया स्मृति सारस्वत सम्मान, सृजनश्री सम्मान, सहभागिता सत्कार सम्मान, बिलासा सम्मान, हिंदी सेवा सम्मान और कादम्बरी सम्मान प्राप्त हुए. • दैनिक अखबारों एवं राष्ट्रीय स्तर के पत्र-पत्रिकाओं में वे निरंतर प्रकाशित हो रहे हैं. ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के पाठकों/वीवर्स के लिए खुशखबरी है कि राजशेखर चौबे जी का एक व्यंग्य स्तम्भ मई-2024 से हमारी प्रिंट मासिक पत्रिका में प्रकाशित होने जा रही है. • आज ‘छत्तीसगढ़ आसपास वेब पोर्टल’ में यात्रा संस्मरण ‘गोवा में गंतव्य विवाह’ प्रकाशित कर रहे हैं. इस यात्रा लेख को ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के पाठक प्रिंट मासिक पत्रिका के अप्रेल-2024 के अंक में भी पढ़ पाएंगे. – संपादक ]
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