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छत्तीसगढ़ आसपास संयंत्र की खबरें

2 years ago
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नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत पर निदेशक प्रभारी ने संयंत्र का किया दौरा : बढ़ाया भिलाई बिरादरी का हौसला…

सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र ने पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान कई क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ निष्पादन करने के साथ अन्य कार्य क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन दर्ज कर उपलब्धियां हासिल की है। इसके साथ ही भिलाई बिरादरी ने नए वित्त वर्ष 2024-25 में और अधिक व श्रेष्ठ निष्पादन करने स्वयं को तैयार कर लिया है। भिलाई इस्पात संयंत्र के निदेशक प्रभारी श्री अनिर्बान दासगुप्ता ने 13 अप्रैल 2024 को संयंत्र के विभिन्न विभागों का दौरा किया। जहाँ उन्होंने सभी अधिकारियों और कार्मिकों से मुलाकात की, उन्हें उनके प्रदर्शन के लिए बधाई दी और वर्तमान वित्तीय वर्ष में बेहतर प्रदर्शन करने हेतु प्रेरित किया।

13 अप्रैल को संयंत्र भ्रमण का प्रारंभ निदेशक प्रभारी श्री अनिर्बान दासगुप्ता ने इस्पात भवन से किया। इस अवसर पर इस्पात भवन में मानव संसाधन विकास विभाग, आई आर, जनसम्पर्क विभाग, परियोजना विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारीगण व कर्मचारीगण उपस्थित थे। उन्होंने इस्पात भवन में उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नए वित्त वर्ष के साथ-साथ हिंदू नववर्ष, गुड़ी पड़वा, बैसाखी, बंगाली नववर्ष की शुभकामनाएं भी दी। उन्होंने कहा पिछले वित्त वर्ष 2023-24 में आप लोगों ने उत्कृष्ट निष्पादन व श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त किया है, इस उपलब्धि में आप सभी के कार्यों का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। श्री अनिर्बान दासगुप्ता ने सार्वजनिक रूप से किए जाने वाले कार्यों, उपलब्धियों और नवीन वित्तीय वर्ष 2024-25 की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस पर चर्चा करते हुए कहा, कि आप सभी के प्रयासों से ही ये श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त करना संभव हुआ है। उन्होंने सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने एवं सुरक्षित रूप से कार्य करने पर विशेष जोर दिया। श्री अनिर्बान दासगुप्ता ने वर्तमान वित्त वर्ष में, संयंत्र के आगामी लक्ष्यों के लिए कॉस्ट कटिंग ना करके कॉस्ट सेविंग अर्थात् मितव्ययता और समय से पूर्ण करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस वर्ष के लिए ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रोत्साहित किया। अंत में श्री अनिर्बान दासगुप्ता ने संयंत्र बिरादरी के सदस्यों को उनके प्रयासों के लिए, उन्हें एवं उनके परिजनों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

इस भ्रमण भ्रमण के दौरान श्री अनिर्बान दासगुप्ता के साथ संयंत्र के कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं) श्री एस मुखोपाध्याय, कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन)श्री अजय कुमार चक्रबर्ती, कार्यपालक निदेशक (वित्त एवं लेखा) डॉ अशोक कुमार पंडा, कार्यपालक निदेशक (रावघाट) श्री समीर स्वरुप, कार्यपालक निदेशक( कार्मिक एवं प्रशासन) श्री पवन कुमार, कार्यपालक निदेशक (माइंस) श्री बी के गिरी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवांयें) डॉ एम रविन्द्रनाथ, कार्यकारी कार्यपालक निदेशक (वर्क्स) श्री तापस दासगुप्ता और विभिन्न विभागों के मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी गण, मुख्य महाप्रबंधकगण, महाप्रबंधकगण सहित इस्पात बिरादरी के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

प्रारंभ में कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं) श्री एस मुखोपाध्याय ने उपस्थित इस्पात बिरादरी के सदस्यों को संबोधित करते हुए नए वित्त वर्ष की शुभकामनाएं दी। पुराने वित्त वर्ष में इस्पात बिरादरी द्वारा किये गए सराहनीय कार्य की प्रशंसा करते हुए श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा, हमने साथ मिलकर बीते वित्त वर्ष में बहुत से कार्य पूरे किए, जिनमें कुछ उम्मीद से बढकर हुए तो कुछ समय से पहले पूर्ण हुए, पर कुछ कार्य अब भी अधूरे हैं और उन्हें पूरा करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। जिससे हम नए वित्त वर्ष में अपने आगामी लक्ष्यों को हासिल कर सकें। उन्होंने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए वित्त एवं लेखा, सामग्री प्रबंधन, माइंस, कार्मिक एवं प्रशासन सहित सभी विभागों के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। श्री एस मुखोपाध्याय ने सभी कर्मचारियों से चालू वित्त वर्ष में आगामी लक्ष्यों को समय से पूरा करने पर ध्यान देने की आवश्यकता जताई।
उपस्थित कार्यपालक निदेशकों ने भी संयंत्र बिरादरी के सदस्यों को बधाई दी और अपने विचार रखे। सभी कार्यपालक निदेशकों ने सभी विभागों के कर्मचारियों को वर्तमान वित्तीय वर्ष में बेहतर उपलब्धि हासिल करने के लिए प्रेरित किया एवं शुभकामनाएं दी।

निदेशक प्रभारी एवं कार्यपालक निदेशाकगणों की टीम ने इस्पात भवन के बाद, यूनिवर्सल रेल मिल, रेल एंड स्ट्रक्चरल मिल और आरटीएस विभाग, मर्चेंट एंड वायर रॉड मिल, बार एंड रॉड मिल, सिंटर प्लांट, ओर हैंडलिंग प्लांट, एलडीसीपी, कोक ओवन एवं कोल केमिकल विभाग, स्टील मेल्टिंग शॉप-2, प्लेट मिल, सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग, ब्लास्ट फर्नेस, पी एंड बीएस विभाग, पर्यावरण प्रबंधन विभाग, आई एंड ए विभाग, स्टील मेल्टिंग शॉप-3 एवं आरसीएल विभाग, (एम एंड यू) रखरखाव एवं उपयोगिताएँ विभाग तथा सेंट्रल प्लांट स्टोर्स का भ्रमण किया।

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सीटीवायएम के ‘मेड इन सेल’ विजेताओं से एक सार्थक चर्चा : विजयी रहने की संस्कृति भिलाई में अब भी बरकरार…

भिलाई और भिलाईवासियों को जो दूसरों से अलग और अद्भुत छवि बनती है, वह है उनकी करुणा, प्रेम और अपनेपन की भावना। वे सबको स्वीकार करते हैं, सबको अपनाते हैं और आसानी से संगठित होकर एक समुदाय में बंध जाते हैं। भिलाईवासी एक-दूसरे से बहुत कुछ सीखते और सिखाते हैं, एक दूसरे के विकास में आपसी सहयोग करते हैं। जितना संभव हो सके एक-दूसरे का साथ देते हैं। भिलाई बिरादरी का यह जुड़ाव हर किसी की जिंदगी से जुड़ा हुआ है सेल……, कुछ इस तरह से नज़र आता है।
समय बदल रहा है। नई पीढ़ी का आकर्षण बड़े शहरों की ओर निश्चित रूप से बढ़ रहा है। लेकिन नई पीढ़ी के बहुत से लोग अभी भी इस्पात नगरी में मौजूद हैं और एक ऐसे संगठन में सक्रिय है। जिस संगठन में कभी उनके परिवार के अग्रज कार्य करते थे। ऐसे संगठन का प्रतिनिधित्व करना बहुत गर्व की बात है, जहां उनके माता-पिता और यहां तक कि उनके दादा-दादी ने अपने पूरा जीवन और कार्यसेवा उसी संगठन में बिताई हो। दूसरी और तीसरी पीढ़ी के सदस्यों की उसी संगठन में भागीदारी, वफादारी और विश्वास को दर्शाता है। इस शहर पर सेल के प्रभाव का यही स्तर बना हुआ है।
सेल प्रतिवर्ष 45 वर्ष या उससे कम उम्र के सभी युवा प्रबंधकों के लिए चेयरमैन्स ट्रॉफी फॉर यंग मैनेजर्स (सीटीवायएम) आयोजित करता है। इस वर्ष, न केवल बीएसपी की युवा टीम ने प्रतिष्ठित ट्रॉफी और सम्मान प्राप्त किया है, बल्कि टीम के सभी सदस्य एक सामान्य किन्तु विषेष पहलू को उजागर करते हैं, जो सम्मान के गौरव को कई गुना बढ़ा देता है और वो यह है कि ये सभी सदस्य “मेड इन सेल” हैं।
श्री सोनल श्रीवास्तव, जो वर्तमान में आरसीएल में प्रबंधक पद पर कार्यरत हैं और ये भिलाई इस्पात संयंत्र में शामिल होने वाली तीसरी पीढ़ी के सदस्य हैं। श्री सोनल श्रीवास्तव कहते हैं कि “मैं अपने दादाजी से कभी नहीं मिला, उनकी मृत्यु जल्दी हो गई थी, लेकिन उनके संस्मरण आज भी हमें गौरवान्वित करते हैं”। सोनल के दादा जी ने बीएचयू से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया था। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वह टाटा प्रोजेक्ट्स में शामिल हो गए थे, लेकिन नियति को तो कुछ और ही मंजूर था। टाटा में अपने दो साल का कार्यकाल पूर्ण करने के बाद, वह बेहतर संभावनाओं के लिए मुंबई जा रहे थे, लेकिन यात्रा के बीच में ही वह एक ऐसी जगह पर रुके जो चारों ओर तंबू से घिरा हुआ था। जैसे ही वह स्टेशन से बाहर निकले, उनके पास एक नौकरी थी, जो तब अंजान भिलाई इस्पात संयंत्र की नौकरी थी। वह फाउंड्री और फोर्ज शॉप में शामिल हुए और उनकी उपलब्धि के लिए उन्हें 1971 में ‘मेटलर्जिस्ट ऑफ द ईयर’ सम्मान से सम्मानित किया गया। श्री सोनल श्रीवास्तव ने कहा कि मेरे पिता भिलाई में पैदा हुए, यहीं पले-बढ़े और भिलाई विद्यालय में स्कूली शिक्षा प्राप्त कर, भिलाई इस्पात संयंत्र में सेवा देने वाले दूसरी पीढ़ी के कर्मचारी बने। इस संगठन में 39 साल की सेवा के बाद, वह ढेर सारी अच्छी यादों और गर्व की भावना के साथ, पिछले साल ही मर्चेंट मिल विभाग से सेवानिवृत्त हुए हैं। श्री सोनल बताते हैं कि तीसरी पीढ़ी का सेल कर्मचारी होने के नाते, मैंने अपना मिडिल स्कूल बीएसपी ईएमएमएस-5 से और अपना हाई स्कूल बीएसपी के एसएसएस-10 से पूरा किया। एनआईटी रायपुर से मेटलर्जी में अपनी इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद, मैं वर्ष 2014 में सेल की कार्यसेवा में शामिल हो गया। एक कर्मचारी के रूप में भले ही अब तक मैंने यहाँ एक दशक ही बिताया हो, पर बीएसपी के साथ और सहयोग के कारण सेल हमेशा ही मेरे अस्तित्व का अभिन्न अंग रहा है।
तीसरी पीढ़ी के एक और कर्मचारी और सीटीवाईएम के विजेता सदस्य श्री सिद्धार्थ रॉय, वर्ष 2015 में भिलाई इस्पात संयंत्र में शामिल हुए और वर्तमान में ब्लास्ट फर्नेस-8 (ऑपरेशन) में प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। श्री सिद्धार्थ रॉय का कहना है कि “सेल मेरे लिए नया नहीं है, बल्कि मेरे जीवन का एक हिस्सा है”। इसकी शुरुआत 1950 के दशक में हुई और यहाँ की कड़ी मेहनत, ईमानदारी और बुद्धिमत्ता की मशाल आने वाली पीढ़ियों तक भी पहुँची है। सेल में कार्य करने वालों में सबसे पहले मेरे दादाजी थे – एक साधारण दूरदर्शी व्यक्ति थे। उन्होंने न केवल अपना पैतृक घर और इस्को इस्पात संयंत्र (पूर्व में कुल्टी, पश्चिम बंगाल में स्थित) में नौकरी छोड़ दी, बल्कि अन्य लोगों को भी एक अविकसित, नई जगह पर जाने और वहां रहने के लिए मना लिया और वो सभी भिलाई चले आए। उन दिनों, भिलाई इस्पात संयंत्र एक मिलियन टन प्रतिवर्ष उत्पाउन क्षमता वाला संयंत्र था। अभी नया सेटअप होने के कारण, पूर्व सोवियत संघ (यूएसएसआर) टेक्नोलॉजी को आवश्यक रूप से सीखना सबसे महत्वपूर्ण होने के साथ साथ यहां के प्रत्येक कर्मचारियों का प्राथमिक उद्देश्य बन गया था। कंपनी विकसित हुई, उसके साथ ही लोगों ने विकास किया और इस्पात श्रमिकों की पहली पीढ़ी धीरे-धीरे समाप्त होने लगी। फिर मेरे पिता, वर्ष 1980 के दशक के मध्य में सेल में शामिल हुए। वह एक ऐसा समय था जब हमारा परिवार ‘ग्रोथ’ कर रहा था। संयंत्र की क्षमता पहले ही 2.5 मिलिटन टन प्रतिवर्ष तक बढ़ा दी गई, जो उस समय एक उल्लेखनीय और तकनीकी रूप से आष्चर्यजनक उपलब्धि थी। अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी वाली प्लेट मिल देखने लायक थी। श्री सिद्धार्थ रॉय बताते हैं कि मेरे पिता ने अपने करियर की शुरुआत श्रमिकों के निचले स्तर से की और धीरे-धीरे फ्रंटलाइन मैनेजर बनकर ऊँचे स्तर तक पहुंच गए। इस संगठन में 35 साल की सेवा देने के बाद, ढेर सारी यादों के साथ आखिरकार वह वर्ष 2022 में सेवानिवृत्त हो गए। श्री सिद्धार्थ रॉय ने बताया कि मेरी बुनियादी शिक्षा बीएसपी ईएमएमएस-5 और बीएसपी एसएसएस-10 से हुई। मैंने एनआईटी रायपुर में मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग को चुना। कड़ी मेहनत करने के बाद मुझे भारत के तीन प्रमुख इस्पात निर्माताओं से आॅफर आया। चुनाव करना कठिन नहीं था, क्योंकि सेल मेरे लिए एक स्पष्ट और साफ विकल्प था। मैं सेल से वर्ष 2015 में जुड़ा और सबसे पहले ब्लूमिंग एंड बिलेट मिल (बीबीएम) में पहुंचा और फिर मेरा ध्यान ब्लास्ट फर्नेस पर केंद्रित हो गया। जहां मुझे महामाया, बीएफ-8 की कमीशनिंग टीम का हिस्सा बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यहाँ की हर चीज मुझे याद दिलाती है कि भिलाई इस्पात संयंत्र की जड़े कैसे मेरे परिवार के अस्तित्व से जुडी हुई है। सेल ने मुझे दोनों बांहें फैलाकर स्वीकार किया है।
टीम के तीसरे सदस्य श्री विनय पवार हैं, जो वर्तमान में एलडीसीपी/आरएमपी-3 में उप प्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं और ये दूसरी पीढ़ी के बीएसपी कर्मचारी हैं। श्री विनय पवार ने कहा, मेरे पिता 1989 में गैराज सेक्टर-7 में बीएसपी में शामिल हुए थे। वर्ष 1997 में हमारे भिलाई आने तक वह रसमड़ा से भिलाई नगर स्टेशन तक ट्रेन से यात्रा करते थे। आने वाले वर्षों में, उन्हें एमईआरएस और फिर प्लांट गैराज में स्थानांतरित कर दिया गया और आखिरकार, वह पिछले साल 2023 में गैराज से सेवानिवृत्त हो गए। श्री विनय बताते हैं कि मैंने अपनी स्कूली शिक्षा बीएसपी स्कूल से की, जहां मुझे प्रतिष्ठित पीएम ट्रॉफी छात्रवृत्ति प्राप्त हुई थी। अंततः मैंने एनआईटी रायपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और वर्ष 2018 में सेल में शामिल हो गया। वे कहते हैं “आज मैं जो कुछ भी हूं, वह मुझे मेरे परिवेश ने बनाया है और सेल ने मेरे जीवन पर जो प्रभाव डाला है, उसके लिए मैं सदैव ऋणी रहूंगा”। इसलिए, मैं कह सकता हूं कि “बाकी सभी की तुलना में मेरे जीवन में सेल का योगदान थोड़ा अधिक है।”
सीटीवाईएम के लिए इस वर्ष का विषय “सस्टेनेबल फ्यूचर थ्रू ईएसजी एडॉप्शनः चैलेंजेस एंड वे फॉरवर्ड इन सेल” था। टीम ने दिए गए विषय पर रिपोर्ट लिखने के लिए कठोर अध्ययन किया। टीम ने अपने सभी संसाधनों का भरपूर उपयोग किया। टीम ने पत्रिकाएँ पढ़ीं, विशेषज्ञों की चर्चाएँ देखीं और कई वरिष्ठ प्रबंधन के कई जानकर व्यक्तियों के साथ साक्षात्कार किये। उन्होंने कई ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर ईएसजी पर पाठ्यक्रम भी लिया। एक सर्वेक्षण तैयार किया गया और फिर उचित विश्लेषण किया गया ताकि संवेदनशील क्षेत्रों का पता लगाया जा सके। खूब विचार-मंथन और विचार-विमर्श करने पर टीम को कुछ समाधान मिले। टीम का प्राथमिक फोकस, कार्यान्वयन योग्य समाधान प्रदान करना और उन्हें लागू करने के लिए संसाधनों की तात्कालिक उपलब्धता के अनुसार फिल्टर करना था। टीम ने इसे बीएसपी स्तर पर प्रस्तुत किया गया, जहां उन्होंने “डीआईसी ट्रॉफी” प्राप्त की और सेल स्तर पर चले गए। सेल स्तर पर भी टीम को सीटीवाईएम 2023-24 के लिए विजेता घोषित किया गया।
विजेता टीम के सदस्यों ने बताया कि हमें बीएमडीसी प्रबंधन और उनके कर्मचारियों से अपार समर्थन मिला, जिन्होंने हमें चैबीसों घंटे सभी संभावित संसाधन उपलब्ध कराए। “बीएसपी की विजयी होने की मानसिकता हमारी संस्कृति में गहराई से अंतर्निहित है।” हमारे पिछले विजेता भी हमारे मार्गदर्शन और रचनात्मक आलोचना हेतु हमेशा तैयार रहते थे और हर संभव तरीके से हम में से सर्वश्रेष्ठ प्राप्त करने में हमारी सहायता करते थे। इस पूरी प्रक्रिया के एक कम्प्लीट सायकल को पूर्ण करने में लगभग 7-8 महीने लगते हैं। पैरामीटर हर समय काम में आते हैं। ऐसे स्तरों तक पहुँचने के लिए बहुत कड़ी मेहनत, समर्पण, धैर्य और त्याग की आवश्यकता होती है। टीम वर्क का मतलब, एक साथ एकजुट होकर सभी कठिनाइयों का सामना करना है। लेकिन अंततः, यह किसी भी कीमत पर जीतने की आपकी इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है। उच्चतम स्तर पर जीतना हमें बहुत खुशी देता है और हमें उम्मीद है कि हम भविष्य में भी अपने संगठन को और अधिक गौरव दिलाने में सक्षम होंगे।
कहते हैं ना “विथ ग्रेट पॉवर कम्स ग्रेट रिस्पॉन्सिबिलीटी”, जैसे जैसे हम इस नवीन सशक्त यात्रा की शुरुआत कर रहे हैं, हमें लगता है कि युवा प्रबंधकों को मार्गदर्शन और प्रेरित करना हमारी जिम्मेदारी है। ठीक वैसे ही जैसे हमें हमारे वरिष्ठों द्वारा हमें निर्देशित किया गया था। हम आशा करते हैं कि विजेता बनने की यह संस्कृति आने वाले वर्षों तक इसी तरह बरकरार रहेगी।

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एसएमएस-3 विभाग में पाली एवं कर्म शिरोमणी पुरुस्कार समारोह का आयोजन…

सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के स्टील मेल्टिंग शाॅप-3 में विगत दिनों पाली एवं कर्म शिरोमणी पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित महाप्रबंधक (एसएमएस-3) श्री ए बी श्रीनिवास ने कार्मिकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पुरस्कार उत्कृष्ट कार्य के साथ-साथ विशेषकर सुरक्षा के पालन करने हेतु दिया गया है। उन्होंने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आगे भी सभी विजेता उत्कृष्ट कार्य करते हुए अपने साथी कार्मिकों को प्रेरित करें।
उप प्रबंधक श्री अषोक कुमार चैकीदार को पाली शिरोमणी पुरस्कार से नवाजा गया। इसी क्रम में एसएमएस-3 के श्री धनंजय कुमार सिंह, आर पुष्पाअर्चना, श्री पुनऊ दास, श्री ओम प्रकाश, श्री तापस बाउरी एवं श्री रंजीत साह को कर्म शिरोमणी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पुरस्कृत कार्मिकों के जीवनसाथी हेतु प्रोत्साहन स्वरूप प्रशंसा पत्र प्रदान किया है।
कार्यक्रम में स्टील मेल्टिंग शाॅप-3 के महाप्रबंधकगण श्री पी सतपथी, श्री यतेन्द्र कुमार, श्री त्रिभुवन बैठा, श्री डी विजिथ तथा उप महाप्रबंधक (एसएमएस-2) श्री संजीव कुमार सोनी भी उपस्थित रहे। उपस्थित सभी अतिथियों ने विजेताओं के कार्यशैली व सुरक्षा के प्रति जागरूकता की प्रशंसा करते हुए उन्हें बधाई दी। उन्होंने पुरस्कार विजेताओं को सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भविष्य में और बेहतर कार्य करने हेतु प्रोत्साहित किया।

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स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
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कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
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संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
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लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
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लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
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लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
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लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
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कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
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🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
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चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
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रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

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रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

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कहानी : संतोष झांझी

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कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

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व्यंग्य : ‘ घूमता ब्रम्हांड ‘ – श्रीमती दीप्ति श्रीवास्तव [भिलाई छत्तीसगढ़]

दुर्गाप्रसाद पारकर की कविता संग्रह ‘ सिधवा झन समझव ‘ : समीक्षा – डॉ. सत्यभामा आडिल
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लघुकथा : रौनक जमाल [दुर्ग छत्तीसगढ़]

लेख

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
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तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
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व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

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लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
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18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
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18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
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व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
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🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
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🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
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🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
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▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
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▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
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▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
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25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

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🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

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🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

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🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

⏩ 12 अगस्त-  भोजली पर्व पर विशेष
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⏩ 12 अगस्त- भोजली पर्व पर विशेष

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■पर्यावरण दिवस पर चिंतन : संजय मिश्रा [ शिवनाथ बचाओ आंदोलन के संयोजक एवं जनसुनवाई फाउंडेशन के छत्तीसगढ़ प्रमुख ]

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■पर्यावरण दिवस पर विशेष लघुकथा : महेश राजा.

राजनीति न्यूज़

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

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■छत्तीसगढ़ :

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भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

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भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

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राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

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पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन