- Home
- Chhattisgarh
- स्मृति शेष : श्रीमती माधुरी ‘मोना’ समरेंदू विश्वास [19 सितम्बर 1967- 26 मार्च 2024]
स्मृति शेष : श्रीमती माधुरी ‘मोना’ समरेंदू विश्वास [19 सितम्बर 1967- 26 मार्च 2024]

👉 ▪️ माधुरी समरेंदू विश्वास
इस मायारूपी संसार में आना जाना प्रकृति का नियम है. जो इस पृथ्वी में जन्म लिया है, उनको इस नश्वर शरीर को छोड़कर जाना ही है. जाना तय है किंतु समय से पहले लाइलाज बीमारी से लड़कर ब्रह्मलीन हो जाना सचमुच दुःखदायी होता है. अपनों का अपनों से साथ छोड़कर चले जाना परिवार के लिए क्षति तो है ही,साथ में उन नाते- रिश्ते ,मित्रों का भी….
विगत दिनों माधुरी विश्वास की स्मृति में ‘विश्वास निवास’ स्मृति नगर भिलाई में शांति पाठ का आयोजन हुआ. समरेंदू दादा के सादर आमंत्रण पर मैं भी इस शोक सभा का हिस्सा बन पाया और बौदी [बांग्ला में बौदी याने भाभी] को विनम्र श्रद्धांजलि पुष्प अर्पित कर सका.
शोक सभा समरेंदू विश्वास ने रखा. ‘बंगीय साहित्य संस्था’, ‘ रविंद्र सुधा’ और ‘मुक्तकंठ साहित्य समिति’ की भी भागीदारी रही. शोक सभा में अपने- अपने शब्दों की श्रद्धांजलि देने के पूर्व उनकी आत्मा को शांति प्रदान करने के लिए 2 मिनट का मौन रखा गया.
‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति श्रीमती बानी चक्रवर्ती, उप सभापति श्रीमती स्मृति दत्ता, सलाहकार गोविंद पाल और उप सचिव प्रकाशचंद्र मण्डल ने माधुरी विश्वास के साथ बिताये कुछ संस्मरण साझा किए. ‘रविंद्र सुधा’ की तरफ से विश्वजीत सरकार और संचियता राय ने मधुर संगीतबद्ध भजन से श्रद्धांजलि अर्पित किए.
समरेंदू विश्वास ने अपनी धर्म पत्नी माधुरी विश्वास ‘मोना’ के बीमारी के बारे में आप बीती डबडबाई आँखों से कुछ इस तरह से कही-
👉 ▪️ समरेंदू विश्वास शोक सभा में बोलते हुए…
‘छत्तीसगढ़ आसपास’ ग्रुप के ग्रुप एडिटर प्रदीप भट्टाचार्य ने अपने ब्लॉक में लिखा-
समरेंदू विश्वास देश में एक ख्यातिलब्ध बांग्ला लेखक व कवि के रूप में विख़्यात हैं. देश की तमाम बांग्ला पत्रिकाओं में इनकी कविताएं निरंतर पढ़ने को मिलती है. दादा समरेंदू की धर्मपत्नी श्रीमती माधुरी भी साहित्य में रुचि रखती थीं. माधुरी ‘मोना’ एक कुशल गायिका भी थीं.
माधुरी विश्वास का जन्म 19 सितम्बर 1967 को हुआ और 26 मार्च 2024 को कैंसर जैसी बीमारी से लड़ते हुए बैंगलोर में निधन हो गया. भिलाई इनका निवास है. दादा समरेंदू भिलाई इस्पात संयंत्र में अधिकारी पद में रहते हुए सेवानिवृत हुए. बैंगलोर में दादा समरेंदू की बेटी [अनन्या विश्वास डे] और दामाद प्रसुन डे] जॉब के सिलसिले में रहते हैं, इसलिए माधुरी ‘मोना’ का भी इलाज वहीं चल रहा था. दादा समरेंदू का एक पुत्र समुद्रनील विश्वास है.
कहते हैं ‘सितम्बर’ में जन्में लोग बहुत गुणी और मिलनसार व्यक्ति के धनी होते हैं और यही वजह है सितम्बर में जन्में लोगों का विश्व में ‘सितम्बर क्लब’ भी बना है.


👉 ▪️ उपस्थित प्रबुद्धजन…
शोकसभा में शोक संतप्त परिवार के साथ जो प्रबुद्धजन शामिल थे-
बानी चक्रवर्ती, स्मृति दत्ता, गोविंद पाल, प्रकाशचंद्र मण्डल, प्रदीप भट्टाचार्य, आलोक कुमार चंदा, शंकरचंद्र डे, दीपाली डे, शंकर रॉय, विजया रॉय, विश्वजीत सरकार, संचियता रॉय, सुबीर रॉय, नवीन दास, जयश्री दास, अमित चौधुरी, अर्चना चौधुरी, राजदीप सेन, चंद्रनभ दासगुप्ता, दीपाली दासगुप्ता, मणिमय मुखर्जी, श्रीमती मणिमय मुखर्जी, मोऊ रॉयचौधुरी, सोमाली शर्मा, धीमान भट्टाचार्य, ब्रजेश्वर मलिक, पातांजलि चक्रवर्ती, मधुमीता चक्रवर्ती, राखी केरक, विपुल सेन, सुयश सेन और अनेक शुभचिंतक.

👉 ▪️ बंगीय साहित्य संस्था’ द्वारा शोकपत्र देते हुए…

👉 ▪️ शोकपत्र देते हुए [बाएँ से] गोविंद पाल, प्रदीप भट्टाचार्य, समरेंदू विश्वास और प्रकाशचंद्र मण्डल…

👉 ▪️ ‘बंगीय साहित्य संस्था’ द्वारा दिया गया शोकपत्र…
[ ▪️ रिपोर्ट लेख -प्रदीप भट्टाचार्य : वीडियो/फोटो सौजन्य- आलोक कुमार चंदा]
🕉 शांति
______________
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)