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समीक्षा : पूनम पाठक ‘बदायूं’ की काव्य संग्रह ‘माँ की बातें’ : समीक्षक : गिरीश चंद्र मिश्र

सम्मानित सुधी पाठकवृंदों , सादर नमस्कार। परम सौभाग्यवश मुझे काव्य संग्रह “माँ की बाते” पर कुछ कहने का अवसर मिला है जिसे मैं आप सभी से साझा कर रहा हूँ न्यूनाधिक के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ। अपनी बरसों -बरसों के अथक साहित्य साधना का सार सुयोग्य लेखिका आदरणीय पूनम पाठक जी द्वारा हमें अनमोल काव्य संग्रह “माँ की बातें” एक समग्र पठनीय पुस्तक के रूप में बड़ी ही उदारता और तन्मयता से इंकलाब प्रकाशन मुम्बई के द्वारा उपलब्ध कराया है।
लौकिक माँ को समर्पित पुस्तक अलौकिक माँ शारदे की वंदना से आरम्भ होती हुई कुल 104 पृष्ठों में 115 वें सोपान पर लेखिका पश्चिम पर विराम लेती है। माँ जैसा सहज सरल, उत्पादक, व्यापक एवं स्नेही सम्बोधन समूचे
‘ब्राह्ममाण्ड में दूसरा नहीं हो सकता है। पुस्तक का सटीक सूक्ष्म शीर्षक नाम “माँ की बातें” अपनी विषय वस्तु अनुरुप सुसन्जित आवरण पृष्ठ के साथ निःसन्देह ही पुस्तक पूर्णता प्रदान करता है। उत्कृष्ट, प्रभावी, साम्यक एवं सरस पठनीय रचनाएं पाठकों के लिए अविरलता से पढ़ने हेतु प्रेरित करने में सक्षम हैं । लेखन वाक्य विन्यास शब्द सरलता एवं संक्षिप्त रचना-आकार में कवयित्री पूनम पाठक जी ने अपनी रचनाओं को सरल व सटीकता से अत्यंत गहरे भाव में लिपिबद्ध कर पाठक समयोपगी बना -दिया है। जो आपके साहित्य समर्पण, उपलब्धता, जनउपयोगिता के साथ-साथलेखन -कौशल की परिपक्वाता एवं काव्य सौन्दर्य को सहज रूप से ही प्रस्तुत करता है। यहाँ पुस्तक के किसी अंश को अधिक उल्लेखित करना मेरे लिए क्यों कर भेदकारी प्रतीत होता है फिरभी पाठ्य संकेत हेतु यहाँ कुछ आत्ममुग्धता प्रस्तुति आवश्यक जान पड़ा, जैसे-रचना 1 बन्दना में – दीन द्वाखियों का हे माँ दर्द लिखूँ सबको शिक्षा का अधिकार मिले।

आगे की रचना संख्या 9- ‘हो सके तो हृदय का धीर लिख, कलम तू न नययों का नीर लिख ।’
बहुत कुछ कहती है।
‘रचना 63 में – माँ को भी वसुन्धरा पर भगवान पूजने आए ।
जो सर्वदा सत्य है।
रचना 100 में-फटी चादर को छिपकर सीं लिया, रिश्ते बचाने को दुख छिपा लिया।
मूल्य भी आज समय को देखते हुए सही रखा गया है।अतः प्रस्तुत पुस्तक जनमानस के लिए उपयोगी अनुपम उपहार और काव्य प्रेमियों के लिए उत्तम काव्य धरोहर सिद्ध होगी, जिसके लिए पूनम पाठक जी बधाई की पात्र हैं।
मैं पुस्तक, लेखक, प्रकाशक । मुद्रक को अनेक साधुवाद शुभकामनाएं, बधाई के साथ सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है। मुझे विश्वास है ‘माँ की बातें ‘सच्ची सफलता प्राप्त करेगी। और साहित्य के माध्यम से सभी को लाभकारी भी होगी।
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chhattisgarhaaspaas
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