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ख्यातिलब्ध बांग्ला पत्रिका ‘मध्यबलय’ में प्रदीप भट्टाचार्य द्वारा लिखित प्रगतिशील हिंदी कविता ‘अंतहीन प्रतीक्षा’ का बांग्ला में अनुवाद प्रकाशित : बांग्ला में अनुवाद चर्चित कवि गोविंद पाल ने किया : ‘मध्यबलय’ के संपादक हैं बांग्ला-हिंदी के कवि दुलाल समाद्दार

‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक प्रदीप भट्टाचार्य पत्रकारिता के साथ-साथ कविता लेखन व साहित्यिकता में भी दक्षता रखते हैं. ‘मुक्तकंठ साहित्य समिति’ द्वारा मासिक बुलेटिन ‘मुक्तकंठ’ का भी संपादन कर रहे हैं. बांग्ला लिटिल पत्रिका ‘मध्यबलय’,’ बंगीय साहित्य संस्था’ के सौजन्य से विगत कई वर्षों से प्रकाशित हो रही है. ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार हैं. ‘मध्यबलय’ को बांग्लादेश और कोलकाता के कई प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्थाओं ने सम्मानित किया है.
▪️ कविता
• अंतहीन प्रतीक्षा
• प्रदीप भट्टाचार्य

👉 • प्रदीप भट्टाचार्य
मौसमी फूलों की
सुगबुगाती हुई सुर्ख क्यारी
जिस पर चांदनी
नर्म ऊँगलियाँ फेर रही है
बागीचे के पार
झाड़ियों में
आलस के पंख पसारे
दो स्वतंत्र पक्षी
टुपटुप बातें कर रहे हैं
एक प्राप्ति के बाद
दूसरी प्राप्ति के लिए
बेचैन
मेरे/
इर्द-गिर्द
निर्गन्ध/
उष्म क्षणों की रेखाएँ
गुजर रही है
और मैं-
एक बड़ी खुशी के लिए
अपने सामान्य क्षणों को
गिरवी रखकर
किसी अंतहीन प्रतीक्षा में
बैठा हूँ.
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• संपर्क-
• 94241 16987
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chhattisgarhaaspaas
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