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छत्तीसगढ़ दुर्ग : इस वर्ष 2024 का ‘जमुना प्रसाद कसार साहित्य सम्मान’ ख्यातिलब्ध साहित्यकार व व्यंग्यकार रवि श्रीवास्तव को दिया गया : दूसरे सत्र में ‘लव जिहाद’ का विमोचन भी हुआ.

👉 ‘जमुना प्रसाद कसार साहित्य सम्मान 2024’ : कसार परिवार द्वारा रवि श्रीवास्तव को प्रदान करते हुए
‘छत्तीसगढ़ आसपास’ [आईएम ए भवन दुर्ग] : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से दिया जाने वाला प्रतिष्ठित ‘जमुना प्रसाद कसार साहित्य सम्मान’ इस वर्ष देश के लब्धप्रतिष्ठित लेखक रवि श्रीवास्तव को एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया. ज्ञात हो कि स्वतंत्रता सेनानी, साहित्यकार एवं शिक्षाविद् स्व. जमुना प्रसाद कसार सम्मान फाउंडेशन की स्थापना वर्ष- 2017 को कसार परिवार की तरफ से उनके पुत्र अरुण कसार ने की थी. पहला सम्मान 2017 को डॉ.परदेशीराम वर्मा को दिया गया था. उसके बाद से यह सम्मान निरंतर किसी एक साहित्यकार को दिया जा रहा है. नंदकिशोर तिवारी [बिलासपुर] 2018, रमेश नैय्यर [रायपुर] 2019, चितरंजन कर [रायपुर] 2020, गिरीश पंकज [रायपुर] 2021, स्व. मुकुंद कौशल [दुर्ग] 2022 और जेआर सोनी [रायपुर] को 2023 को प्रदान किया गया था.


▪️ जमुना प्रसाद कसार साहित्य सम्मान फाउंडेशन

जमुना प्रसाद कसार स्वतंत्रता संग्राम सेनानी योद्धा के अलावा नामचीन लेखक भी रहे. वे एक शिक्षक थे. वे पुन्नालाल पदुमलाल बक्शी को अपना साहित्यिक गुरु मानते थे. जमुना प्रसाद कसार ने आजादी के सिपाही, शहीद वीरनारायण सिंह, पं.लखनलाल मिश्र, नरसिंह प्रसाद अग्रवाल के व्यक्तित्व-कृतित्व पर रचनाएँ समाज के समक्ष रखी. वे छंदबद्ध कविता के पक्ष धर रहे. जमुना प्रसाद कसार की अन्य प्रकाशित रचनाओं में कविता संग्रह ‘जीवन राग’, कहानियाँ ‘सन्नाटे का शोर’, ‘अंधों के मोहल्ले में’, ‘दर्पण की दुकान’, ‘कफन’ और ‘सरला ने कहा’. इसके अलावा ‘अक्षर’ उपन्यास एवं 18 अन्य पुस्तकें प्रकाशित हुई.
▪️ जमुना प्रसाद कसार साहित्य सम्मान
सम्मान समारोह के मुख्यअतिथि दुर्ग नगर निगम के महापौर धीरज बाकलीवाल थे.अध्यक्षता वरिष्ठ कथाकार गुलबीर सिंह भाटिया ने की और मुख्य वक्ता बलदाऊराम साहू थे.
संयोजक अरुण कसार और कसार परिवार की उपस्थिति में मंचासीन अतिथियों द्वारा रवि श्रीवास्तव को वर्ष 2024 का ‘जमुना प्रसाद कसार साहित्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया. सम्मान में नगद राशि, मोमेंटो, शॉल/श्रीफल, पुष्पगुच्छ दिया गया.
आयोजक अरुण कसार ने स्वागत भाषण देते हुए बोले कि पिताजी की स्मृतियों को अक्षुण बनाए रखने के लिए पिछले 8 वर्षों से सतत यह सम्मान समारोह आयोजित कर रहे हैं. यह आयोजन पिता के प्रति पुत्र की सद्भावना को रेखांकित करती है. सत्र का संचालन शाद बिलासपुरी और आभार व्यक्त कसार परिवार द्वारा किया गया.
महापौर धीरज बाकलीवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि जमुना प्रसाद कसार को जीवंत रखने के लिए आयोजक की प्रशंसा की. रवि श्रीवास्तव को इस वर्ष का सम्मान मिलने पर बधाई दी और दुर्ग शहर के सिकोला भाटा वार्ड का नाम ‘जमुना प्रसाद कसार वार्ड’ रखने की आश्वसन देते हुए बोले कि इस विषय को मेयर इन कौंसिल की बैठक में रखेंगे.
▪️ दूसरे सत्र में डॉ. संजय दानी के चौथे उपन्यास ‘लव जिहाद’ का विमोचन
इस सत्र के मुख्य अतिथि दुर्ग शहर के प्रथम नागरिक धीरज बाकलीवाल थे. मुख्य वक्ता प्रखर आलोचक प्रो. सियाराम शर्मा थे. रवि श्रीवास्तव और गुलबीर सिंह भाटिया भी मंचासीन रहे. इस सत्र का स्वागत भाषण डॉ. ममता दानी एवं संचालन ‘दुर्ग जिला हिंदी साहित्य समिति’ के उपाध्यक्ष शाद बिलासपुरी ने किया.

👉 ‘लव जिहाद’ विमोचन के अवसर पर [बाएँ से] शाद बिलासपुरी, डॉ. संजय दानी, प्रो. सियाराम शर्मा, धीरज बाकलीवाल, रवि श्रीवास्तव, गुलबीर सिंह भाटिया और अरुण कसार
लेखकीय उद्बोधन देते हुए डॉ. संजय दानी ने कहा कि इस कठिन विषय पर कुछ लिखना एक चुनौती थी. पर देश की सामाजिक ताना-बाना को केंद्र में रखते हुए जब मैंने कलम चलाई तो किताब के पन्ने तेजी से आगे बढ़ने लगे और दो महीने में उपन्यास की पांडुलिपि पूर्ण हो गई.
प्रो. सियाराम शर्मा ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर कुछ सार्थक बातें लिखना बड़ी हिम्मत की बात है. जब मैंने उपन्यास का शीर्षक देखा तो सोच में पड़ गया था कि ऐसे विषय पर अगर कुछ ऐसी बात नज़र आई तो जो हमारे सोसियल फेब्रिक पर चोट पहुंचा रही हो तो उसका विश्लेषण करना हर किसी के लिए दुर्भर होगा. यह उपन्यास मूलत: आपसी प्रेम और सौहार्द की बातें कर रहा है. इसमें कहीं भी ऐसी बात नहीं है जो किसी खास कौम को टार्गेट करती दिख रही हो. शर्मा जी ने उपन्यास की एक दो गलतियों को उजागर करते हुए ‘ लव जिहाद’ की खुले मन से तारीफ की. उन्होंने कहा कि डॉ. संजय दानी की लेखनी में उत्कृष्ट सृजन की अपार संभावनाएं हैं. रवि श्रीवास्तव और गुलबीर सिंह भाटिया ने भी अपने विचार रखे.
▪️ दोनों सत्र में बड़ी संख्या में लेखक, पत्रकार और बुद्धिजीवी उपस्थित थे. प्रमुख रूप से –
‘छत्तीसगढ़ प्रगतिशील लेखक संघ’ अध्यक्ष मंडल के सदस्य, कथाकार लोकबाबू, ‘प्रलेसं’ के राज्य महासचिव परमेश्वर वैष्णव, ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ ग्रुप के ग्रुप एडिटर प्रदीप भट्टाचार्य, कथाकारा डॉ. नलिनी श्रीवास्तव, संतोष झांझी, अंतरराष्ट्रीय लेखक रौनक जमाल, उद्योगपति कैलाश बरमे चा, डॉ. निर्वाण तिवारी, आशा झा, आलोक नारंग, अनिता करडेकर, नवेद रज़ा दुर्गवी, शायर मुमताज, विजय वर्तमान,ठाकुर दशरथसिंह भुवाल, अंजन कुमार कुशवाहा ‘अंजन’,सुशील यादव, एनएल मौर्य ‘प्रीतम’, हाजी रियाज खान गौहर,डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’,डॉ. बीना सिंह ‘रागी’, डॉ. नरेंद्र देवांगन, विद्या गुप्ता, संध्या श्रीवास्तव, शानू मोहनन,शिवमंगल सिंह सुमन, इस्माइल आजाद, हाजी शेख ताहिर, प्रदीप पांडेय, शमशीर शिवानी, अब्दुल सलाम कौसर, ओमप्रकाश जायसवाल, डॉ. प्रशांत कानस्कर, नुरुस्सबा खान, प्रदीप अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल, रेखा अग्रवाल, भगवती गुप्ता, शोभा गुप्ता, वासुकी प्रसाद उन्मत, बुद्धदेव शर्मा, डॉ. अजय दानी, सुनीता दानी के अलावा कसार एवं दानी परिवार के शुभचिंतक,’दुर्ग जिला हिंदी साहित्य समिति’ के अनेक सदस्यों के साथ-साथ शहर के अनेक गणमान्य लोगों ने शिरकत की.
सम्मान समारोह और विमोचन कार्यक्रम का आभार व्यक्त कसार एवं दानी परिवार ने किया.
[ • रपट, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ : दुर्ग जिला प्रमुख ब्यूरो ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ ]
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