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व्यंग्य : राजशेखर चौबे

👉 राजशेखर चौबे
▪️ लज्ज़त – ए-लुत्फ़-ए- व्हाट्सएप
– राजशेखर चौबे

कुछ वकीलों को ज्यूडिशरी की चिंता सता रही है । वे माननीय न्यायाधीशों को सलाह दे रहे हैं कि किसी के दबाव में नहीं आना । क्या ऐसा पत्र किसी के दबाव में और किसी पर दबाव बनाने के लिए लिखा गया है ? इस बारे में वही बेहतर बता सकते हैं । वैसे वे बिना फीस के कुछ बताते भी तो नहीं हैं । जैसी कि आशंका थी , उनकी टिप्पणी भी तुरंत आ गई।
आज भी न्यायपालिका पर हमारा भरोसा कायम है। किसी से झगड़ा होने पर यही कहा जाता है – ” आई विल सी यू इन द कोर्ट ” । वकील कह सकते हैं – “आई विल शो यू इन द कोर्ट ” । वही वकील आज न्यायपालिका को मशविरा दे रहे हैं, यह भी एक विडम्बना है।
जेल हो या बेल, जाना वकील के पास ही पड़ेगा । कहा गया है बेल नियम होना चाहिए और जेल अपवाद परंतु अब ऐसा नहीं है । बेल का आसान रास्ता बैल बुद्धि भी जानते हैं और वह है सरकारी गवाह बनना। क्या सरकारी गवाह सरकारी आदमी हो जाता है ? पहले कहा जाता था भले ही सौ अपराधी छूट जाएं परंतु एक बेगुनाह को सजा नहीं होना चाहिए । अब ऐसा नहीं है अनलॉफुल एक्टिविटी प्रीवेंशन एक्ट ( UAPA ) और प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लांड्रिंग एक्ट ( PMLA ) के कानून इसके बेहतरीन उदाहरण हैं। मुलजिम को अपनी बेगुनाही स्वयं साबित करनी पड़ती है भले ही उसे उसका गुनाह न बताया गया हो ।लोकतंत्र की दुहाई देने वाले और सत्ता पक्ष द्वारा प्रताड़ित नेता इन्हीं कानूनों द्वारा भविष्य में प्रताड़ना देने की बात करते हैं । पता नहीं उनकी यह इच्छा कभी पूरी होगी भी या नहीं ? वैसे व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट उनकी राह में रोड़ा हैं ।व्हाट्सएप पर मैसेज फॉरवर्ड करने का अलग ही मजा है।
लज्ज़त-ए – लुत्फ़ -ए – गुनाह अर्थात गुनाह करने का मजा ।एक विचारक का मानना है गुनाह करने का एक अलग मजा है फिर भी संसार में अच्छाई सच्चाई और ईमानदारी का हमेशा बोलबाला रहेगा और उसे खत्म नहीं किया जा सकेगा । आज देश और पूरे विश्व में जो हालात हैं उसमें केवल पहली बात ही सही लगती है । आज प्रायः लोग गुनाहों का मजा लेने लगे हैं । लोग सोशल मीडिया में व्हाट्सएप में मजे लेते हैं और दंगे हो जाते हैं । आज व्हाट्सएप फेक न्यूज़ और अफवाह फैलाने का एक सशक्त माध्यम बन गया है । अपराध या गुनाह का मजा ही कुछ और है । अब हम भी गुनगुना सकते हैं –
” बस यही अपराध हर बार करता हूँ ,
आदमी हूँ आदमी से नफरत करता हूँ ,
फेक न्यूज़ फॉरवर्ड करता हूँ ” ।
अब
लज्ज़त-ए – लुत्फ़- ए – गुनाह की जगह
लज्ज़त – ए – लुत्फ़ – ए – व्हाट्सएप
होना चाहिए।
अधिकांश लोग अपने मन माफ़िक खबरों को सही मानकर उसे चारों ओर फैलाते हैं । वे बंधुआ मजदूरों की भांति दिन-रात जुटे रहते हैं । वे व्हाट्सएप के गुलाम बन कर रह गए हैं । हम सैकड़ों वर्षों तक गुलाम रहे और गुलामी की मानसिकता को त्यागना आसान नहीं है । स्वतंत्र देश के स्वतंत्र नागरिक होना आसान नहीं है। भविष्य में ऐसा नेता भी चुनाव जीत सकता है , जो कहे-
” तुम मुझे वोट दो मैं तुम्हें गुलामी दूंगा “
” भविष्य में ऐसा नेता भी चुनाव जीत सकता है, जो कहे-
‘ तुम मुझे वोट दो मैं तुम्हें गुलामी दूंगा “
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[ • देश के ख्यातिलब्ध व्यंग्यकार राजशेखर चौबे रायपुर छत्तीसगढ़ से हैं. •’छत्तीसगढ़ आसपास’ प्रिंट राष्ट्रीय मासिक पत्रिका में जुलाई- 2024 अंक से राजशेखर चौबे का नया स्तम्भ ‘मास्टर स्ट्रोक’ प्रारंभ किया गया है. • 2 जून 1959 को जन्में चौबे जी बीएससी [गणित], एमए [राजनीति शास्त्र] और एलएलबी की शिक्षा लेने के बाद भारतीय राजस्व सेवा IRS सेंट्रल टैक्स एवं GST में सहायक आयुक्त के पद पर रहते हुए सेवानिवृत हुए. • चौबे जी की प्रकाशित कृति है- ‘आजादी का जश्न’, ‘स्ट्राइक 2.0’, ‘निठल्लों का औजार – सोशल मीडिया वर्ष 2021’ और ‘संतरा गणतंत्र’. • राजशेखर चौबे देश के अनेक दैनिक अखबारों एवं राष्ट्रीय स्तर के पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित हो रहे हैं. • ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के पाठकों के लिए चौबे जी का नया स्तम्भ ‘मास्टर स्ट्रोक’ जुलाई- 2024 से प्रारंभ हो चुका है.- संपादक]
• संपर्क –
• 94255 96643
• 94242 27159
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chhattisgarhaaspaas
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