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रुखसत ए यार का मंज़र भी क्या मंज़र था, हमने ख़ुद को ख़ुद से बिछड़ते देखा : स्मृति शेष : यादें स्व. ओमप्रकाश शर्मा

कुछ ही दिनों की मुलाकात
हुई थी हल्की- फुल्की बात
बुलाये थे घर अपने मिलने
दबा रह गया मन में ज़ज्बात
और वो चले गए…
सुनकर उनका हृदयाघात
जो हुई थी पिछली रात
रह गया था मैं ठगा सा
मन को मेरे लगा आघात
और वो चले गए…
मैं जाते-जाते बस रह गया
मेरा ख्याल समझो ढह गया
सुनकर ये दुःख की बात
कि, जीवन से खा गए मात
और वो चले गए…
जब वो अंतिम यात्रा में चले
तब शमशान हम मिलने गये
चिता पर चिरनिंद्रा में थे लीन
माहौल था काफी गमगीन
फिर दोबारा वो नहीं जगे
और वो चले गए…
ओमप्रकाश की जली ज्वाला
पचलकड़ियाँ श्रद्धा से डाला
ओमप्रकाश के जगह अब
ओमशांति कह लौट आया
और वो चले गए…
एक सुविख्यात साहित्यकार
सुखी जिनका घर-परिवार
रहे बहुत ही कुशल अधिवक्ता
रखे सबसे अच्छा व्यवहार
और वो चले गए…
वहाँ से करता है तुम्हें फुर्सत
तुम्हारी है अब वहाँ जरूरत
ईश्वर ने उन्हें झट-पट बुलाया
और वो चले गए…
रहा उनका बहुत बड़ा अवदान
इस दुनिया में सदैव भगवान
असीम शांति उन्हें प्रदान करें
अपने चरणों में देकर स्थान
और वो आपके पास चले गए…
• ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल
जी हाँ, ओमप्रकाश शर्मा चले गए… सबको रुलाकर. अभी उम्र ही क्या थी. 15 अगस्त को सुबह- सुबह गोविंद पाल का मैसेज आया कि ओमप्रकाश शर्मा नहीं रहे… 27 जुलाई को मैं{ प्रदीप भट्टाचार्य } और प्रकाशचंद्र मण्डल,डॉ. दीनदयाल साहू द्वारा आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम में गए थे, वहीं मुझे बैचनी महसूस होने लगी. मैं और प्रकाश घर आ गए. फिर 1 अगस्त को मैं और मेरी पत्नी श्रीमती शेफाली भट्टाचार्य प्लस हॉस्पिटल में डॉ. की सलाह लेने गए. ECG और ECO के बाद पता चला कि मुझे 27 जुलाई को ही हार्ट अटैक आ चुका था. ईश्वर ने मुझे बचा लिया. आखिरकार 2-3 अगस्त को हार्ट के सुपर स्पेशलिस्ट डॉ. जयराम अय्यर ने मेरा सफलतापूर्वक Angiography, Angioplasty किया. मैंने 4 दिन का सफर कैसे तय किया, वो पूरी वृतान्त ‘ छत्तीसगढ़ आसपास’ के आगामी अंक में मैं अपने शुभचिंतकों के लिए लिख रहा हूँ. जिंदगी के 4 दिन डॉ. जयराम अय्यर के साथ प्लस हॉस्पिटल में
14 अगस्त की रात को ओम प्रकाश शर्मा हम सबको छोड़कर इस दुनिया से अलविदा हो गए. ओम भाई का नश्वर शरीर भले ही हमारे साथ न हो, मगर उनकी आत्मा हम मित्रों के दिलों में सदा- सदा बनी रहेगी. ओम भाई आप हमारे लिए जिंदा हैं और रहेंगे.
ओमप्रकाश शर्मा ‘मुक्तकंठ साहित्य समिति’ के संस्थापक सदस्य और महासचिव के पद पर रहे. ‘अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद्’ के छत्तीसगढ़ राज्य के अध्यक्ष रहे. दुर्ग बार एसोसिएशन के पूर्व उप सचिव, कुशल अधिवक्ता, कवि हृदय और समाजसेवी के रूप में उनकी एक पहचान रही. उनकी रिकत्तत्ता को भर पाना मुश्किल है. यही प्रकृति का नियम है. ईश्वर के आगे हम सब नतमस्तक हैं. ओम भाई आप हमेशा हमारे दिलों में प्रतिबिंब की तरह रहोगे.
ओमप्रकाश शर्मा को स्मरण करते हुए ‘मुक्तकंठ साहित्य समिति’ और ‘बंगीय साहित्य संस्था’ ने ‘यादें स्व. ओमप्रकाश शर्मा’ श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए : आयोजन की कुछ झलकियाँ-



▪️ ‘बंगीय साहित्य संस्था’ द्वारा ओमप्रकाश शर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए…

▪️ ‘बंगीय साहित्य संस्था’ द्वारा ओमप्रकाश भाई को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आलोक कुमार चंदा, प्रकाशचंद्र मण्डल और वीरेंद्रनाथ सरकार

▪️ ‘मुक्तकंठ साहित्य समिति’ द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि कार्य क्रम में [बाएँ से] रजनीकांत श्रीवास्तव, एन एल मौर्य ‘प्रीतम’, नरेंद्र कुमार सिक्केवाल, डॉ. महेशचंद्र शर्मा, डॉ. परदेशीराम वर्मा, तुंगभद्र राठौर और अतनु बनर्जी

▪️ ‘मुक्तकंठ साहित्य समिति’ द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में डॉ. बीना सिंह ‘रागी’, नरेंद्र कुमार सिक्केवाल, ब्रजेश मलिक और उमेश दीक्षित

▪️ ‘मुक्तकंठ’ द्वारा आयोजित यादें स्व. ओमप्रकाश शर्मा में सुबीर रॉय, दुलाल समाद्दार और पल्लव चटर्जी

▪️ ‘मुक्तकंठ’ द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में काव्यात्मक प्रस्तुति देते हुए प्रकाशचंद्र मण्डल, ब्रजेश मलिक और आलोक कुमार चंदा

▪️ श्रद्धांजलि सभा में उपस्थितजन
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