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- स्मृति शेष : 5 दशकों तक वाम पंथी राजनीति की धुरी रहे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी [मार्क्स वादी] के महासचिव सीताराम येचुरी [72 वर्ष] का अखिल भारतीय आयुविज्ञान संस्थान [एम्स] में बीते कल निधन : पार्थिव शरीर ‘एम्स’ को दान : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया
स्मृति शेष : 5 दशकों तक वाम पंथी राजनीति की धुरी रहे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी [मार्क्स वादी] के महासचिव सीताराम येचुरी [72 वर्ष] का अखिल भारतीय आयुविज्ञान संस्थान [एम्स] में बीते कल निधन : पार्थिव शरीर ‘एम्स’ को दान : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया

छत्तीसगढ़ आसपास [देश] :
वामपंथी राजनीति की धुरी रहे ‘ माकपा’ के महासचिव सीताराम येचुरी का 12 सितम्बर को निधन हो गया. निमोनिया की शिकायत होने पर वे 19 अगस्त से दिल्ली के ‘एम्स’ पर भर्ती थे. उनकी हालत पिछले दिनों से गंभीर बनी हुई थी. सीताराम येचुरी को कृत्रिम श्वसन प्रणाली पर थे.

सीताराम येचुरी 1974 में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया [एसएफआई] और 1975 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी [ माक् र्सवादी] से जुड़े. 1984 में सीपी आईएम की केंद्रीय समिति के लिए चयनित हुए. 1992 में 14 वीं कांग्रेस में पोलित ब्यूरो के लिए चुने गए. 2005 में पहली बार राज्यसभा सदस्य बने. 2015,2018 के बाद 2022 में लगातार तीसरी बार सीताराम येचुरी ‘माकपा’ के महासचिव बने.
सीताराम येचुरी, आपातकाल में जेल जाने के बाद ही राजनीतिक जीवन की शुरूआत की. वे हमेशा वामपंथ की राजनीति करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर उभर कर आए. वे 1977-78 जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष रहे. बाद में येचुरी जी माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की छात्र इकाई स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सचिव बनाए गए थे.
सीताराम येचुरी का असमय चले जाना न केवल कम्युनिस्ट राजनीति नहीं,भारतीय लोकतंत्र के लिए अपूरणीय क्षति है.
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chhattisgarhaaspaas
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