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‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में साहित्य सभा- 345 का आयोजन : बांग्ला भाषा संस्कृति पर विचार-विमर्श, गायन और कविता पाठ

👉 {बैठे हुए नीचे, बाएँ से}
दुलाल समाद्दार, अनीता मजूमदार, बीना साहा, स्मृति दत्त और मीता दास.
👉 {उपर खड़े में, बाएँ से}
पल्लव चटर्जी, बाबलु सरकार, वीरेंद्रनाथ सरकार, प्रकाशचंद्र मण्डल, पं. बासुदेव भट्टाचार्य शास्त्री, सुभाष मजूमदार, बृजेश मल्लिक और प्रदीप भट्टाचार्य.
‘छत्तीसगढ़ आसपास’ [मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर : निवास- वीरेंद्रनाथ सरकार]
14 जनवरी 2025 मकर संक्रांति के दिन ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘साहित्य सभा-345’ का आयोजन कवि वीरेंद्रनाथ सरकार के निवास पर सम्पन्न हुई. साहित्यिक आसोर [सभा] की अध्यक्षता ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति, बांग्ला की लब्धप्रतिष्ठित लेखिका श्रीमती स्मृति दत्त ने की.
इस सभा में उपस्थित हुए-
स्मृति दत्त, मीता दास, दुलाल समाद्दार, प्रकाशचंद्र मण्डल, सोमाली शर्मा, पल्लव चटर्जी, वीरेंद्रनाथ सरकार, प्रदीप भट्टाचार्य, बृजेश मल्लिक, पं. बासुदेव भट्टाचार्य शास्त्री, बीना साहा, बाबुल सरकार, अनीता वीरेंद्रनाथ सरकार, अनीता मजूमदार, सुभाष मजूमदार, दिवेंद्रनाथ सरकार.
सभा के प्रारंभ में उपस्थित सदस्यों ने माँ सरस्वती पूजा अर्चना की और बीना साहा ने माँ सरस्वती की सस्वर गायन सुर में किया. सभापतित्व कर रही स्मृति दत्त ने ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की स्थापना से लेकर अब तक साहित्यिक गतिविधियों की विवरिणी प्रस्तुत करते हुए कही कि ऐसे आयोजन के माध्यम से हम बांग्ला भाषा को कुछ हद तक बचा पाने में सफल हो रहे हैं. हमको ऐसे आसोर [सभा] में बांग्ला भाषा में ही चर्चा करनी चाहिए और काव्य पाठ भी सारे सदस्य बांग्ला में ही कविता पाठ करें. स्वागत व्यक्तव्य वीरेंद्रनाथ सरकार ने सभी सदस्यों का शब्दमय स्वागत देते हुए बोले कि मेरे निवास में यह सभा का आयोजन कर मुझे धन्य कर दिए. ऐसे साहित्यिक आयोजन प्रतिमाह हमारे किसी सदस्यों के निवास में होते रहना चाहिए ताकि साहित्यिक विचार-विमर्श की कड़ी बनी रहे. सोमाली शर्मा ने इसका स्वागत करते हुए आगामी माह {फरवरी-2025} में अपने निवास में करने की सहमति दी, जिसका सभी सदस्यों ने स्वागत किया.
अंत में गायन और कविता पाठ हुआ. संचालन ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के उप सचिव प्रकाशचंद्र मण्डल ने किया.
सभा-345 में कई विषयों में कविता पाठ हुआ. पौष मकर संक्रांति/विवेकानंद जयंती और सम साम्यिकी जैसे- धान/ईश्वर/बांग्ला देश/चाँद/लौलिक-अलौलिक/कब्रिस्तान और अनेक…
‘बंगीय साहित्य संस्था’ : सभा-345 की कुछ झलकियाँ-

• स्मृति दत्त सभापतित्व उद्बोधन देते हुए…

• सोमाली शर्मा कविता पाठ करती हुई…

• अनिता वीरेंद्रनाथ सरकार गायन प्रस्तुति करते हुए…

• प्रकाशचंद्र मण्डल दीप प्रज्ज्वलित करते हुए…

• बांग्ला देश चट्टोग्राम से प्रकाशित ‘पहाड़’ पत्रिका में प्रकाशित अनामिका चक्रवर्ती द्वारा रचित हिंदी कविता ‘धान’ का बांग्ला में अनुवाद कविता को मीता दास ने पढ़कर सुनाया. अनुवाद मीता दास ने ही की है.

• दुलाल समाद्दार ने ‘कथा किछु किछु… /ऐई सोब बोई पत्रों.. और ‘श्रीति’ शीर्षक से काव्य पाठ किया.

{बाएँ से } वीरेंद्रनाथ सरकार, सोमाली शर्मा और मीता दास.

{बाएँ से} पं.बासुदेव भट्टाचार्य शास्त्री, प्रदीप भट्टाचार्य और पल्लव चटर्जी.

{बाएँ से} बीना साहा, स्मृति दत्त और पं. बासुदेव भट्टाचार्य शास्त्री.

• उपस्थित बंगीय सदस्य

• उपस्थित बंगीय सदस्य
आभार व्यक्त,सभा-345 के संयोजक ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के वरिष्ठ सदस्य वीरेंद्रनाथ सरकार ने किया.
[ • रपट, प्रदीप भट्टाचार्य, फोटो क्लिक पल्लव चटर्जी एवं दुलाल समाद्दार ]
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