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हज़लकार रामबरन कोरी ‘कशिश’ को नम आँखों से दी गई अंतिम विदाई : भिलाई के रामनगर मुक्तिधाम में सुपुर्देखाक किया गया
1 अप्रैल 2025 सुबह-सुबह व्हाट्सएप पर एक नज़र गई. डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ ने मैसेज में लिखा कि रामबरन कोरी ‘कशिश’ नहीं रहे. मैं स्तब्ध रह गया. एक दिन पहले ही मैं पंजाब से आया था. मैंने तुरन्त ‘कशिश’ जी के पुत्र संदीप कोरी से संपर्क किया. संदीप ने बताया कि रात को भोजन किए और उनकी तबियत कुछ खराब लगने लगी. हमने तुरन्त ‘स्पर्श हॉस्पिटल’ ले गए, मगर डॉक्टरों के अथक प्रयास के बाद भी पापा को बचाया नहीं जा सका. सुबह 5.00 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली.

रामनगर मुक्तिधाम मेें अंतिम विदाई
रामबरन कोरी ‘कशिश’ लंबे समय से बीमार चल रहे थे. फिर भी साहित्यिक आयोजनों में उनकी भागीदारी बढ़-चढ़ कर होती थी, लिखने का जज्बा अंतिम समय तक बना रहा. भिलाई के कई साहित्यिक समितियों से जुड़े रहे. मिलनसार स्वभाव के धनी ‘कशिश’ की अंतिम यात्रा में खेल, साहित्य,नेता, प्रेस और सामाजिक अनेक लोगों का जन समूह उमड़ पड़ा. 71 वर्षीय राम बरन कोरी ‘कशिश’ डाक विभाग से सेवानिवृत्त हुए थे. साहित्यकार ‘कशिश’ हज़लकार के रूप में छत्तीसगढ़ ही नहीं सम्पूर्ण देश में अपनी मंस्थत भूमिका निभाई. खेल से भी जुड़े रहे. फुटबॉल, बॉलीबॉल के रेफरी रहे. पत्रकारिता में भी उनकी रुचि रही.’छत्तीसगढ़ आसपास’ पत्रिका से जुड़े और संपादक समूह में संचालक बनकर पत्रिका को ऊँचाई दिया.
रामबरन कोरी ‘कशिश’ के दो भाई थे. रामकुमार और रामाधार कोरी. वे अपने पीछे पत्नी ललिता, पुत्र संदीप और बेटी शिल्पा प्रसाद को छोड़ गए. ‘कशिश’ जी के पुत्रवधु भी शासकीय अस्पताल में डॉक्टर है.
रामबरन कोरी ‘कशिश’ ने हज़ल की बानगी को हमेशा अपने लिए ही इस्तेमाल किया.
‘औरों को जाने क्या-क्या तोहफ़ा दिया गया/हम थे गरीब, हमको तो टरका दिया गया/सब लोग पी रहे थे, अंगूर की शराब/मुझको तो ठररा दे के बहला दिया गया’ – ‘कशिश’
मैंने एक आयोजन में ‘कशिश’ को समर्पित किया था, उनके जुनून और बीमारी के बाद भी जज्बे को देखकर-
‘मैं हर वक़्त को त्यौहार बना लेता हूँ/मैं हर नफ़रत को प्यार बना लेता हूँ/भय नहीं मौत का हमको जमाने वालों/मैं मौत को भी जीवन का आधार बना लेता हूँ’
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‘तृप्ति जीवन का सुनो अंतिम चरण है/राह पर गतिहीन होना ही मरण है/तुम मुझे काली निशा कह लो भले ही/किंतु मुझ में ही सुबह का जागरण है’
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‘मैं पतझड़ की नहीं, बहारों की बात करता हूँ/मैं डोली की नहीं कहारों की बात करता हूँ/मेरी उल्फ़त का परिणाम जो भी हो/मैं एक की नहीं, हज़ारों की बात करता हूँ’
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▪️ विनम्र विनम्रता से श्रद्धांजलि अर्पित-

भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव, भिलाई प्रेस क्लब के अध्यक्ष सूर्या राव, ‘छत्तीसगढ़ प्रेस कौंसिल’ के राज्य महासचिव व ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक प्रदीप भट्टाचार्य, साहित्यिक चिंतक व समाजसेवी कैलाश बरमेचा जैन, कथाकार लोकबाबू, छत्तीसगढ़ जनवादी लेखक संघ’ के राज्य अध्यक्ष एवं ‘अगासदिया’ के संपादक, कथाकार डॉ. परदेशीराम वर्मा, व्यंग्यकार विनोद साव, ‘छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य सम्मेलन’ के अध्यक्ष रवि श्रीवास्तव, कथाकारा डॉ. नलिनी श्रीवास्तव, संतोष झांझी, आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा,’छत्तीसगढ़ प्रगतिशील लेखक संघ’ के राज्य महासचिव परमेश्वर वैष्णव,प्रो. सियाराम शर्मा,अंतर्राष्ट्रीय शायर मुमताज, डॉ. रौनक जमाल और डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’
‘मुक्तकंठ साहित्य समिति’ के अध्यक्ष गोविंद पाल, महासचिव नरेंद्र कुमार सिक्केवाल, प्रकाशचंद्र मण्डल, रविंद्र नाथ देबनाथ, वीरेंद्रनाथ सरकार,पल्लव चटर्जी,’मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार और आलोक कुमार चंदा.
विनोद नायर, श्रीराम विनोद, डी. साजी कुमार, ख्वाजा अहमद, अकरम खान, निर्मल सिंह, राजेंद्र राय, राजेंद्र नाग, सुशांत डे, नईमुद्दीन, हेमप्रकाश नायक और राजेंद्र कुमार पाण्डेय.
रजनीकांत श्रीवास्तव, सतीश चौहान, ओमप्रकाश जायसवाल, नीलम जायसवाल, डॉ. संजय दानी, मो. अबू तारिक, शिवमंगल सिंह, यूसुफ सागर, भुवनलाल सोरी, शेख अफजल निजाम राही, आलोक नारंग, नवेद रजा दुर्गवी, त्रयंबक राव साटकर, मो. इस्माइल खान, डॉ. इसराइल बेग शाद बिलासपुरी, ओमवीर करन, शकील अहमद सिद्दीकी, सुरेश कुमार बंछोर, बलराम चंद्राकर, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’ और डॉ. बीना सिंह रागी.
‘अभिभाषक साहित्य समिति’ के अध्यक्ष एस आर यादव, समीर त्रिपाठी, ‘साहित्य सृजन परिषद्’ के अध्यक्ष एन एल मौर्य ‘प्रीतम’, त्रिलोकीनाथ कुशवाहा, मो. शाही रियाज खान गौहर, डॉ. दीनदयाल साहू, डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय, इंद्रजीत दादर निशाचर,फरीदा शाहीन और नूरस्सबा खान ‘सबा’.
नीता कंबोज ‘शीरी’, आशा झा, विद्या गुप्ता, संध्या श्रीवास्तव, अनुराधा बख्शी, सुचित्रा शर्मा, शुचि भवि, माला सिंह, प्रीति सरु, सोनिया सोनी, मधु तिवारी, मिताली वर्मा,संध्या जैन, नभ नीर हंस, सिरिल साइमन,राजाराम रसिक, किशोर तिवारी, डॉ. साकेत रंजन प्रवीर, गजराज दास महंत, मीता दास, मनोरंजन दास और सुरेश वाहने.
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शत् शत् नमन
🕉 शांति
[ • प्रस्तावना प्रदीप भट्टाचार्य और रिपोर्ट डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ ]
🕉 शांति 🕉 शांति 🕉 शांति
chhattisgarhaaspaas
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