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मई दिवस पर विशेष : अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष संदेश : इंसान का इंसान से हो भाईचारा, यही पैगाम हमारा – गणेश कछवाहा

प्रिय साथियों,
अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस की क्रांतिकारी शुभकामनाएं। शिकागो के अमर शहीदों को असंख्य लाल सलाम।जिनके संघर्ष,त्याग,और शहादत के कारण आठ घंटे काम का अधिकार हम श्रमिक,मेहनत कश और सर्वहारा वर्गों ने प्राप्त किया है।जिस पर अब हमले हो रहे हैं।इसे सुरक्षित रखने के लिए लगातार जागरूक रहने की जिम्मेदारी हम सब की।
सबसे पहले हम पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।आतंकवादी हमले में निर्दोष मृत पर्यटकों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त करते हैं।घायलों के अतिशीघ्र स्वास्थ लाभ की कामना करते हैं। भारत सरकार से अपराधियों के प्रति कड़ी से कड़ी कार्यवाही करने की मांग करते हैं। और देश में अमन चैन सदभाव भाईचारा और राष्ट्रीय एकता अखंडता को और अधिक मजबूती के साथ बनाएं रखने की अपील करते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस मनाने की शुरुआत 01मई 1886 से हुई। जब अमेरिका की मज़दूर यूनियनों नें काम का समय 08 घंटे से अधिक न रखे जाने के लिए हड़ताल की थी। श्रमिको पर गोलीबारी की गई। श्रमिको ने हार नहीं मानी ,खून से लथपथ हो लाल कपड़े को लहराते हुए लाल सलाम , इंकलाब ज़िंदाबाद का नारा लगाते हुए अंतिम सांस तक लड़ते रहे । वही खून से लथपथ कपड़े से लाल रंग का झंडा मजदूरों की क्रांति ,साहस और संघर्ष का प्रतीक बना।
वर्तमान में भारत और अन्य देशों में श्रमिकों के 08 घण्टे काम करने से संबंधित नियम लागू है। अंतरराष्ट्रीय श्रमिक आंदोलन, समाजवादियों, साम्यवादियों तथा जागरूक जनवादी , प्रगतिशील श्रमिक संगठनों व सर्वहारा वर्गों द्वारा यह दिवस ऐतिहासिक तौर पर अंतरराष्ट्रीय मजदूरों की एकजुटता के साथ उन शहीदों की शहादत की याद में श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए एक समृद्ध,बेहतर , शांति ,सदभाव और सुंदर दुनिया के निर्माण के संकल्प के साथ मनाया जाता है।
वर्तमान दौर में भारत में मई दिवस 2025 का काफी महत्व है। देश मे बेरोजगारी , मंहगाई, भुखमरी, गरीबी आजादी के बाद सबसे चरम सीमा पर पहुंच कर गहरे संकट से गुजर रही है।अर्थव्यवस्था चरमरा सी गई है।लोकतंत्र,संविधान ,इतिहास, संस्कृति,वैज्ञानिक मानव चेतना और सभ्यता पर सुनियोजित आक्रमण हो रहे हैं। देश की आत्मनिर्भरता के बुनियादी ढांचे जिसे भारत का गौरव व सम्मान माना जाता है, सार्वजनिक उपक्रम , राष्ट्रीय संस्थानों और राष्ट्रीय संपदाओ को बर्बाद कर निजी पूंजीपतियों को कौड़ी के दाम बेचा जा रहा है।भारत की प्राचीन संस्कृति,सभ्यता और मान्यताओं “अतिथि देव भव धार्मिक सद्भावना ,भाईचारा और एकता अखंडता ” को चोंट पहुंचाने का दुष्प्रयास किया जा रहा है। देश चिंतित है।यह सवाल भी अहम है कि – जब सभी धर्म ग्रंथों,गुरुओं, महात्माओं,साधु ,सूफी संतों ,फकीरों, ऋषि मुनियों ने “प्रेम,करुणा,दया,स्नेह,प्यार,अहिंसा और ‘पर हित परम धर्म ‘ का ज्ञान सिखाया तो फिर ये हिंसा, घृणा,नफरत और द्वेष क्यों –?” सबसे ज्यादा खतरा इंसानियत पर मंडरा रहा है। इंसानियत मानवता को बचाने की जरूरत है।
गरीबों और अमीरों के बीच की खाई गहरी और गहरी हो रही है। आंकड़े बताते हैं कि देश की 90% संपदा पर 01% लोगों का कब्जा है। देश गंभीर जटिल परिस्थितियों से गुजर रहा है। समाज शास्त्रियों की यह स्पष्ट मानना है कि जब तक भूखा इंसान रहेगा ,धरती पर तूफान रहेगा।। ऐसे में प्रत्येक नागरिकों की जिम्मेदारी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।
राजनीति से नहीं राजनेताओं से विश्वास उठता जा रहा है।वायदों और विश्वासों की जगह जुमले बाजी ने ले लिया है।श्रमिकों ,मजदूरों, किसानों व सर्वहारा वर्ग को उनके अपने ही हाल पर छोड़ दिया गया है।महिलाओं के सशक्तिकरण पर अनुत्तरित कई सवाल खड़े हो रहे हैं।लोकसभा में 33% महिला आरक्षण विधेयक पर मौन होना और महिलाओं पर बढ़ते हिंसा के आंकड़े बहुत गंभीर प्रश्न उत्पन्न करते हैं। सब कुछ बाजार के हवाले कर दिया गया है। शिक्षा,चिकित्सा, कला, संस्कृति, सभ्यता, रिश्ते, भावनाएं यहां तक की मनुष्य को भी । देश की परिसंपदा को एक एक कर बेचा जा रहा है। कलम के नुकीले हिस्से को तोड़ा जा रहा है।कला, संस्कृति, नाटक, सिनेमा, कहानी, कविता, गीत और इतिहास पर पहरेदारी की जा रही है,उनकी रचनात्मक अभिव्यक्ति को कुचलने का दुष्प्रयास किया जा रहा है। चारों तरफ नफरत, हिंसा,घृणा, द्वेष सांप्रदायिकता का ज़हर फैलाया जा रहा है। ऐसे हालात में ट्रेड यूनियन सहित आवाम के हर वर्ग की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
अब केवल काम के 08 घंटे भर को बचाने का सवाल नहीं है सबसे बड़ा सवाल है – “इंसानियत,भाईचारा, संस्कृति,सभ्यता,संविधान , लोकतंत्र और देश को बचाने का।” ऐसी परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस एक मई को शपथ व संकल्प लेने का दिवस है कि – हम सब मिलकर “एक समृद्ध,बेहतर , खुशहाल,अमन -चैन , शांति ,सदभाव और सुंदर हँसमुख दुनिया के निर्माण करने में एकजुट हों। अपना योगदान दें।और आवाज़ बुलंद करें दुनिया के मजदूर एक हो ”
*इंसान का इंसान से हो भाई चारा यही पैगाम हमारा।।*इस संदेश को जन जन तक पहुंचाने की जरूरत है।
इंकलाब ज़िंदाबाद,शिकागो के अमर शहीदों को लाल सलाम, दुनिया के मज़दूर एक हो।
क्रांतिकारी अभिवादन सहित
• गणेश कछवाहा
• ट्रेड यूनियन काउंसिल
[ छत्तीसगढ़ रायगढ़ ]
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