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- लब्धप्रतिष्ठित कवि अरुण कुमार निगम की ग़ज़ल विधा की पहली मार्गदर्शन कृति ‘ग़ज़ल के ग़’ का विमोचन ‘छंद के छ-ऑनलाइन गुरुकुल’ के नोवें स्थापना दिवस समारोह में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने किया
लब्धप्रतिष्ठित कवि अरुण कुमार निगम की ग़ज़ल विधा की पहली मार्गदर्शन कृति ‘ग़ज़ल के ग़’ का विमोचन ‘छंद के छ-ऑनलाइन गुरुकुल’ के नोवें स्थापना दिवस समारोह में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने किया

▪️ वृंदावन सभागार में विमोचन के अवसर पर अतिथियों के साथ लेखक व कवि अरुण कुमार निगम
‘छत्तीसगढ़ आसपास’ [रायपुर]
दुर्ग नगर के कवि अरुण कुमार निगम ने छत्तीसगढ़ी भाषा में अपनी बहु-चर्चित किताब “छन्द के छ” के बाद छत्तीसगढ़ी भाषा में ग़ज़ल विधा की पहली मार्गदर्शिका “ग़ज़ल के ग़” प्रकाशित करवाई है जिसका विमोचन सचिव, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग डॉ. अभिलाषा बेहार के मुख्य आतिथ्य, शिक्षाविद डॉ. सुधीर शर्मा के विशिष्ट आतिथ्य और वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामेश्वर शर्मा की अध्यक्षता में “छन्द के छ-ऑनलाइन गुरुकुल” के नौवें स्थापना दिवस के अवसर पर वृन्दावन हॉल में आयोजित गरिमामय समारोह में सम्पन्न हुआ।
इस भव्य समारोह में छत्तीसगढ़ के लगभग सोलह जिलों के छन्द-साधको की उपस्थिति में भिलाई के विजेन्द्र वर्मा की पुस्तक “जयकारी के रंग”, संगीता वर्मा की पुस्तक “त्रिभंगी छन्द धारा”, सहसपुर लोहारा के बोधनराम निषादराज की पुस्तक “छत्तीसगढ़ी त्रिभंगी छन्द संग्रह”, खैरागढ़ की पद्मा साहू पर्वणी के बाल-गीत संग्रह “ममा गाँव जाबो”, भाटापारा के अजय अमृतांशु के कुण्डलिया संग्रह “ये कलजुग के गोठ”, रायगढ़ के पुरुषोत्तम ठेठवार की पुस्तक “छप्पय छन्द छानी”, इन्ही के द्वारा रचित “श्रीमद्भागवत गीता” (छत्तीसगढ़ी में छंदमय भावानुवाद), सिमगा के मनीराम साहू मितान के छत्तीसगढ़ी प्रबंध काव्य “राजिम सार” और इन्द्राणी साहू साँची के हिंदी बालगीत संग्रह “नन्हीं दुनिया” का भी विमोचन हुआ।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. अभिलाषा बेहार ने छन्द की परम्परा को साहित्य की सर्वोत्कृष्ट परम्परा बताते हुए छंदकारों को बधाई दी। विशिष्ट अतिथि डॉ. सुधीर शर्मा ने “छन्द के छ” को ऑनलाइन यूनिवर्सिटी कहा जहाँ समूचे छत्तीसगढ़ के छन्द साधक छन्द की विधिवत शिक्षा ले रहे हैं। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ साहित्यकार रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कवि, लेखकों की कोई जाति नहीं होती। इनकी केवल एक जाति होती है, वह है साहित्यकार। कार्यक्रम तीन सत्रों में आयोजित था। समारोह के द्वितीय सत्र में छत्तीसगढ़ी भाषा में छंदमय पुस्तकें प्रकाशित कराने के लिए छंदकार चोवाराम वर्मा “बादल”, मनीराम साहू मितान, अजय अमृतांशु, इंजी. गजानंद पात्रे,, इन्द्राणी साहू “साँची”, बोधनराम निषादराज, पुरुषोत्तम ठेठवार, विजेन्द्र वर्मा और संगीता वर्मा को छत्तीसगढ़ी छन्द रतन सम्मान से तथा छत्तीसगढ़ी में बत्तीस बहरों में विधान-सम्मत गजल की पुस्तक प्रकाशित करवाने हेतु सुखदेव सिंह अहिलेश्वर को छत्तीसगढ़ी गजल रतन सम्मान से सम्मानित किया गया।इस समारोह में अनेक छंदकारों ने छत्तीसगढ़ी भाषा में छंदमय प्रस्तुति दी। प्रथम सत्र का संचालन अजय अमृतांशु ने , दूसरे सत्र का संचालन जीतेन्द्र वर्मा खैरझिटिया ने और तीसरे सत्र का संचालन ईश्वर साहू आरुग ने सफलतापूर्वक किया।
विशेष उल्लेखनीय है कि “छन्द के छ” कोई संस्था या समिति नहीं है। इसमें कोई पदाधिकारी नहीं है, केवल सीखो और सिखाओ के सिद्धान्त पर गुरु और शिष्य ही होते हैं। विगत नौ वर्षों में छन्द के छ ऑनलाइन गुरुकुल में छत्तीसगढ़ के तीन सौ से अधिक कवियों ने छन्द ज्ञान प्राप्त किया है। जिनकी छत्तीसगढ़ी भाषा में चालीस से अधिक छन्द आधारित किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। छन्द के छ के संस्थापक अरुण कुमार निगम का मानना है कि छन्द लिखने से व्याकरण पुख्ता होता है और व्याकरण पुख्ता होने से ही कोई भी भाषा समृद्ध होती है। स्थापना दिवस समारोह सफलतापूर्वक संपन्न होने में भिलाई के बलराम चन्द्राकर, गजराज सिंह महंत और कबीरधाम के ज्ञानुदास मानिकपुरी की उल्लेखनीय भूमिका रही.
आभार व्यक्त सूर्यकांत गुप्ता ने किया.
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