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कर्रेगुट्टा हिल्स से नक्सलियों का राज खत्म, महाभारत काल की वेदम गुफा को जल्द देख सकेंगे लोग

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित जिस कर्रेगुट्टा पहाड़ी (KGH) को सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस ने नक्सली मुक्त कराया है। यह पहाड़ी जल्द ही लोगों के घूमने-फिरने के लिए ओपन कर दी जाएगी। इसमें अंतिम दौर की सर्च की जा रही है ताकि अभी भी अगर कहीं नक्सलियों ने पहाड़ी पर कहीं आईईडी छिपा रखी हों तो उन्हें ढूंढकर पहाड़ी को आईईडी फ्री भी करा दिया जाए। इसके बाद लोकल लोग और टूरिस्ट पहाड़ी के एक हिस्से में स्थित महाभारत के इतिहास से जुड़ी ऐतिहासिक वेदम गुफा में भी जा सकेंगे। जिसमें नक्सलियों का कब्जा होने पर लोगों ने जाना छोड़ दिया था।
अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन सफल
नक्सलियों का गढ़ कर्रेगुट्टा पहाड़ी को नक्सल मुक्त कराने के लिए सुरक्षाबलों ने 21 अप्रैल को नक्सलियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन संकल्प शुरू किया था। इसमें सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ के करीब 20 हजार जवानों को लगाया गया था। यह ऑपरेशन बाद 11 मई को बंद कर दिया गया। इस ऑपरेशन की सफलता के बारे में बुधवार को बीजापुर में सीआरपीएफ के डीजी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह और छत्तीसगढ़ पुलिस के डीजीपी अरुण देव गौतम ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। इस बारे में एनबीटी ने मंगलवार को ही बताया था कि इस ऑपरेशन में 31 नक्सली मारे गए। इनमें 16 महिलाएं शामिल थी।
पहाड़ी को नक्सल मुक्त करा लिया गया
सीआरपीएफ के डीजी सिंह ने बताया कि इस पहाड़ी को नक्सल मुक्त करा लिया गया है। नक्सलियों ने इस पहाड़ी में जगह-जगह आईईडी लगा रखी थी। 450 आईईडी सुरक्षाबलों ने ढूंढ निकाली। ऑपरेशन के दौरान आईईडी ब्लास्ट होने से हमारे कई जवान घायल भी हुए। उन्होंने बताया कि कुछ ही दिनों में इस पहाड़ी को आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। इस पहाड़ी पर नक्सलियों ने कब्जा कर रखा था। इस पहाड़ी पर ऐतिहासिक वेदम गुफा है। वहां भी लोग जा सकेंगे। बस, पहाड़ी को आम लोगों के लिए ओपन करने से पहले इसकी फाइनल सर्च की जानी है। ताकि कहीं कोई आईईडी अभी भी ना रह गई हो।
भौगोलिक परिस्थिति काफी कठिन
60 किलोमीटर लंबी और पांच किलोमीटर से 20 किलोमीटर चौड़ी इस पहाड़ी की भौगोलिक परिस्थिति काफी कठिन और चुनौतीपूर्ण है। नक्सलियों ने करीब ढाई साल पहले से इस पहाड़ी पर धीरे-धीरे अपना मेन बेस तैयार कर लिया था। जिसमें उनके लगभग 350 आर्म्ड काडर समेत पीएलजीए बटालियन की टेक्निकल डिपार्टमेंट (टीडी) यूनिट और अन्य महत्वपूर्ण संगठनों की शरणस्थली थी। इसी पहाड़ी पर नक्सलियों की चार टेक्निकल डिवीजन और हथियार बनाने की चार फैक्ट्री भी पकड़ी गई। जहां यह छोटे रॉकेट जैसे बीजीएल और आईईडी भी बनाते थे।
इसके ध्वस्त हो जाने से नक्सलियों की आधे से अधिक कमर टूट गई है। इस साल अब तक 197 नक्सली मारे गए। जबकि इस साल अब तक 718 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, 2024 में 928 नक्सलियों ने सरेंडर किया था।
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