- Home
- Chhattisgarh
- ‘बंगीय साहित्य संस्था छत्तीसगढ़ भिलाई’ : संस्था के तत्वावधान में ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार के निवास में 349वीं साहित्यिक गोष्ठी, गीत-संगीत, काव्यपाठ और विमोचन – ‘मध्यबलय – 59′, निर्वाचित कविता’ और ‘अक्षर आलापन’ का हुआ
‘बंगीय साहित्य संस्था छत्तीसगढ़ भिलाई’ : संस्था के तत्वावधान में ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार के निवास में 349वीं साहित्यिक गोष्ठी, गीत-संगीत, काव्यपाठ और विमोचन – ‘मध्यबलय – 59′, निर्वाचित कविता’ और ‘अक्षर आलापन’ का हुआ

•’बंगीय साहित्य संस्था’ द्वारा आयोजित साहित्य सभा-349वीं गोष्ठी में उपस्थित बंगीय सदस्य
‘छत्तीसगढ़ आसपास’ [07 जून 2025 : रिपोर्ट प्रदीप भट्टाचार्य, फोटो क्लिक पल्लव चटर्जी]
कला,साहित्य और संस्कृति के प्रति समर्पित ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की 349वीं साहित्य सभा बांग्ला भाषा में प्रकाशित लिटिल पत्रिका ‘मध्यबलय’ के संपादक एवं बांग्ला के सुप्रसिद्ध कवि दुलाल समाद्दार के निवास [38/A, क्रॉस स्ट्रीट-1, शक्ति विहार,रिसाली, एक्सिस बैंक के पीछे, कृष्णा टाकीज रोड,भिलाई] में सम्पन्न हुई.’बंगीय साहित्य संस्था’ इस्पात नगरी भिलाई में मासिक साहित्य सभा/प्रति सप्ताह कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा और लिटिल साहित्यिक पत्रिका ‘मध्यबलय’ का प्रकाशन विगत 65 वर्षों [स्थापना वर्ष-1960] से निरंतरता के साथ कर रही है.
349वीं साहित्य सभा की अध्यक्षता संस्था की सभापति एवं बांग्ला की सुप्रसिद्ध कवयित्री श्रीमती बानी चक्रवर्ती ने की. विशिष्ट अतिथि थे- संस्था की उप सभापति एवं वयोवृद्ध लेखिका स्मृति दत्त, संस्था के उपदेष्टा व कवि गोविंद पाल और ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक एवं प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य. सभा के प्रारंभ में माँ सरस्वती की पूजा अर्चना और सरस्वती वंदना से हुई. स्वागत भाषण देते हुए दुलाल समाद्दार ने उपस्थित सभी रचनाकारों एवं गणमान्य श्रोताओं का अभिवादन किया. इस सभा में पंजाब [बठिंडा] से भिलाई पधारे कवि, लेखक गायक अंशुमन रॉय ‘राजा’ विशेष रूप से सम्मिलित हुए और शंकर भट्टाचार्य ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की साहित्यिक गतिविधियों से प्रभावित होकर संस्था की सदस्यता ग्रहण की.
साहित्य सभा की 349वीं बैठक में उपस्थित हुए रचनाकार एवं प्रभुद्धजन श्रोता-
* श्रीमती बानी चक्रवर्ती
* श्रीमती स्मृति दत्त
* गोविंद पाल
* प्रकाशचंद्र मण्डल
* पल्लव चटर्जी
* वीरेंद्रनाथ सरकार
* प्रदीप भट्टाचार्य
* बृजेश मल्लिक
* विपुल सेन
* सुजॉशा सेन
* पं. बासुदेव भट्टाचार्य
* आलोक कुमार चंदा
* सुबीर रॉय
* बाबुल सरकार
* रतन सरकार
* अतनु घोष
* सुमीता प्रकाशचंद्र मण्डल
* अनुभव मण्डल
* शंकर भट्टाचार्य
* अंशुमन रॉय ‘राजा’
* दुलाल समाद्दार
और
दुलाल समाद्दार के परिवार से दुलालदा के भाई श्यामल समाद्दार, मिहिर समाद्दार, दुलालदा के बेटे दीपांकर, अलंकरण, शुभंकर समाद्दार और बहु तान्या व तनु समाद्दार.
▪️
बांग्ला में प्रकाशित पुस्तकों का विमोचन-

• ‘मध्यबलय’-59 का विमोचन करते हुए बंगीय सदस्य व अतिथि

• कवि दुलाल समाद्दार की बांग्ला काव्य संग्रह ‘निर्वाचित कविता’ का विमोचन करते हुए अतिथि एवं बंगीय सदस्य

• कवि पल्लव चटर्जी लिखित बांग्ला काव्य संग्रह ‘आलापन’ का लोकार्पण
* ‘मध्यबलय-59’ अंक
[ संपादक, दुलाल समाद्दार ]
* ‘निर्वाचित कविता’
[ बांग्ला काव्य संग्रह : कृतिकार, दुलाल समाद्दार ]
* ‘अक्षर आलापन’
[ बांग्ला काव्य संग्रह : कृतिकार, पल्लव चटर्जी ]
▪️
इन रचनाकारों ने बांग्ला-हिंदी में कविता पाठ किया-

स्मृति दत्त ने गुलज़ार लिखित ‘कभी-कभी बेवज़ह हंसी आ जाती है…’ हिंदी का बांग्ला में अनुवाद कविता ‘हाँसी पेए जाए… / गोविंद पाल ने आधुनिक कविता ‘असफल अभिनेता’ और एक बाल कविता ‘दादू आर नाती’/ पं. बासुदेव भट्टाचार्य ने देशानंतर प्रधान कविता ‘धर्म के लिए जीए…/ पल्लव चटर्जी ने छोटी- छोटी कविता ‘कॉठ-र-स्केल’ और ‘भालो बासा पोष माने ना…/ शंकर भट्टाचार्य हिंदी में एक मार्मिक बचपन की कविता ‘मेरा बचपन’.

अंशुमन रॉय ‘राजा’ ने हिंदी रचना ‘कैसे भूलूं’/ सुजॉशा सेन ने ‘स्मृति पथ’/ आलोक कुमार चंदा ने ‘आमार जॉने केव नेई… /प्रकाशचंद्र मण्डल ने ‘मध्यबलय-59’ में प्रकाशित कविता ‘श्रति अंतराल लुकीए आछो बोंधु…/ वीरेंद्रनाथ सरकार ने समसामयिक मार्मिक कविता ‘सिंदूर-र-इति कॉथा…/

मिहिर समाद्दार ने ‘इच्छा’, ‘बिधुर रे’, ‘एकटी मोबाइल रे अप मृत्यु…’/ श्यामल समाद्दार अपने बड़े भाई दुलालदा की कविता ‘बैलाडीला’/ अलंकरण समाद्दार ने ‘हम बड़े हो गए…’/दुलाल समाद्दार ने अपनी ‘विमोचित कविता’ से ‘भालो बासा जोदी तुमी…’/ बृजेश मल्लिक ने ‘एकटी गोरीब मेयेर भालोबासा…’/

बानी चक्रवर्ती ने अनुवाद कविता ‘इट्टू आस्ते चलो जीबन…’ और ‘स्वाधीनता’
▪️
हिंदी-बांग्ला, गीत-संगीत से समा बाँधा तान्या समाद्दार, सुजॉशा सेन, अलंकरण समाद्दार, दीपाकंरण समाद्दार, प्रकाशचंद्र मण्डल, अंशुमन रॉय और शुभंकर समाद्दार ने-

• तान्या समाद्दार
• अंशुमन रॉय ‘राजा’ गायन करते हुए…
सुजॉशा सेन ने ‘बोड़ो साधे मांगे… /तान्या समाद्दार ने ‘जा रे जा रे उड़े जा रे पाखी… ‘ एवं गोपाल आमार कॉथाय वृंदावन… /अलंकरण समाद्दार ने ‘श्री कृष्ण द्वार होइया रे, कोई कोई रे कृष्ण रे… / दीपाकंरण समाद्दार ने ‘मिलोन होबे कॉतो दिने आमार मन रे… /प्रकाशचंद्र मण्डल ने ‘आमार बंधु… /अंशुमन रॉय ‘राजा’ ने रवींद्रनाथ के गीत को 3 रूप में प्रस्तुत किया ‘आहा की आनंदो आकाशे बाताशे… ‘जोदी कॉई डाक सुने… और ‘लावो-र आगा खाइलम… /शुभंकर समाद्दार ने ‘जाइये आप कहाँ जायेंगे ये नज़र लौट के फिर आयेगी… /अंतिम गीत सुजॉशा सेन ने सलिल चौधुरी व हेमंत कुमार के गाने की मधुर प्रस्तुति दी.
▪️
बीते दिनों कश्मीर {पहलगाम} पर हुए आतंकी हमले पर लिखी कविता गोविंद पाल, बृजेश मल्लिक, पं. बासुदेव भट्टाचार्य और प्रकाशचंद्र मण्डल ने पढ़ी-
गोविंद पाल ने ‘आपरेशन सिंदूर’ शीर्षक से 2 कविता पढ़ी. ‘नहीं है सुहाग की निशानी…’ और ‘शर्मसार हुआ…’/ बृजेश मल्लिक ने ‘जात नहीं धर्म पूछ कर मारा गया…’/पं. बासुदेव भट्टाचार्य ने ‘चंदन है इस देश की माटी, तपोभूमि हर गाँव है…’ और प्रकाशचंद्र मण्डल ने ‘आमी मिथ्या कबिता लिखते चाई ना…

▪️
अंत में प्रदीप भट्टाचार्य ने विश्व के नामचीन कवि डेल कार्नेगी की लिखी मुक्तक ‘यदि आप शत्रु चाहते हैं तो अपने मित्रों से श्रेष्ठ बने,किंतु यदि आप मित्र चाहते हैं तो अपने मित्रों को अपने से श्रेष्ठ बनने दें’ और दूसरी रचना ‘आपका अपना रास्ता है, मेरा अपना रास्ता है, जहाँ तक सही रास्ते और एक मात्र रास्ते की बात है, तो ऐसा कोई रास्ता नहीं है…’ एवं दुलालदा की पोती तृष्या समाद्दार ने ऑडीयो में एक बेहद ही सुंदर आवृत्ति का पाठ किया.
▪️
साहित्य सभा एवं आयोजन की कुछ प्रमुख सचित्र झलकियाँ-

• प्रकाशचंद्र मण्डल और श्रीमती सुमीता मण्डल ने कवि दुलाल समाद्दार का अभिनंदन शॉल/श्रीफल से किया

• मिहिर समाद्दार ने प्रदीप भट्टाचार्य का अभिवादन किया

• कवि दुलाल समाद्दार का पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित करते हुए ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के प्रमुख सदस्य

• अंशुमन रॉय ‘राजा’ का स्वागत करते हुए अनुभव मण्डल

• कवि पल्लव चटर्जी का अभिनंदन करते हुए {बाएँ से} अनुभव मण्डल, दुलाल समाद्दार, पल्लव चटर्जी, प्रकाशचंद्र मण्डल और सुमीता मण्डल

• ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति आयोजन से संबंधित उद्बोधन देते हुए…

साहित्य सभा-349 के संयोजक दुलाल समाद्दार उपस्थित रचनाकारों का आभार प्रकट करते हुए…
• ‘बंगीय साहित्य संस्था’ द्वारा आयोजित 349वीं सभा का स्वागत वक्तव्य दुलाल समाद्दार, संचालन प्रकाशचंद्र मण्डल और आभार व्यक्त दीपांकर समाद्दार ने किया.
[ • प्रस्तुति : प्रदीप भट्टाचार्य ]
🟥🟥🟥
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)