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‘बंगीय साहित्य संस्था’ : ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा- 82 में शामिल हुए- स्मृति दत्त, समरेंद्र विश्वास, पल्लव चटर्जी, दुलाल समाद्दार, प्रकाशचंद्र मण्डल, वीरेंद्रनाथ सरकार, प्रदीप भट्टाचार्य, बृजेश मल्लिक, विपुल सेन, आलोक कुमार चंदा, पं. बासुदेव भट्टाचार्य, सुबीर रॉय, शंकर भट्टाचार्य और समुद्रनील विश्वास

‘छत्तीसगढ़ आसपास’ [भिलाई निवास,इंडियन कॉफी हाउस : 14 जून, 2025 : रिपोर्ट-प्रस्तुति प्रदीप भट्टाचार्य एवं फोटो क्लिक- पल्लव चटर्जी]
विगत 65 वर्षों से इस्पात नगरी भिलाई में बांग्ला साहित्यिक, संस्कृति एवं सांस्कृतिक उद्देश्य को लेकर संचालित ‘बंगीय साहित्य संस्था’ प्रति सप्ताह ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा’ का आयोजन संस्था के सदस्य करते हैं. इस कड़ी में आड्डा-82, 14 जून, 2025 को भिलाई निवास के इंडियन कॉफी हाउस में सम्पन्न हुई. इस विचार-विमर्श में शामिल हुए- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति एवं बांग्ला की देशव्यापी चर्चित लेखिका एवं वयोवृद्ध कवयित्री स्मृति दत्त, लब्धप्रतिष्ठित लेखक व कवि समरेंद्र विश्वास, सुप्रसिद्ध कवि पल्लव चटर्जी, ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार, बांग्ला- हिन्दी के चर्चित कवि प्रकाशचंद्र मण्डल,विचारवान कवि वीरेंद्रनाथ सरकार,’छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक एवं प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य, राष्ट्रवादी कवि बृजेश मल्लिक, साहित्यिक व सामाजिक चिंतक आलोक कुमार चंदा, सुबीर रॉय, बांग्ला कवि विपुल सेन, हिंदुत्ववादी कवि पं. बासुदेव भट्टाचार्य, संस्था से प्रभावित होकर आजीवन सदस्यता ग्रहण की शंकर भट्टाचार्य और प्रथम बार शिरकत किए युवा समुद्रनील विश्वास.
आज के ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा- 82’ की अध्यक्षता स्मृति दत्त और विशिष्ट अतिथि समरेंद्र विश्वास एवं दुलाल समाद्दार थे.विशेष रूप से सम्मलित हुए समुद्रनील विश्वास, संचालन प्रकाशचंद्र मण्डल ने किया.

👉 • स्मृति दत्त, उप सभापति ‘बंगीय साहित्य संस्था’
प्रारंभ में स्मृति दत्त ने विगत 12 जून को हुए अहमदाबाद से लंदन जा रहे एअर इंडिया का विमान क्रैश को लेकर एक हृदय विदारक कविता ‘एक मिनट’ शीर्षक को लेकर अपनी बात कही. बोइंग 787 में हुए हादसे में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी सहित 241 यात्रियों की मौत हो गई. क्रैश के बाद प्लेन का पिछला हिस्सा हास्टल बिल्डिंग पर गिरा जिसकी वजह से और भी कई डॉक्टरों एवं अन्य लोगों की मौत हो गई. ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्यों ने मृतकजनों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए 1 मिनट का मौन रखा.

👉 • वीरेंद्रनाथ सरकार को जन्मदिन की शुभकामनाएं व बधाई देते हुए ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्य

👉 • मण्डल दम्पति {प्रकाश चंद्र मण्डल एवं श्रीमती सुमीता मण्डल} को वैवाहिक वर्षगांठ की बधाई देते हुए ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्य
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•चर्चा एवं काव्य पाठ के पूर्व संस्था के वरिष्ठ एवं सक्रिय सदस्य वीरेंद्रनाथ सरकार का जन्मदिन मनाया गया. सदस्यों ने उनके दीर्घायु होने की शुभकामनाएं दी.
• इसी कड़ी में मण्डल दम्पति [प्रकाशचंद्र मण्डल और श्रीमती सुमीता मण्डल]के वैवाहिक जीवन के 36 वर्ष पूर्ण होने पर उन्हें बधाई दी गई.
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पहली बार ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा’ में शामिल हुए युवा समुद्रनील विश्वास ने कहा-

‘बंगीय साहित्य संस्था’ द्वारा आयोजित ऐसे आयोजन से स्वयं में एक ऊर्जा का संचार होता है. मुझे आज पिताश्री {समरेंद्र विश्वास} के साथ यहाँ आकर बेहद खुशी की अनुभूति हो रही है. मुझे साहित्य से लगाव तो है, पर अपनी बातों को साहित्यिक शब्दों के माध्यम से अवगत नहीं कर पा रहा हूँ. समुद्रनील विश्वास ने कहा कि कविता समाज को प्रतिबिंब दिखाता है और आप रचनाकारों से कुछ न कुछ सीखने को ही मिलता है. आज के युवाओं को इस संस्कृति से जोड़ना चाहिए और आप लोग अपनी रचना के माध्यम से समाज को जोड़ रहे हैं.

👉 • समरेंद्र विश्वास
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देश के ख्यातिलब्ध लेखक समरेंद्र विश्वास ने एक लघुकथा का पाठ किया. लघुकथा का शीर्षक था – ‘भुमद्दो सागरेर हाउया’. इस कथा में समरेंद्र विश्वास ने प्रगतिशील परंपरा से समकालीन रचना को जोड़ती हुई सार्थक रचनाशीलता को प्रकट किया है. हमें इस कथा से बहुत कुछ सीखने को मिलता है.
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आज जिन्होंने अपनी-अपनी बांग्ला-हिंदी में रचना का पाठ किया-

स्मृति दत्त ने बांग्ला कविता ‘स्वर्ग’/ शंकर भट्टाचार्य ने बांग्ला कविता ‘गोरोमे- र -दिन’ और हिंदी कविता ‘अंजाने शहर में’/ पं. बासुदेव भट्टाचार्य ने ‘कबि-र-संसार’.

विपुल सेन ने ‘चाकरी चुरी’ और ‘स्वप्न’/ पल्लव चटर्जी ने ‘कोमा’ एवं ‘भालोबासा’/ बृजेश मल्लिक ने दुलाल समाद्दार की कृति ‘निर्वाचित कविता’ से एक कविता ‘ऐ कविता बांग्ला भाषा’.

वीरेंद्रनाथ सरकार ने ‘कव्ये बोले गेलो.. ‘/ दुलाल समाद्दार ने ‘भात’/ प्रकाशचंद्र मण्डल ने ‘पोका’ / आलोक कुमार चंदा ने अधीर कुमार रॉय लिखित एक बांग्ला कविता ‘ऑपेखा’ याने ‘उम्मीद’.
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प्रदीप भट्टाचार्य की हिंदी कविता ‘खूबसूरती का राज’ ‘मध्यबलय’- 59 में बांग्ला भाषा में अनुवाद होकर प्रकाशित हुई है. हिंदी कविता का बांग्ला में अनुवाद सुप्रसिद्ध कवि तारकनाथ चौधुरी ने किया है-

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कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-82 की कुछ सचित्र झलकियाँ-





👉 [ बाएँ से ] प्रदीप भट्टाचार्य, वीरेंद्रनाथ सरकार, दुलाल समाद्दार, समरेंद्र विश्वास, शंकर भट्टाचार्य, बृजेश मल्लिक, पल्लव चटर्जी, स्मृति दत्त, आलोक कुमार चंदा, प्रकाशचंद्र मण्डल, पं. बासुदेव भट्टाचार्य और विपुल सेन
आभार व्यक्त बृजेश मल्लिक ने किया.
[ • प्रस्तुति-रिपोर्ट : प्रदीप भट्टाचार्य ]
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chhattisgarhaaspaas
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