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- बांग्ला भाषा में प्रकाशित देश की चर्चित पत्रिका ‘मध्यबलय-59’ में प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य की हिंदी कविता ‘खूबसूरती का राज’ बांग्ला में अनुवादित कर प्रकाशित की गई है : कविता को बांग्ला में अनुवाद बांग्ला-हिंदी के सिद्धहस्त कवि तारकनाथ चौधुरी ने किया एवं ‘मध्यबलय’ के संपादक हैं, दुलाल समाद्दार.
बांग्ला भाषा में प्रकाशित देश की चर्चित पत्रिका ‘मध्यबलय-59’ में प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य की हिंदी कविता ‘खूबसूरती का राज’ बांग्ला में अनुवादित कर प्रकाशित की गई है : कविता को बांग्ला में अनुवाद बांग्ला-हिंदी के सिद्धहस्त कवि तारकनाथ चौधुरी ने किया एवं ‘मध्यबलय’ के संपादक हैं, दुलाल समाद्दार.

‘छत्तीसगढ़ आसपास’ [साहित्यिक डेस्क]
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सौजन्य से निरंतर प्रकाशित बांग्ला भाषा की लिटिल मैंग्जीन ‘मध्यबलय’ के नवीनतम अंक-59 {नववर्ष विशेषांक} में ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक एवं प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य की हिंदी कविता ‘खूबसूरती का राज’ बांग्ला में अनुवादित होकर प्रकाशित हुई है. हिंदी कविता का बांग्ला में रूपान्तर लब्धप्रतिष्ठत कवि तारकनाथ चौधुरी ने किया है. ‘मध्यबलय’ पत्रिका को राष्ट्रीय स्तर पर कई बार उत्कृष्ट एवं गुणवत्ता के लिए सम्मानित भी किया गया है. पत्रिका के संपादक हैं, बांग्ला के सुप्रसिद्ध कवि दुलाल समाद्दार.

• प्रदीप भट्टाचार्य

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• खूबसूरती का राज

एक दिन मैंने/घर में खिले गुलाब से/यूँ ही पूछ लिया/तुम्हारी खूबसूरती का राज क्या है?
गुलाब ने बहुत ही प्यारा सा/उत्तर दिया- हम,तुम इंसानों की तरह/आपस में कोई भेदभाव नहीं करते हैं/मंदिरों से लेकर मज़ारों तक/बिना किसी गम के/चढ़ जाया करते हैं/हमारी खुशबू/हवाओं के साथ/प्रकृति की चारों दिशाओं में बिखर जाती है.
मगर तुम इंसानों की तरह/शोर नहीं मचाती है/हम हमेशा ही/अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं/और हर मौसम का दर्द सहते हैं/काँटों के साथ रहकर भी/हमें बुरा नहीं लगता/भले हमारी जिंदगी/बहुत छोटी होती है.
लेकिन तुम इंसानों की तरह/खोटी नहीं होती है/बस इतना ही प्रकृति में/सबसे अधिक खूबसूरत होने का राज है.
मैंने गुलाब से कहा-
मुझे
तुम पर नाज़ है/किसी दिन मैं/तुम्हारी आत्मकथा/दुनिया को सुनाऊंगा/व जगत वालों को पकड़-पकड़ कर/तुम्हारे उपर
कविता लिखवाऊंगा.
[ • मूल कविता हिंदी में ]
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chhattisgarhaaspaas
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