- Home
- Chhattisgarh
- श्री गुरुवे नम: गुरु पूर्णिमा पर विशेष : आत्म चिंतन और आत्म शोधन का पर्व है गुरु पूर्णिमा – डॉ. नीलकंठ देवांगन
श्री गुरुवे नम: गुरु पूर्णिमा पर विशेष : आत्म चिंतन और आत्म शोधन का पर्व है गुरु पूर्णिमा – डॉ. नीलकंठ देवांगन

जीवन का अर्थ और सार समझाने ने वाला होता है गुरु l गुरु व्यक्ति के रूप में पहचाना जा सकता है, पर व्यक्ति की परिधि में सीमित नहीं होता l जो शरीर तक सीमित है, चेतना रूप में स्वयं को विकसित नहीं कर सका, वह अपना अंश शिष्य को दे नहीं सकता l जो इस विद्या का मर्मी नहीं, वह गुरु नहीं l जो गुरु को शरीर से परे शक्ति सिद्धांत के रूप में स्वीकार नहीं कर सका, वह शिष्य नहीं l गुरु शिष्य को अपने पुण्य, प्राण और तप का एक अंश देता l यह अंश पाने की पात्रता, धारण सामर्थ्य, विकास एवं उपयोग कला एक सुनिश्चित अनुशासन के अंतर्गत ही संभव हो पाता है l गुरु में शिष्य वर्ग के प्रति प्रगति के लिए स्नेह भरी लगन जैसे दिव्य भाव हो l शिष्य में गुरु के प्रति गहन श्रद्धा विश्वास हो l गुरु जीवन में ऐसा क्रम बनाए कि शिष्य वर्ग में उसके प्रति सहज श्रद्धा, सम्मान का भाव जागे l शिष्य सीखने का वह शिष्य भाव रखे जिसमें गुरुजनों के प्रति सम्मान, आज्ञा पालन और अनुशासन हो l गुरु शिष्य पर अनुशासन दृष्टि रखता और शिष्य गुरु से निरंतर निर्देश पाता, उन्हें मानता अपनाता रहता है l इसीलिए हमारी संस्कृति में गुरु शिष्य का संबंध दाता भिखारी जैसा नहीं, सहयोगी साझेदारी स्तर का बनाया गया है l
सामान्य रूप में गुरु वह जो अंधकार (गु) से प्रकाश (रु) तक ले जाता है l पारंपरिक रूप में गुरु वह जिसमें गांभीर्य हो और अंतर्दृष्टि पैदा कर स्वावलंबी, स्वतंत्र बनाए l एक अन्य अर्थ में गुरु वह जो आध्यात्मिक चेतना जागृत कर सकारात्मक ऊर्जा देकर चमत्कारिक ढंग से समस्याएं हल करे l बोलचाल में गुरु शब्द कई तरह के लोगों के लिए उपयोग किया जाता है – अध्यापक, आचार्य, शास्त्री, पंडित, आध्यात्मिक ज्ञानी, साधु, मुनि, चतुर, चालाक,तपस्वी, तांत्रिक, पुरोहित l
गुरु शिष्य को अपनी दिव्य संपदा की कमाई का एक अंश देता l शिष्य अपनी कमाई, श्रद्धा, पुरुषार्थ, प्रभाव, संपदा का एक अंश गुरु को समर्पित करता, जिससे गुरु का लोक मंगल अभियान विकसित होता रहे l गुरु एक नाम नहीं, समस्त जीवन की चेतना है, स्पंदन है, दिव्यता है l जहां अन्य देवता मनुष्य की कल्पना के प्रतीक हैं, वहीं गुरु साक्षात स्पंदन युक्त, चेतना युक्त, दिव्यतम हैं l पूर्णता यदि किसी के साथ लग सकता है तो वह गुरु ही है l
प्रत्येक मनुष्य के जीवन में गुरु का बहुत बड़ा योगदान होता है l गुरु का स्थान सब देवताओं से ऊपर है l जीवन में गुरु आवश्यक है l जीवन में गुरु चैतन्यता, स्पंदन, एक ठोस आधार है, जिससे शिष्य अपनी जीवन यात्रा आनंद से व्यतीत कर सके और उसे परम लोक, मोक्ष की प्राप्ति हो सके l गुरु के आशीर्वाद से मनुष्य अपने जीवन के कठिन से कठिन समय को पार कर लेता है l गुरु शिष्य के बीच पवित्र, गूढ़, अंतरंग संबंधों की स्थापना और उन्हें दृढ़ करने के लिए गुरु पूर्णिमा का पर्व आता है l गुरु महान है l उसे भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है l गुरु ही भगवान की पहचान बताता है l कबीरदास जी ने गुरु की महिमा में कहा है –
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय
बलिहारी गुरु आपकी, गोविंद दियो बताय
जन्म दाता पिता और ब्रह्मज्ञान दाता गुरु से गुरु ही श्रेष्ठ है l कोई शिष्य गुरु को मनुष्य समझता तो लोक जीवन में कभी भी सिद्धि नहीं पा सकता l गुरु का ज्ञान भ्रम संशय को मिटाकर निश्चय बुद्धि बनाता है l कबीर दास जी ने बताया है –
सतगुरु मेरा शूरमा, करे शब्द की चोट
मारे गोला प्रेम का, हरे भरम की कोट
गुरु से बढ़कर न शास्त्र है, न तपस्या, न मंत्र, न स्वर्गादिक फल l गुरु से बढ़कर न देवी है, न देवता l गुरुदेव ही सर्वश्रेष्ठ हैं l गुरुदेव के प्रसन्न होने पर सभी देवता प्रसन्न होते हैं l गुरु ही माता, पिता, भगवान महेश्वर हैं l देवता के रूष्ट होने पर गुरु रक्षा करता, पर गुरुदेव के रूष्ट होने पर कोई रक्षा नहीं कर सकता l गुरुदेव की सेवा किए बगैर जो शिष्य कुलधर्म का पालन करता, उनसे देवता कभी प्रसन्न नहीं होते, मंत्र सिद्ध नहीं होता l अतः मन से, वाणी से, शारीरिक कार्यों से सदा गुरुदेव के हित में लगे रहना चाहिए l गुरु के इसी महत्व को ध्यान में रखते शास्त्रों में एक दिन उनके नाम निश्चित किया गया है l आषाढ़ मास की पूर्णिमा को श्रद्धा से गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है l इस दिन आत्म चिंतन और आत्म शोधन करना चाहिए l गुरुदेव की सेवा करता जो मृत्यु ग्रहण करता, सब पापों से मुक्त होकर शिवलोक चला जाता, मोक्ष को प्राप्त कर लेता l जीवन निर्माण में गुरु का महत्वपूर्ण स्थान होता l वह आध्यात्मिक गुरु होता l उसका दर्जा भगवान से भी ऊंचा होता l वही भगवान की पहचान बताता और उससे मिलाता l गुरु पूर्णिमा के इस पुनीत अवसर पर श्रद्धा पूर्वक गुरु की पूजा वंदना कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें l आत्म गौरव बढ़ाएं l

• संपर्क-
• 84355 52828
🟥🟥🟥
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)