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मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
हास्य के कोकड़ा
राजशेखर चौबे
छत्तीसगढ़ रायपुर
देस मे व्यंग्यकार मन सुते हे महुँ सुते रेहेंव, तभे मोर फोन बजिस –
” हलो-हलो, मेहा सरग ले हास्य के कोकड़ा बोलत हंव।”
” कका, तेहा तो दूसरइया मरे के बाद घलो कइसे बोलत हस?”
” हत् तो रे भकला, तभे तो सरग ले बोलत हंव।”
” सरग ले तो भगवान ल छोडक़े कोनो नइ बोल सके।”
-‘मेहा केहे रेहेंव कि टाइगर अभी जिंदा हे।’ जब तक छत्तीसगढ़ी भाखा अउ छत्तीसगढिय़ा मनखे जिंदा रइही, तब तक मेहा घलो जिंदा रइहूं।
” ऐमे कोनो सक नइए। तभो ले कका तोला उहां जाए के अतेक जल्दी काबर रिहिस? साय के राज म तोर छत्तीसगढ़ी कविता ह सांय -सांय चलत रिहिस।”
” मेहा पहिली कहिदे रेहेंव कि मेहा हास्य के कोकड़ा, ठहाका के परिंदा आंव, अउ टाइगर अभी जिंदा हे।”
” हमर छत्तीसगढ़ म कोनो चीज के कमी नइहे, फेर अब तोर कमी जरूर खलही।” ” छत्तीसगढ़ म एक अउ चीज कमती हो जाही। ”
“वो का चीज आए?।”
-वो हे डायमंड।
-वो कइसे ?
” ब्लैक डायमंड ह सरग म आ गे हे। हा हा हा ! ”
” हा हा हा !! तोर बात ल सुनके हंसी ल हमन नइ रोक सकन। फेर, मोर आंसू घलो निकल गे।”
-तेहा रो झन।
-सरग म अउ कोन-कोन मिलिस?
” इहां नेतामन कमती दिखथें। वइसे गांधी बबा, नेहरू कका अउ अटल कका ले मुलाकात होइस हे।”
” वोमन का कहत रिहिस हें?”
” मेहा नइ जानत रेहेंव कि सरग म 24 घंटा फ्री वाई-फार्ई के सुविधा हे। अउ ए सबझन मोर कविता जरूर सुनथें। सब्बोझन मोर फैन बन गे हे। गांधी बबा ह किहिस कि तोर कविता म गंवई गांव के खुसबू हे, नेहरू ह किहिस कि तोला कांगरेस राज म पदमसिरी मिलिस, मोला ए बात के खुसी हे।”
” अटल कका का किहिस”
” कि मेहा छत्तीसगढ़ ल राज्य बनाए हंव अउ तेहा छत्तीसगढ़ के नांव ल पूरा बिस्व म रोसन कर दे हस। तेहा नइ पतियाबे कि कलाम सर ह इहां आके हिंदी बोले बर सीख गे हे। वोहा कहत रिहिस कि तेहा कलम के धनी आस। ”
” फेर, सुरेंद्र कका तोला अतेक जल्दी नइ जाना रिहिस? तेहा अब्बड़ लकर्रा निकलेस।”
” अरे, ए ब्लॉकेज ल का करबे। साले ह कोनो उमर म हो जथे। कुछ दिन पहिली ‘कांटा लगा’ वाले सेफाली जरीवाला ह 42 बछर के उमर म सरग आ गे। हम सब्बो डोकरामन वोकर कांटा लगा डांस ल देखे हन। ”
” अब उहां तेहा संभल के रहिबे अउ अपन खाए-पिए के धियान रखबे।”
” इहां कोनो बात के चिंता नइहे। कहे जाथे कि बिना मरे सरग नइ मिले। ऐकर मायने इहें आके समझ आथे। इहां बीपी, सुगर, ब्लॉकेज, कनिहा पीरा कुछु नइ होवय। मनखे ह एके पइत जीथे अउ एके पइत मरथे। अउ, मेहा तो उहें दू-दू पइत मर चुके हंव।”
” सही केहेस कका। उहां सब बने-बने रहत होही। उहां न तो इजरायल-ईरान होही, न तो पाकिस्तान-भारत होही अउ न तो ट्रम्प बबा होही।”
” इहां गाजा घलो नइए, जिहां नान-नान लइकामन भूख अउ गोली ले मरत हें। ”
” उहां सब्बो खबर मिल जाथे का?”
” हव, इहां सब पता चलथे। उहां मोर बारे म कोन-कोन, का-का लिखत हें, मेहा सब जानत हंव। मोर खांध म चढक़े अपन-आप के परचार करथें। ”
” मोरो बारे म तो अइसने बिचार नइहे?”
” नइ-नइ तोर लिखे हर बात सच आए। जउन ए बात ल नइ समझही वोला ए कोकड़ा ह समझा दिही। इहां सब्बो चीज के समे तय रहिथे। मोर बात करे के समे खतम होत हे। ”
” कका ए बताबे कि उहां सब्बोझन तोर कइसे सुवागत करिन हे?”
” सब्बोझन मोला किहिस- ‘छत्तीसगढिय़ा सबले बढिय़ा।

• राजशेखर चौबे
• संपर्क : 94255 96643
chhattisgarhaaspaas
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