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- काव्य महाभारत : ‘अंतर्राष्ट्रीय साहित्य समनव्य केंद्र’ कोलकाता से प्रकाशित 2025 बांग्ला कवियों का वृहत्तम संग्रह में छत्तीसगढ़-भिलाई के लब्धप्रतिष्ठित कवि प्रकाशचंद्र मण्डल भी शामिल
काव्य महाभारत : ‘अंतर्राष्ट्रीय साहित्य समनव्य केंद्र’ कोलकाता से प्रकाशित 2025 बांग्ला कवियों का वृहत्तम संग्रह में छत्तीसगढ़-भिलाई के लब्धप्रतिष्ठित कवि प्रकाशचंद्र मण्डल भी शामिल

प्रवीर कुमार विश्वास के संपादन में प्रकाशित इस संग्रह में प्रकाशचंद्र मण्डल के परिचय और उनकी एक कविता ‘सपने भी सच होते हैं’ को प्रकाशित किया गया है. प्रकाशचंद्र मण्डल विगत 4 दशकों से बांग्ला साहित्य सृजन को संपादित कर रहे हैं. इनकी प्रथम बांग्ला काव्य संग्रह 2019 में प्रकाशित हुई थी. अब तक प्रकाशित संग्रह है- ‘तुमि एले ताई’, ‘एक फालि रोद्दुर’, ‘आमाके उन्मुक्त करो’ और ‘कखोन जे कोन कॉथा कबिता होए जाए’.

प्रकाशचंद्र मण्डल बांग्ला कविता के अलावा हिंदी में भी कविता लिख रहे हैं. हिंदी में इनकी 2 काव्य संग्रह ‘शब्दों की खोज में’ और ‘फिर भी चलना होगा’ प्रकाशित हुई है. नाट्यकार के रूप में भी इन्होंने प्रसिद्धि पाई है. 36 नाटकों में अभिनय एवं निर्देशन के अलावा अनेक नाटक भी लिखे हैं, जिनका मंचन भी हुआ है.

प्रकाशचंद्र मण्डल को प्राप्त अनेक उपलब्धियों में इस उपलब्धि के लिए ‘बंगीय साहित्य संस्था’ और ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ परिवार की तरफ से अनंत-अनंत बधाई.
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