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- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ : ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-87’ में शामिल हुए- स्मृति दत्त, समरेंद्र विश्वास, दुलाल समाद्दार, पल्लव चटर्जी, गोविंद पाल, प्रकाशचंद्र मण्डल, वीरेंद्रनाथ सरकार,पं. वासुदेव भट्टाचार्य और रविंद्रनाथ देबनाथ : आज के ‘आड्डा’ में विशेष रूप से जबलपुर से पधारे साहित्याचार्य तापस किरण रॉय ने बांग्ला संस्था की आजीवन सदस्यता ग्रहण की
‘बंगीय साहित्य संस्था’ : ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-87’ में शामिल हुए- स्मृति दत्त, समरेंद्र विश्वास, दुलाल समाद्दार, पल्लव चटर्जी, गोविंद पाल, प्रकाशचंद्र मण्डल, वीरेंद्रनाथ सरकार,पं. वासुदेव भट्टाचार्य और रविंद्रनाथ देबनाथ : आज के ‘आड्डा’ में विशेष रूप से जबलपुर से पधारे साहित्याचार्य तापस किरण रॉय ने बांग्ला संस्था की आजीवन सदस्यता ग्रहण की

👉 • [बाएँ से] रविंद्रनाथ देबनाथ, स्मृति दत्त, वीरेंद्रनाथ सरकार, पल्लव चटर्जी, तापस किरण रॉय, समरेंद्र विश्वास और प्रकाशचंद्र मण्डल
‘छत्तीसगढ़ आसपास’ [भिलाई निवास,इंडियन कॉफी हाउस : 26 जुलाई,2025 : रिपोर्ट-प्रस्तुति पल्लव चटर्जी]
विगत 65 वर्षों से इस्पात नगरी भिलाई में बांग्ला साहित्यिक, संस्कृति एवं सांस्कृतिक उद्देश्य को लेकर संचालित ‘बंगीय साहित्य संस्था’ प्रति सप्ताह ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा’ का आयोजन संस्था के सदस्य करते हैं. इस कड़ी में आड्डा-87, 26 जुलाई, 2025 को भिलाई निवास के इंडियन कॉफी हाउस में सम्पन्न हुई. इस विचार-विमर्श में शामिल हुए- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति एवं बांग्ला की देशव्यापी चर्चित लेखिका एवं वयोवृद्ध कवयित्री स्मृति दत्त, लब्धप्रतिष्ठित बांग्ला लेखक व कवि समरेंद्र विश्वास, ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार, सुप्रसिद्ध बांग्ला कवि पल्लव चटर्जी,संस्था के सलाहकार व कवि गोविंद पाल, बांग्ला- हिन्दी के चर्चित कवि प्रकाशचंद्र मण्डल, कवि वीरेंद्रनाथ सरकार,पं. बासुदेव भट्टाचार्य, साहित्यिक चिंतक रविंद्रनाथ देबनाथ और पहली बार संस्कारधानी जबलपुर से पधारे साहित्याचार्य तापस किरण रॉय.
आज के ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा- 87’ की अध्यक्षता स्मृति दत्त, मुख्य अतिथि संस्था के संरक्षक समरेंद्र विश्वास एवं पहली बार शामिल हुए विशेष आमंत्रित अतिथि तापस किरण रॉय थे.
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कविता पाठ-

• पं. बासुदेव भट्टाचार्य ने बांग्ला में 2 छोटी-छोटी कविता ‘किछु’ और ‘जीवन’/ • दुलाल समाद्दार ने सावन मास पर ‘बाइरे श्रावण’ और ‘बृष्टि तुमि दुष्टो भारी’/ • स्मृति दत्त ने ‘तोमार मोने आमार अबाध यातायात’/ • प्रकाशचंद्र मण्डल ने ‘बृष्टि भिजा दिन’ और ‘आमी एकटा प्रकांड गाछ’

• समरेंद्र विश्वास ने अणु गोल्पो का पाठ किया. शीर्षक था ‘खुनी-र-हाथ’/ • पल्लव चटर्जी ने ‘कोथाय गेलो ठाकुमा’/ • वीरेंद्रनाथ सरकार ने ‘कृषक पुत्र’ और ‘ प्रवीण शकुन’/ • गोविंद पाल ने हास्य व्यंग्य कविता ‘दादुर नाती’ का पाठ किया.
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इस अवसर पर मध्यप्रदेश के जबलपुर से पधारे वरिष्ठ बांग्ला कवि तापस कुमार रॉय ने कहा कि-

हम भिलाई को लौहनगरी के रूप में ही जानते थे. मगर यहां आकर पता चला विगत 65 वर्षों से एक ऐसी साहित्यिक संस्था संचालित हो रही है, जिसे प्रवासी बांग्ला भाषी लोगों के माध्यम से चल रही है. मैं इस साहित्यिक संस्था से अंतर्मन से प्रभावित हूँ और आजीवन सदस्यता ग्रहण करता हूँ. तापस किरण रॉय ने बांग्ला में अत्यंत भावपूर्ण कविता ‘हातेर रंगो फुल’ और ‘सृष्टि स्मृति उड़ें जाचछे’ का पाठ किया. ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के उपस्थित सभी सदस्यों ने तापस दादा का अभिवादन किया.

👉 • कवि तापस किरण रॉय को संस्था द्वारा प्रकाशित बांग्ला पत्रिका ‘मध्यबलय’ भेंट करते हुए संस्था की उप सभापति स्मृति दत्त
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‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सक्रिय सदस्य, बंगाली समाज से जुड़े साहित्यिक चिंतक आलोक कुमार चंदा का विगत दिनों एक सड़क दुर्घटना के बाद ‘जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र’ सेक्टर-9 में इलाज के लिए भर्ती किया गया है, उनका सफल ओप्रेशन भी हो चुका है, उनके जल्द स्वास्थ्य लाभ के लिए सभी सदस्यों ने ईश्वर से मंगल कामना की है.

👉 [बाएँ से] पल्लव चटर्जी, रविंद्रनाथ देबनाथ, गोविंद पाल, तापस किरण रॉय, समरेंद्र विश्वास, स्मृति दत्त, वीरेंद्रनाथ सरकार, प्रकाशचंद्र मण्डल और अन्य
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प्रति सप्ताह की तरह इस सप्ताह भी मिनी पकोड़ा, चाय, कॉफी और ग्रुप फोटो के साथ आड्डा की समाप्ति हुई.
आज के आड्डा का संचालन प्रकाशचंद्र मण्डल एवं आभार व्यक्त रविंद्रनाथ देबनाथ ने किया.
[ • रिपोर्ट एवं फोटो क्लिक : पल्लव चटर्जी ]
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