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- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ : ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-88’ में शामिल हुए- बानी चक्रवर्ती, समरेंद्र विश्वास, दुलाल समाद्दार,प्रकाशचंद्र मण्डल,प्रदीप भट्टाचार्य, बृजेश मल्लिक,वीरेंद्रनाथ सरकार,पं. वासुदेव भट्टाचार्य, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, सोमाली शर्मा,रविंद्रनाथ देबनाथ और शंकर भट्टाचार्य : आज विशेष रूप से प्रकाशचंद्र मण्डल का जन्मोउत्सव मनाया गया और बांग्ला-हिंदी में कविता पाठ हुआ.
‘बंगीय साहित्य संस्था’ : ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-88’ में शामिल हुए- बानी चक्रवर्ती, समरेंद्र विश्वास, दुलाल समाद्दार,प्रकाशचंद्र मण्डल,प्रदीप भट्टाचार्य, बृजेश मल्लिक,वीरेंद्रनाथ सरकार,पं. वासुदेव भट्टाचार्य, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, सोमाली शर्मा,रविंद्रनाथ देबनाथ और शंकर भट्टाचार्य : आज विशेष रूप से प्रकाशचंद्र मण्डल का जन्मोउत्सव मनाया गया और बांग्ला-हिंदी में कविता पाठ हुआ.

👉 • कवि प्रकाशचंद्र मण्डल का जन्मोउत्सव मनाया गया ‘बंगीय’ सदस्यों द्वारा…
‘छत्तीसगढ़ आसपास’ [भिलाई निवास,इंडियन कॉफी हाउस : 02 अगस्त,2025 : रिपोर्ट-प्रस्तुति प्रदीप भट्टाचार्य]
विगत 65 वर्षों से इस्पात नगरी भिलाई में बांग्ला साहित्यिक, संस्कृति एवं सांस्कृतिक उद्देश्य को लेकर संचालित ‘बंगीय साहित्य संस्था’ प्रति सप्ताह ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा’ का आयोजन संस्था के सदस्य करते हैं. इस कड़ी में आड्डा-88, 02 अगस्त, 2025 को भिलाई निवास के इंडियन कॉफी हाउस में सम्पन्न हुई. इस विचार-विमर्श में शामिल हुए- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति एवं बांग्ला-अंग्रेजी की देशव्यापी चर्चित लेखिका, कवयित्री बानी चक्रवर्ती, लब्धप्रतिष्ठित बांग्ला लेखक व कवि समरेंद्र विश्वास, ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार, बांग्ला-हिन्दी के चर्चित कवि प्रकाशचंद्र मण्डल,’छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक व प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य, राष्ट्रवादी कवि बृजेश मल्लिक, हिंदुत्ववादी कवि पं. बासुदेव भट्टाचार्य, विचारशील लेखक व कवि वीरेंद्रनाथ सरकार, बांग्ला कवि विपुल सेन, सुजॉशा सेन, सोमाली शर्मा,साहित्यिक चिंतक रविंद्रनाथ देबनाथ और शंकर भट्टाचार्य.
आज के ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा- 88’ की अध्यक्षता बानी चक्रवर्ती और विशिष्ट अतिथि थे संस्था के संरक्षक समरेंद्र विश्वास.
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विचार-विमर्श के पूर्व ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के उप सचिव प्रकाशचंद्र मण्डल का जन्मोउत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया-

👉 [बाएँ से] • समरेंद्र विश्वास, बृजेश मल्लिक, प्रकाशचंद्र मण्डल, विपुल सेन, बानी चक्रवर्ती, दुलाल समाद्दार और सुजॉशा सेन

👉 [बाएँ से] • शंकर भट्टाचार्य, प्रदीप भट्टाचार्य, प्रकाशचंद्र मण्डल और विपुल सेन

👉 •’बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्यों ने उपहार देकर जन्मदिन की बधाई दी…

👉 • बंगीय सदस्यों ने केक काटकर प्रकाश दादा का जन्म दिन मनाया…
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कविता पाठ-

• प्रकाशचंद्र मण्डल ने ‘एक दिन-र जीबन… [एक दिन की जिंदगी]/ • बानी चक्रवर्ती ने ‘सेखाने फेले ऐसेछी’ [जहां छोड़कर चली आई]/ • दुलाल समाद्दार ने ‘आजकल कबिता लिखते भोय पाई…'[आजकल कविता लिखने में डर लगता है] और ‘स्वप्न’/ • समरेंद्र विश्वास ने ‘आत्महत्या’.

• विपुल सेन ने ‘मॉन ऐर कॉथा’ [मन की बात] और ‘बृष्टि जॉल’ [बरसात का पानी]/ • सुजॉशा सेन ने प्रसिद्ध कवि सुजॉन मिठ्ठी की कविता ‘आमार झोर’ [मेरी आंधी]/ • रविंद्रनाथ देबनाथ ने ‘कबिता मोददे एक टा मोबाइल’ • पं. बासुदेव भट्टाचार्य ने चर्चित कवयित्री वंदना सिन्हा की कृति ‘ऑमी सेई मेये’ से एक कविता ‘आशा’ का पाठ किया.

• बृजेश मल्लिक ने रक्षा बंधन के पवित्र पर्व के उपलक्ष्य में एक कविता ‘भाई बोन एर भालोबासा’ [भाई-बहन का अटुट प्यार]/ • वीरेंद्रनाथ सरकार ने ग्राम्य जीवन को रेखांकित करती एक कविता ‘ऐक हाटू का- द्दा’ [घुटने तक का मिट्टी]/ • सोमाली शर्मा ने ‘कबीता तोमाय’ [कविता तुम्हारी] और • शंकर भट्टाचार्य ने एक हिंदी कविता ‘उपरांत’ का पाठ किया.
• प्रदीप भट्टाचार्य द्वारा लिखित हिंदी की छोटी-छोटी कविता का बांग्ला भाषा में अनुवाद कविता का पाठ प्रकाशचंद्र मण्डल ने किया. अनुवाद बांग्ला कवि तारकनाथ चौधुरी ने किया-

“रक्त रंजित इतिहास को चाकू मत दिखाओ/तुम में यदि पौरुष हो कलम को आजमाओ”
“वे अपने ही इतिहास पर/साध रहे हैं निशाना/जिन्हें नहीं आता है/इतिहास को बनाना”
“इतिहास भी/अपने इतिहास पर/रो रहा है/यह देख कर कि/क्या से क्या हो रहा है”
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‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-88’ कुछ प्रमुख चित्र झलकियाँ-

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के बंगीय सदस्य

👉 • कृति भेंट

👉 • कृति भेंट

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के दो लब्धप्रतिष्ठित कवि प्रदीप भट्टाचार्य और बानी चक्रवर्ती
आज के आयोजन का संचालन प्रदीप भट्टाचार्य और आभार व्यक्त प्रकाशचंद्र मण्डल ने किया.
[ • प्रस्तुति व रिपोर्ट : प्रदीप भट्टाचार्य ]
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