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- विश्व आदिवासी दिवस : ‘भिलाई स्टील प्लांट शेड्यूल ट्राइब एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन’ द्वारा भव्य रैली : आदिवासी संस्कृति, खान-पान, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक एकता का शानदार प्रदर्शन करते हुए भिलाई आदिवासी मंडल ने रेल चौक से भव्य रैली के साथ, सेक्टर-चार इस्पात क्लब में सांस्कृतिक आयोजन के साथ समापन हुआ
विश्व आदिवासी दिवस : ‘भिलाई स्टील प्लांट शेड्यूल ट्राइब एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन’ द्वारा भव्य रैली : आदिवासी संस्कृति, खान-पान, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक एकता का शानदार प्रदर्शन करते हुए भिलाई आदिवासी मंडल ने रेल चौक से भव्य रैली के साथ, सेक्टर-चार इस्पात क्लब में सांस्कृतिक आयोजन के साथ समापन हुआ

• छत्तीसगढ़ आसपास
• 09 अगस्त, 2025
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर भिलाई स्टील प्लांट शेड्यूल्ड ट्राइब एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा रेल चौक, भिलाई में आदिवासी मंडल, भिलाई द्वारा आयोजित भव्य रैली में आदिवासी संस्कृति खान पान, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक एकता का शानदार प्रदर्शन हुआ।
संगठन द्वारा आदिवासी मंडल के पदाधिकारियों का फूल-मालाओं और पारंपरिक गीतों ,ढोल-नगाड़ा के साथ में स्वागत किया गया। लगभग 2500 सदस्यों को पारंपरिक नाश्ते के रूप में फरहा और टमाटर की चटनी सरई पत्ते के दोने में परोसी गई, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके साथ ही, एक आकर्षक सेल्फी प्वाइंट ने लोगों का ध्यान खींचा, जो आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा।
साथ ही शाम 7 बजे सेक्टर-4 के इस्पात क्लब में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में लगभग 500 एस.टी. कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य शामिल हुए। जिसकी शुरूआत संगठन के अध्यक्ष श्री प्रदीप टोप्पो के कविता के द्वारा –
” रंगो से बुनी, कला की कहानी,
आदिवासी संगीत, दिल की रवानी।
बाँसुरी की तान, चित्रों की बोली,
आदिवासी कला, मन को है भोली।
नाच-गान में, बस्ती है शान,
हर धुन में बसता, आदिवासी सम्मान।”
स्वागत संबोधन करते हुए की गई। श्री प्रदीप टोप्पो ने बताया कि इस आयोजन को करना और हमारा एकत्रित होने का उद्देश्य है कि हम अपनी समृद्ध आदिवासी सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और एकता का उत्सव मना सके। साथ ही सभी एस.टी. कर्मचारियों को संगठन के बैनर तले एकत्रित भी किया जा सके। यह विशेष दिन हमें हमारी जड़ो से जोड़ता है, हमें हमारे पूर्वजों के संघर्षों और उनकी विरासत की याद दिलाता है और हमें भविष्य की ओर प्रेरित करता है। विश्व आदिवासी दिवस केवल एक दिन नहीं, बल्कि एक संदेश है – हमारी संस्कृति, हमारी परंपराओं और हमारी एकता को संरक्षित करने का संदेश। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी जड़े कितनी गहरी हैं और हमारा भविष्य कितना उज्जवल हो सकता है। सदस्यों के द्वारा दिखाई गये एकता और उत्साह ही हमें आने वाले समय में और मजबूती से अपनी पहचान को बनाए रखने के लिये प्रेरित करेगा। साथ ही एक संकल्प को हम सभों को लेना होगा कि हम अपनी आदिवासी संस्कृति, भाषा और परंपराओं को न केवल संरक्षित करेंगे, बल्कि अगली पीढ़ियों तक बड़े गर्व के साथ पहुंचाएंगे।
कार्यक्रम में अतिथि के रूप में श्री के.के. तिर्की (GM I/c) और डॉ. (श्रीमती) नीलि एस. कुजूर (ACMO) उपस्थित थे। अतिथियों का पारंपरिक तरीके पानी से हाथ धोकर, बैज एवं आदिवासी गमछा पहनाकर तथा बुके देकर स्वागत किया गया। जोकि अपनी आदिवासी परंपरा को बचाये रखने की संगठन द्वारा एक नई पहल की शुरूआत है। श्री के.के. तिर्की ने संदेश दिया कि आदिवासी समुदाय प्रकृति से जुड़ा हुआ समुदाय है। आदिवासी समुदाय को उनके सांस्कृतिक, आर्थिक एवं राजनैतिक अधिकार का प्राप्त होना, उनकी भाषा, परंपरा और जीवन शैली को संरक्षित करना, होने वाले अन्याय और भेदभाव को समप्त करना, आदिवासियों के कल्याण, विकास व सशक्तिकरण के सरकार से दिशानिर्देश दिलाना इत्यादि ज्वलंत मुद्दे हैं। प्रकृति से जुड़े होने के कारण प्रकृति जीवन का सांमजस्य आदिवासी जीवन शैली पर्यावरण संरक्षण के रूप में एक अच्छा आदर्श व उदाहरण है। विश्व आदिवासी दिवस एक संकल्प है -आदिवासियों को उनका सम्मान, अधिकार एवं पहचान दिलाने का। यह दिन हमें अपनी सांस्कृतिक जीवन शैली और संघर्षों को सहेजने और उससे सीखने का अवसर देता है।
डॉ. (श्रीमती) नीलि एस. कुजूर ने संदेश दिया कि हम संगठित होकर एवं एक दूसरे के सहयोग से ही आगे बढ़ सकते हैं। जिस प्रकार एक उंगुली अकेले कमजोर होती है परन्तु सभी उंगुली यदि एक मुठ्ठी बन जाए तो वह मजबूत हो जाती है। और संगठित होकर हम कुछ भी कार्यों को आसानी से कर सकते हैं।यह विश्व आदिवासा दिवस अवसर हम सभों के लिये गर्वान्वित होने का अवसर है।
अतिथियों के प्रेरक विचार, मार्गदर्शन और गरिमामय उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बनाने के साथ-साथ उपस्थित सभी सदस्यों को अपनी आदिवासी संस्कृति और समाज के प्रति और जागरूक और प्रेरित किया।
रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। न केवल दर्शकों का मन मोहा, बल्कि आदिवासी परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को गर्व के साथ प्रस्तुत किया। एकल गीत में श्री रिझरूस टोप्पो और बांसुरी वादन में श्री शिशिर मुंडू ने शानदार प्रदर्शन किया। एकल नृत्य में श्रीमती केकती ठाकुर और श्री भूपेंद्र चंद्रवंशी, युगल नृत्य में श्रीमती प्रियंका एक्का और ऐईजा नव्या तिर्की तथा सामूहिक नृत्य में बी.एस.पी. सहेली ग्रुप से श्रीमती ज्योति रश्मि कच्छप, अनिता मिंज, दीपमाला किरो, रश्मिता पूर्ति, सरिता ओरम और कल्पना सिंह, सरजोम बाहा ग्रुप से श्रीमती सोनिया सोरेन, श्रीमती प्रतिभा हांसदा, सुश्री देवगे सोरेन, श्रीमती सोहागी किस्कू, श्री एली हांसदक, श्रीमती सुकन्ती सोरेन और बच्चों के सामूहिक नृत्य में ऐईजा नव्या तिर्की, सियोन मुंडू, बहालेन मुंडू इत्यादि ने अपनी प्रस्तुतियों से समा बांध दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित बी.एस.पी. के एस.टी. अधिकारियों में श्री बहादेव टुडू, जेवियर बेक, श्याम लाल नेगी, सतेन्द्र बाड़ा, निशांत प्रवीण टोप्पो, हेमचंद नेताम, रविन्द्र कुमार ध्रुव, सलिक राम ध्रुव को आदिवासी गमछा पहनाकर संगठन के द्वारा सम्मानित किया गया।

यह आयोजन आदिवासी संस्कृति के संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और सामुदायिक एकता का प्रतीक रहा। संगठन ने इस आयोजन के माध्यम से समाज एवं एस.टी. कर्मचारियों को एकता और सतत विकास का संदेश दिया गया।इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष प्रदीप टोप्पो, महासचिव सुशील कुमार मारांडी और कोषाध्यक्ष भिमांशु कच्छप, अजय कुमार, हरीशचंद्र कुंजाम, बी.बी.सिंह, लाॅरेंस मधुकर, ओमनाथ नेताम, राम सिंह मरकाम, दिलीप कुमार ठाकुर, कुंज लाल ध्रुव और फत्ते राम उरांव, घनश्याम सिंह सिदार, श्याम सुंदर मुर्म, ललित कुमार बघेल, मनोज हेम्ब्ररोम, नरेश हांसदा, कृष्ण कुमार मुर्म, प्रकाश चंद्र हेम्ब्ररोम, अभिमन्यु मुंडा, नील मिंज, नारद लाल मंडावी, भागवत ध्रुव, रंजीत टोप्पो, अजीत मिरधा और टिकाराम हेम्ब्ररोम, सुनील कच्छप, किरण बास्की ,बीरू बास्के, रतन कच्छप, सिरील हांसदा, राम पूर्ति, धनंजय हांसदा और दुर्गा चरण उरांव, शिशिर मुंडू, रिझरूस टोप्पो, तिलोत्तमा बघेल, दीपा मंडावी, चम्पा सीदार, रोहिणी नेताम, जुली मधुकर, अनिता बरवा इत्यादि अन्य सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान व सहयोग रहा।
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