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- अंतर्राष्ट्रीय समाजवाद किसान सैनिक संस्था नई दिल्ली द्वारा आयोजित विश्व आदिवासी सम्मेलन में छत्तीसगढ़ [भिलाई] के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा ने कहा – ‘5000 हजार वर्षों के ज्ञात इतिहास में आदिवासी समाज ने हर देश में शांति,एकता और समता की दिशा में काम किया. सरल, त्यागी, स्वाभाविक जीवन जीने वाला यह समाज धीरे-धीरे षडयंत्रों और समय की मार से अनुपम एवं अनुकरणीय विशेषताओं के बावजूद बिखरा और आभाहीन हुआ’
अंतर्राष्ट्रीय समाजवाद किसान सैनिक संस्था नई दिल्ली द्वारा आयोजित विश्व आदिवासी सम्मेलन में छत्तीसगढ़ [भिलाई] के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा ने कहा – ‘5000 हजार वर्षों के ज्ञात इतिहास में आदिवासी समाज ने हर देश में शांति,एकता और समता की दिशा में काम किया. सरल, त्यागी, स्वाभाविक जीवन जीने वाला यह समाज धीरे-धीरे षडयंत्रों और समय की मार से अनुपम एवं अनुकरणीय विशेषताओं के बावजूद बिखरा और आभाहीन हुआ’

👉 • नई दिल्ली में विश्व आदिवासी सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए राजमाता फुलवादेवी कांगे और डॉ. परदेशीराम वर्मा
• छत्तीसगढ़ आसपास
• 09 अगस्त, 2025
नई दिल्ली : सिटी फोर्ट आडीटोरियम में 9 अगस्त 2025 को विश्व आदिवासी दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप छत्तीसगढ़ भिलाई के साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा ने व्याख्यान दिया। अंतराष्ट्रीय समाजवाद किसान सैनिक संस्था नई दिल्ली द्वारा यह आयोजन सम्पन्न हुआ.
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‘विश्व आदिवासी सम्मेलन’ में मुख्य अतिथि साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा ने कहा-

5000 हजार वर्षों के ज्ञात इतिहास में आदिवासी समाज ने हर देश में शांति एकता और समता की दिशा में काम किया। सरल, त्यागी स्वाभाविक जीवन जीने वाला यह समाज धीरे-धीरे षडयंत्रों और समय की मार से अनुपम और अनुकरणीय विशेषताओं के बावजूद बिखरा और आभाहीन हुआ। मूल निवासी होने के गौरव के बावजूद अधिकारों का सही विरोध धीरे-धीरे खत्म होता चला गया।
अब नए परिवेश और समय में पुनः यह समाज अंगड़ाई लेकर उठ खड़ा हुआ है। एक पूरा नक्षत्रमंडल है आदिवासी सपूत और जनहित के लिए स्वहित त्यागने वालों का। उनके बताए रास्तों पर चलकर समाज अब पुनः संगठित होकर चल पड़ा है। छत्तीसगढ़ में हीरासिंहदेव अर्फ कंगला मांझी ने जो न्याय अधिकार और सेवा का बीड़ा उठाया था उसे राजमाता फुलवादेवी राजकुमारी एवं कुंभदेव कांगे लगातार आगे बढ़ा रहे हैं।
इस अवसर पर अध्यक्षता करते हुए राजमाता फुलवादेवी कांगे ने कहा कि आदिवासी समाज भोला तो है मगर साहसी ओर संगठित है। वह दाता बनकर और रक्षक बनकर ही गौरव अनुभव करता है। हमारे प्रशिक्षित सेवाभावी लाखों सैनिक गावों मंे, शहरों में सौहाद्र, मेलमुलाकात सेवा का काम कर मांझी जी के बताये रास्ते पर चल रहे हैं। बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश से यहां तीन हजार सैनिक और संगठन की महिलाएं आई। वे सब यहां से लौटकर पुनः गावों में सेवा देंगी। साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा ने आदिवासी समाज के लिए जो काम किया है जैसा लेखन किया है अनुकरणीय है। वे हर कदम पर हमें साथ देते हैं मुझे बहुत संतोष है कि उन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में इस विश्व आदिवासी सम्मेलन में हम सबको सम्बोधित किया।
कार्यक्रम में सैनिक संगठन के प्रमुख समिति के उपाध्यक्ष कंगला मांझी के सुपुत्र कुंभदेव कांगे ने स्वागत भाषण दिया। बेटी बचाओ और नशामुक्ति अभियान के अखिल भारतीय अध्यक्ष ईश्वउमरे तथा जिला पंचायत सदस्य लांजी बालाघाट, श्रीमती ज्योति, भारतीय आदिम जाति सेवक संघ नई दिल्ली के सचिव रविकान्त विशेष अतिथि थे। भिलाई के नीतीश कुमार भी इस सम्मेलन में भागीदार रहे। कार्यक्रम संचालन अधिवक्ता तथा लेखिका राजकुमारी कांगे ने किया।
कल्याणी कोडेपे को कराते चेम्पीयनशिप में स्वर्ण पदक मिलने पर सम्मानित किया गया। रिषभ कांगे को वीर नारायण सिंह सम्मान, सुस्मिता कांगे को झलकारी बाई सम्मान, शशिकला सलाम को गेंदसिंह ठाकुर सम्मान तथा ललिता सलाम को तिलका मांझी सम्मान प्रदान किया गया। इस विराट सम्मेलन में राजू उइके संगठन के सचिव ने आभार व्यक्त किया। 10 अगस्त को रणजीत सिंह मार्ग स्थित आदिवासी केंप में देश के विभिन्न प्रांतों के आदिवासी सैनिकों से डॉ. परदेशीराम वर्मा की विभिन्न समस्याओं पर बातचीत हुई।
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