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मुलाकात : झारखंड [हजारीबाग-रांची] के अरुण जायसवाल के सम्मान में अरुण कुमार निगम, डॉ. सोनाली चक्रवर्ती, गजराजदास महंत, बलराम चंद्राकर, देशवीर सिंह अहुलवालिया, संदीप चक्रवर्ती और प्रदीप भट्टाचार्य ने इंडियन कॉफी हाउस में विचार-विमर्श बैठक की और उनका सम्मान किया

👉 [बाएँ से] देशवीर सिंह अहुलवालिया, डॉ. सोनाली चक्रवर्ती, प्रदीप भट्टाचार्य, अरुण जायसवाल, अरुण कुमार निगम, बलराम चंद्राकर और गजराजदास महंत
भिलाई [छत्तीसगढ़ आसपास]
बीते कल झारखंड [रांची,हजारीबाग] से रेडियो सिलोन [श्रीलंका ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन रेडियो स्टेशन] के वरिष्ठ श्रोता एवं अमीन सयानी द्वारा प्रसारित प्रोग्राम ‘बिनाका गीत माला’ से सम्मानित लिसनर्स अरुण कुमार जायसवाल भिलाई प्रवास पर आए थे.
अरुण कुमार जायसवाल ने भिलाई-दुर्ग के अपने समय के चर्चित रेडियो श्रोता प्रदीप भट्टाचार्य और अरुण कुमार निगम से मिलने की इच्छा जाहिर की. अरुण [दुर्ग] ने पहल की और हम सब अरुण [हजारीबाग] से मुलाकात की. मुलाकात इंडियन कॉफी हाउस सेक्टर-10 में हुई. विचार-विमर्श मुलाकात बैठक में देश के लब्धप्रतिष्ठित ‘छंद के छ’ कवि अरुण कुमार निगम, ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक व प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य, ‘स्वयंसिद्धा’ की निर्देशिका डॉ. सोनाली चक्रवर्ती, देश के सुपरिचित हास्य के मंचीय कवि गजराजदास महंत, देश के सुप्रसिद्ध चर्चित कवि बलराम चंद्राकर, ‘संचार टुडे’ के संपादक पत्रकार देशवीर सिंह अहुलवालिया और सामाजिक चिंतक संदीप चक्रवर्ती उपस्थित थे.
रेडियो की दशा व दिशा के अलावा साहित्य पर भी विस्तार से चर्चा हुई. बलराम चंद्राकर, गजराज दास महंत, डॉ. सोनाली चक्रवर्ती ने कविता पाठ किए. अरुण कुमार जायसवाल ने रेडियो प्रोग्राम के बारे में अपनी बात रखते हुए बोले कि रेडियो सिलोन में जो भी साप्ताहिक कार्यक्रम प्रसारित होते थे, वे सभी कार्यक्रम गीतों के साथ साहित्यिक भावपूर्ण होते थे. अरुण कुमार जायसवाल वर्तमान में फेसबुक लाइव में पुराने गीतों को लेकर बिनाका गीत माला की तर्ज पर प्रस्तुति देते हैं. उन्होंने कहा प्रदीप भट्टाचार्य, अरुण कुमार निगम रेडियो कार्यक्रमों के सभी साप्ताहिक प्रोग्रामों में भाग लेते हुए प्रसिद्धि पाई. आज दोनों का नाम साहित्य में है. ये उपलब्धि रेडियो से ही है. अरुण कुमार निगम ने कहा कि रेडियो के माध्यम से ही आज 50 साल बाद भी हमारी मित्रता कायम है और हम मिल रहे हैं. भले ही हम रेडियो से अलविदा हो गए मगर हमारी पहचान रेडियो ने ही कराया था. मैं साहित्य में और प्रदीप भट्टाचार्य पत्रकारिता में बड़ा नाम है.
इस अवसर पर अरुण जायसवाल ने 50 साल पुरानी रेडियो से संबंधित कई पत्र-पत्रिकाएं लेकर आए थे. हम सबने उनका अवलोकन किया. खुशी तब हुई, जब मेरे संपादन में 1978 में प्रकाशित रेडियो पत्रिका ‘अभियान’ लेकर आए थे. यह पत्रिका मेरे पास भी नहीं है. विदित हो कि मैंने रेडियो सिलोन से ‘बदलते हुए साथी’ और ‘वाक्य गीतांजलि’ प्रसारित हुए कार्यक्रमों को लेकर कई वर्षों तक त्रिमासिक बुलेटिन ‘रेडियो पत्रिका’ निकालता रहा.
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चर्चा एवं विचार-विमर्श के बाद अरुण कुमार निगम ने अपनी कविता संग्रह ‘चैत की चंदनिया’ और डॉ. सोनाली चक्रवर्ती ने ए मिशन विथ ए विज़न महिलाओं को समर्पित संस्था ‘स्वयंसिद्धा’ द्वारा प्रकाशित “प्रत्यावर्तन” [स्मारिका-2024] भेंट किया-

👉 डॉ. सोनाली चक्रवर्ती, कवि अरुण कुमार निगम को पत्रिका भेंट करते हुए…

👉 डॉ. सोनाली चक्रवर्ती, कवि बलराम चंद्राकर को पत्रिका भेंट करते हुए…

👉 डॉ. सोनाली चक्रवर्ती, अरुण कुमार जायसवाल को पत्रिका भेंट करते हुए…

👉 डॉ. सोनाली चक्रवर्ती, ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक प्रदीप भट्टाचार्य को पत्रिका भेंट करते हुए…

👉 डॉ. सोनाली चक्रवर्ती, ‘संचार टुडे’ के संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार देशवीर सिंह अहुलवालिया को पत्रिका भेंट करते हुए…

👉 डॉ. सोनाली चक्रवर्ती, कवि गजराजदास महंत को पत्रिका भेंट करते हुए…

▪️ अरुण कुमार निगम, अपनी कृति ‘चैत की चंदनिया’ डॉ. सोनाली चक्रवर्ती और प्रदीप भट्टाचार्य को भेंट करते हुए…

▪️ {बाएँ से} गजराजदास महंत, प्रदीप भट्टाचार्य, अरुण कुमार जायसवाल, डॉ. सोनाली चक्रवर्ती, बलराम चंद्राकर और अरुण कुमार निगम

▪️ बैठक के बाद ग्रुप फोटो {बाएँ से} 👉 देशवीर सिंह अहुलवालिया, अरुण कुमार निगम, बलराम चंद्राकर, गजराजदास महंत, अरुण जायसवाल, डॉ. सोनाली चक्रवर्ती और प्रदीप भट्टाचार्य
अंत में अरुण जायसवाल ने इस सफल बैठक के लिए सभी आत्मीय मित्रों के प्रति आभार व्यक्त किया.
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chhattisgarhaaspaas
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