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- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ : ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-92’ में शामिल हुए- स्मृति दत्त,समरेंद्र विश्वास,दुलाल समाद्दार,पल्लव चटर्जी,प्रकाशचंद्र मण्डल,बीरेंद्रनाथ सरकार,प्रदीप भट्टाचार्य,बृजेश मल्लिक,विपुल सेन,जीबन हालदार,पं. बासुदेव भट्टाचार्य,सुबीर रॉय,रविंद्रनाथ देबनाथ और शंकर भट्टाचार्य. बांग्ला भाषा में साहित्यिक उन्नयन के लिए चर्चा एवं काव्य पाठ हुआ
‘बंगीय साहित्य संस्था’ : ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-92’ में शामिल हुए- स्मृति दत्त,समरेंद्र विश्वास,दुलाल समाद्दार,पल्लव चटर्जी,प्रकाशचंद्र मण्डल,बीरेंद्रनाथ सरकार,प्रदीप भट्टाचार्य,बृजेश मल्लिक,विपुल सेन,जीबन हालदार,पं. बासुदेव भट्टाचार्य,सुबीर रॉय,रविंद्रनाथ देबनाथ और शंकर भट्टाचार्य. बांग्ला भाषा में साहित्यिक उन्नयन के लिए चर्चा एवं काव्य पाठ हुआ

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्य साहित्य पर चर्चा और काव्य पाठ करते हुए…
‘छत्तीसगढ़ आसपास’ [भिलाई निवास,इंडियन कॉफी हाउस : 30 अगस्त,2025 : रिपोर्ट-प्रस्तुति प्रदीप भट्टाचार्य एवं फोटो क्लिक पल्लव चटर्जी]
विगत 65 वर्षों से इस्पात नगरी भिलाई में बांग्ला साहित्यिक, संस्कृति एवं सांस्कृतिक उद्देश्यों को लेकर संचालित ‘बंगीय साहित्य संस्था’ प्रतिमाह ‘साहित्य सभा’ और प्रति सप्ताह ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा’ का आयोजन बंगीय सदस्य करते हैं. इस कड़ी में आड्डा-92 श्रीश्री गणेशाय नम: गणेश महोत्सव के पुण्य अवसर पर 30 अगस्त, 2025 को भिलाई निवास के इंडियन कॉफी हाउस में सम्पन्न हुआ. इस विचार-विमर्श में बांग्ला भाषा एवं साहित्यिक उन्नयन के लिए चर्चा और देश, समाज, आध्यात्मिक व प्रगतिशील विषयों को लेकर काव्य पाठ हुआ. इस अवसर पर उपस्थित हुए- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति एवं देश की लब्धप्रतिष्ठित वयोवृद्ध लेखिका कवयित्री स्मृति दत्त, संस्था के संरक्षक एवं चर्चित बांग्ला लेखक कवि समरेंद्र विश्वास, बांग्ला में प्रकाशित लिटिल मेंगजिंन ‘मध्यबलय’ के संपादक व गंभीर कवि दुलाल समाद्दार, विचारवान कवि पल्लव चटर्जी, संस्था के सह-सचिव एवं बांग्ला-हिंदी के ख्यातलब्ध कवि नाट्यकार प्रकाशचंद्र मण्डल, चिंतनशील कवि बीरेंद्रनाथ सरकार, ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक व प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य, राष्ट्रवादी कवि बृजेश मल्लिक, हिंदुत्ववादी कवि पं. बासुदेव भट्टाचार्य, बांग्ला के सुपरिचित कवि जीबन हालदार, विपुल सेन, ‘सुर-ओ-बाणी’ के संयोजक व समाजसेवी सुबीर रॉय, साहित्यिक चिंतक रविंद्रनाथ देबनाथ और शंकर भट्टाचार्य.




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आज के सभा की अध्यक्षता स्मृति दत्त, विशिष्ट मेजबानी समरेंद्र विश्वास ने की. संचालन प्रकाशचंद्र मण्डल और आभार व्यक्त दुलाल समाद्दार ने किया.

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आज की बैठक में स्मृति दत्त, समरेंद्र विश्वास, दुलाल समाद्दार, पल्लव चटर्जी, प्रकाशचंद्र मण्डल, बीरेंद्रनाथ सरकार, प्रदीप भट्टाचार्य, बृजेश मल्लिक, विपुल सेन, जीबन हालदार, पं. बासुदेव भट्टाचार्य, शंकर भट्टाचार्य ने अपनी-अपनी प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ किया. सुबीर रॉय ने आगामी 15 सितम्बर को ‘सुर-ओ-बाणी’ के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम की जानकारी देते हुए सभी सदस्यों को सादर आमंत्रित किया और रविंद्रनाथ देबनाथ ने साहित्य सभा के संदर्भ में अपनी बात को साझा किया.
• पं. बासुदेब भट्टाचार्य ने ‘बासतो वे’ और ‘छुट्टी केनो’/ • शंकर भट्टाचार्य ने ‘पतझड़’ शीर्षक से हिंदी कविता/ • पल्लव चटर्जी ने ‘सहनयन’, ‘अजॉने पोथे’ और ‘शेओला’/ • दुलाल समाद्दार ने ‘शेओला’ और ‘बासत वो खाने.. ‘/ • समरेंद्र विश्वास ने ‘कील’ [चिटकिनी] और ‘राखी’/ • प्रदीप भट्टाचार्य ने ‘सौंदर्य जेर रहस्यो’ [खुबसूरती का राज]/ • प्रकाशचंद्र मण्डल ने ‘सुख- दुखर मेला’ और ‘दूर रे थिके भालो आछी’/ • स्मृति दत्त ने ‘गणेश र तीन अंगों’ और एक लघुकथा ‘सुंदर कांति कृष्णा शांति’/ • बृजेश मल्लिक ने ‘आमार ग्राम र बाड़ी’/ • जीबन हालदार ने ‘आम जनोता’ और ‘अनियोम टा नियोम नई’/ • विपुल सेन ने ‘सनातोनी कैंप’, ‘ पांखाजुर र उन्नयोन’ और ‘भूते र साथ’ और अंत में • बीरेंद्रनाथ सरकार ने ‘भालो थेको आकाश’ एवं एक छोटी लघुकथा ‘आलो दे वो पावा…

👉 {बाएँ से} पल्लव चटर्जी, प्रदीप भट्टाचार्य, विपुल सेन, समरेंद्र विश्वास, बृजेश मल्लिक, वीरेंद्रनाथ सरकार, जीबन हालदार, स्मृति दत्त, पं. बासुदेब भट्टाचार्य, रवींद्रनाथ देबनाथ, प्रकाशचंद्र मण्डल और सुबीर रॉय.

👉 {बाएँ से} सुबीर रॉय, दुलाल समाद्दार, प्रदीप भट्टाचार्य, विपुल सेन, समरेंद्र विश्वास, बृजेश मल्लिक, वीरेंद्रनाथ सरकार, जीबन हालदार, स्मृति दत्त, पं. बासुदेब भट्टाचार्य, रविंद्र नाथ देबनाथ, प्रकाशचंद्र मण्डल और शंकर भट्टाचार्य.

[ प्रस्तुति : प्रदीप भट्टाचार्य, पल्लव चटर्जी ]
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