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हिन्दी साहित्य भारती का श्रद्धा समर्पण एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन

हिंदी साहित्य भारती छत्तीसगढ़ : राज्य स्तरीय श्रद्धा समर्पण एवं काव्य गोष्ठी : समिति के प्रदेशाध्यक्ष बलदाऊ राम साहू ने कहा कि- “निहित स्वार्थ से उपर उठकर देश हित की चिंता करनी होगी, जब विघटनकारी ताकतें सिर उठा रही है तब राष्ट्रवादी चिंतकों को आगे की आवश्यकता है”
दुर्ग [छत्तीसगढ़ आसपास]
विश्व के 37 देशों में संचालित हिन्दी साहित्य भारती, शाखा छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में राज्य स्तरीय श्रद्धा समर्पण एवं काव्य गोष्ठी का कार्यक्रम प्रदेशाध्यक्ष बलदाऊ राम साहू की अध्यक्षता में दिनांक 31 अगस्त को दुर्ग में आयोजित हुआ। मां भारती के छायाचित्र में माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के गीत से हुआ, गीत में छत्तीसगढ़ के भाषाविद एवं संगीतज्ञ डॉ चितरंजन कर ने मधुर संगीत एवं आवाज दी है। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए श्री साहू ने कहा कि जब विघटन कारी ताकतें सिर उठा रहें हैं, तब राष्ट्रवादी चिंतकों को आगे आने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश सर्वोपरि है। हमें निहित स्वार्थ से उपर उठकर देश हित की चिंता करनी होगी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बंशी लाल मंडावी ने कहा- एक देशभक्त वह व्यक्ति होता है जो अपने देश और उसके लोगों से बहुत प्यार करता है, उनके हितों का समर्थन करता है, उनकी रक्षा करता है, और राष्ट्र के विकास व सुरक्षा के लिए समर्पित होता है। विशेष अतिथि एल आर सहानी ने कहा हमें देशों में संचालित साहित्यिक संस्थाओं के माध्यम से राष्ट्रीय एकता व समरस समाज निर्माण के लिए पहल करना चाहिए। आगंतुक साहित्य प्रेमियों ने मां भारती के प्रति अपनी प्रतिबद्धता एवं श्रद्धा समर्पण एवं सहयोग भावना का परिचय दिया। तत्पश्चात आयोजित कवि गोष्ठी में कवियों ने मां भारती सहित अन्य सुसंगत विषय पर अपनी रचनाओं का पाठ किया। कवि नरेंद्र देवांगन अपनी देश भक्ति पूर्ण कविता “निज आन मान बलिदान करुँ मां भारती तेरी शान रहे, मैं रहूँ या फिर मिट जाऊं मां भारती का स्वाभिमान रहे।” राकेश गुप्ता ‘रूसिया’ ने “त्याग तपस्या प्रेम दया पुरुषार्थ का भगवन
राम नहीं बस नाम सकल जीवन का दर्शन से श्रोताओं को राममय कर दिया।
बलदाऊ राम साहू ने अपने बाल गीत के माध्यम से बच्चों आह्वान करते हुए कहा- “विविधा में भी एकता के गीत दुहराएँ,फिर से एक अखंड भारत नया बनाएँ।” इनके अतरिक्त अपनी रचनाओं से बुद्ध देव शर्मा, डाॅ संजय दानी, , शुचि भवि, चंद्र कांत साहू, मंजुलता शर्मा, तथा घनश्याम सोनी ने समसामयिक कविता पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर वाहवाही बटोरी। रामेश्वर निषाद ने मां भारती पर आधारित मनमोहक भजन की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर साहसी, मुकुंद साहू, नरेंद्र साहू, अघनू राम साहू सहित बड़ी संख्या में कवियों , साहित्यकारों एवं साहित्य प्रेमी जनों ने काव्य रस का आस्वादन किया।

• ये जानकारी ‘हिंदी साहित्य भारती’ के महामंत्री चंद्रकांत साहू ने ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ को बताया.
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