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जश्ने ईद मिलादुन्नबी के 1500 वें साल 5 सितम्बर पर विशेष आलेख : मानवाधिकार का पहला घोषणा पत्र है पैगम्बर मुहम्मद का आखिरी खुतबा- मोहम्मद मजहर नदीम
पैगम्बरे इस्लाम [स.] का आखिरी खुतबा , जिसे खुतबातुल विदा या अंतिम उपदेश भी कहते हैं, इस्लाम धर्म के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इस्लाम के पूर्ण होने की घोषणा करता है और मुसलमानों को कुरआन व सुन्नत (पैगंबर की शिक्षाएं) का पालन करने और आपसी भाईचारे व न्याय के सिद्धांतों पर चलने की हिदायत देता है। इस खुत्बे में कई महत्वपूर्ण बातें हैं। इसमें पैगम्बर मुहम्मद ने इंसानियत के लिए जो हिदायतें बताई हैं, उन्हें दुनिया का पहला मानवाधिकार का घोषणा पत्र भी माना जाता है। पैगम्बरे इस्लाम (पैगंबर मुहम्मद) ने अपना यह आखिरी खुत्बा शुक्रवार 9 ज़िलहिज्जा, 10 हिजरी (6 मार्च 632 ईस्वी) को मक्का के पास अराफात पहाड़ी की उराना घाटी में दिया था। यह खुतबा उनकी आखिरी हज यात्रा (विदाई हज) के दौरान दिया गया था, जिसमें उन्होंने अपने अनुयायियों को इस्लाम के मूलभूत सिद्धांतों और जीवन के आदर्शों के बारे में मार्गदर्शन दिया।

अपने खुत्बे में उन्होंने कहा- “ऐ लोगो! मेरी बात ध्यान से सुनो। हो सकता है इस साल के बाद मैं इस जगह तुमसे न मिल सकूँ। तुम्हारा ख़ून, तुम्हारा माल और तुम्हारी इज़्ज़त, इस दिन, इस महीने और इस शहर की तरह महफ़ूज़ हैं। सुन लो! क्या मैंने तुम्हें पहुँचा दिया?” (सहाबा ने कहा: जी हाँ, या रसूलल्लाह) आप ने फ़रमाया: “ऐ अल्लाह! तू गवाह रहना। जाहिलियत का सारा सूद (ब्याज) हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया गया। सबसे पहले मैं अपने चाचा अब्बास बिन अब्दुल मुत्तलिब का सूद माफ़ करता हूँ। औरतों के बारे में अल्लाह से डरो। तुम्हारे उन पर हक़ हैं और उनके तुम पर हक़ हैं। सुन लो! तमाम मुसलमान आपस में भाई-भाई हैं। न किसी अरब को गैर-अरब पर कोई फ़ज़ीलत है, न ग़ैर-अरब को अरब पर; न गोरे को काले पर, न काले को गोरे पर–फ़ज़ीलत सिर्फ़ तक़वा से है। मैं तुम्हारे दरमियान दो चीज़ें छोड़कर जा रहा हूँ, अगर तुम उन्हें मजबूती से थाम लोगे तो कभी गुमराह न होगे – अल्लाह की किताब और उसके नबी की सुन्नत। सुन लो! क्या मैंने तुम्हें पहुँचा दिया?” सहाबा ने कहा: “जी हाँ।” आप ने आसमान की तरफ़ उंगली उठाई और तीन बार फ़रमाया: “ऐ अल्लाह! गवाह रहना।” यह वही ख़ुत्बा है जिसे इस्लामी दुनिया का पहला इंसानी हक़ूक़(मानवाधिकार) का चार्टर कहा जाता है।
[ • आलेख के लेखक मोहम्मद मजहर नदीम छत्तीसगढ़ दुर्ग से हैं. • संपर्क : 99932 48122 ]
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